UP Rajya Sabha Elections: हरदीप पुरी-बीएल वर्मा की उम्मीदवारी खारिज, रेस से बाहर होने के बाद अब आगे क्या?

केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी और केंद्रीय राज्य मंत्री बीएल वर्मा के राजनीतिक भविष्य को लेकर चल रही अटकलों के बीच बीजेपी ने बड़ा फैसला किया है। यूपी की 10 राज्यसभा सीटों के लिए पार्टी ने 8 उम्मीदवारों के नाम घोषित कर दिए हैं, लेकिन इस सूची में हरदीप सिंह पुरी और बीएल वर्मा का नाम नहीं है।

Post Published By: Komal Chauhan
Updated : 5 October 2026, 6:29 PM IST
google-preferred

New Delhi: केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी (Hardeep Singh Puri) और केंद्रीय राज्य मंत्री बीएल वर्मा (BL Verma) के राजनीतिक भविष्य को लेकर चल रही अटकलों के बीच बीजेपी (BJP) ने बड़ा फैसला किया है। यूपी की 10 राज्यसभा सीटों के लिए पार्टी ने 8 उम्मीदवारों के नाम घोषित कर दिए हैं, लेकिन इस सूची में हरदीप सिंह पुरी और बीएल वर्मा का नाम नहीं है। दोनों नेताओं का मौजूदा राज्यसभा कार्यकाल 25 नवंबर 2026 को खत्म हो रहा है। ऐसे में अब सबसे बड़ा सवाल है कि क्या राज्यसभा सदस्यता खत्म होने के बाद दोनों को केंद्रीय मंत्रिमंडल से इस्तीफा देना पड़ेगा?

BJP की सूची में दोनों नेताओं का नाम नहीं

BJP ने 5 अक्टूबर को उत्तर प्रदेश से राज्यसभा चुनाव के लिए अपने 8 उम्मीदवारों के नाम घोषित किए। पार्टी की सूची में धर्मपाल सिंह, राधाकांत ओझा, प्रकाश पाल, विद्यासागर सोनकर, गोपी कृष्ण पांडेय, प्रियंका सिंह रावत, राम प्रताप सिंह चौहान और श्रुति गंगवार के नाम शामिल हैं। खास बात यह है कि मौजूदा राज्यसभा सांसद और केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी तथा बीएल वर्मा को इस सूची में जगह नहीं मिली।

ये भी पढ़ें: जिस नेता ने मंडल से शुरू किया था सफर, अब राज्यसभा जाएंगे रामप्रताप सिंह चौहान; जानिए पूरा राजनीतिक सफर

25 नवंबर को खत्म हो रहा कार्यकाल

हरदीप सिंह पुरी और बीएल वर्मा दोनों उत्तर प्रदेश से राज्यसभा सांसद हैं। दोनों का मौजूदा कार्यकाल 25 नवंबर 2026 को समाप्त होना है। चुनाव आयोग ने यूपी की 10 राज्यसभा सीटों के लिए 16 अक्टूबर को मतदान निर्धारित किया है। इन सीटों में बीजेपी की 8 सीटें शामिल हैं, जबकि सपा और बसपा की एक-एक सीट का कार्यकाल भी समाप्त हो रहा है। पहले यह संभावना जताई जा रही थी कि बीजेपी दोनों नेताओं को दोबारा राज्यसभा भेज सकती है। लेकिन अब उम्मीदवारों की आधिकारिक सूची आने के बाद तस्वीर बदल गई है।

क्या तुरंत देना होगा इस्तीफा?

यहां संविधान का नियम समझना जरूरी है। भारतीय संविधान के अनुच्छेद 75(5) के मुताबिक, कोई मंत्री अगर लगातार छह महीने तक संसद के किसी भी सदन का सदस्य नहीं रहता है, तो छह महीने की अवधि पूरी होने पर वह मंत्री पद पर नहीं रह सकता। इसका मतलब यह है कि राज्यसभा का कार्यकाल खत्म होते ही उसी दिन मंत्री पद से इस्तीफा देना संवैधानिक रूप से अनिवार्य नहीं है। हालांकि, अगर उसके बाद भी कोई मंत्री संसद के किसी सदन का सदस्य नहीं बनता है, तो छह महीने की संवैधानिक सीमा महत्वपूर्ण हो जाती है।

ये भी पढ़ें: मास्टरस्ट्रोक या चुनावी चक्रव्यूह? MLC चुनाव जीतने के लिए बीजेपी का ‘पन्ना प्रमुख’ वाला माइक्रो प्लान डिकोड

अब आगे क्या हो सकता है?

अब दोनों नेताओं के लिए सबसे बड़ा सवाल यही है कि 25 नवंबर के बाद उनकी संसदीय सदस्यता और मंत्री पद को लेकर क्या फैसला होता है। चूंकि बीजेपी ने यूपी की घोषित राज्यसभा सूची में दोनों को उम्मीदवार नहीं बनाया है, इसलिए उनके दोबारा इसी चुनाव के जरिए राज्यसभा पहुंचने का रास्ता फिलहाल बंद दिखाई देता है। हालांकि, किसी मंत्री के संसद के किसी सदन का सदस्य बनने के अन्य संवैधानिक रास्ते हो सकते हैं और अंतिम राजनीतिक फैसला पार्टी नेतृत्व तथा सरकार के स्तर पर निर्भर करेगा।

फिलहाल इतना स्पष्ट है कि हरदीप सिंह पुरी और बीएल वर्मा को लेकर पहले लगाई जा रही दोबारा राज्यसभा भेजे जाने की अटकलों पर बीजेपी की ताजा सूची ने विराम लगा दिया है। अब निगाह इस बात पर रहेगी कि 25 नवंबर के बाद दोनों नेताओं की भूमिका को लेकर पार्टी और सरकार क्या फैसला करती है।

Location :  New Delhi

Published :  5 October 2026, 6:29 PM IST

Related News

Advertisement