सिर्फ निखार के लिए नहीं लगती शादी में हल्दी! जानिए इस पौराणिक रस्म के पीछे छिपा सेहत और सकारात्मकता का गहरा रहस्य

भारतीय शादियों में हल्दी और उबटन लगाने की रस्म केवल त्वचा में निखार लाने के लिए नहीं होती। इसके पीछे गहरा सांस्कृतिक, आध्यात्मिक और वैज्ञानिक महत्व छिपा है। जानिए यह परंपरा दूल्हा-दुल्हन की सेहत और सुरक्षा के लिए क्यों बेहद खास है।

Post Published By: Tanya Chand
Updated : 23 July 2026, 3:51 PM IST
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1 / 4 \"Zoom\"भारतीय विवाह परंपरा में हल्दी की रस्म का स्थान बेहद पवित्र और विशेष माना जाता है। हल्दी को हिंदू संस्कृति में शुभता, समृद्धि और नए जीवन की शुरुआत का प्रतीक माना गया है। विवाह संस्कार से ठीक पहले दूल्हा और दुल्हन को हल्दी लगाने का मुख्य उद्देश्य उनके जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करना और आने वाले दांपत्य जीवन को सुखमय बनाना होता है। (Img- Pinterest)
2 / 4 \"Zoom\"प्राचीन मान्यताओं के अनुसार शादी के दौरान दूल्हा-दुल्हन पर कई लोगों की नजरें होती हैं। ऐसे में हल्दी और उबटन का सुरक्षा कवच उन्हें किसी भी तरह की नकारात्मक ऊर्जा और बुरी नजर से बचा कर रखता है। धार्मिक शास्त्रों के अनुसार हल्दी की पीली आभा वातावरण को शुद्ध करती है और वर-वधु के आसपास एक बेहद पवित्र और सुरक्षात्मक आभामंडल का निर्माण करती है। (Img- Pinterest)
3 / 4 \"Zoom\"वैज्ञानिक और आयुर्वेदिक दृष्टिकोण से देखा जाए तो हल्दी में एंटी-बैक्टीरियल, एंटी-सेप्टिक और एंटी-ऑक्सीडेंट गुण प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं। विवाह के दौरान बेसन, चंदन और गुलाबजल मिलाकर बनाया गया उबटन त्वचा की मृत कोशिकाओं को हटाता है। यह त्वचा में प्राकृतिक निखार लाने के साथ-साथ किसी भी प्रकार के संक्रमण या मुंहासों से राहत दिलाकर चेहरे को चमकदार और सुंदर बनाता है। (Img- Pinterest)
4 / 4 \"Zoom\"विवाह की व्यस्तता और तैयारियों के कारण दूल्हा और दुल्हन अक्सर शारीरिक थकान और मानसिक तनाव से गुजरते हैं। हल्दी की सौंधी खुशबू और उबटन की ठंडक मस्तिष्क को शांति प्रदान करती है। यह शरीर की तंत्रिकाओं को आराम देकर मानसिक थकावट को दूर भगाती है, जिससे जोड़ा अपने जीवन के इस खास और खूबसूरत अवसर का बिना तनाव के खुलकर आनंद ले पाता है। (Img- Pinterest)

Location :  New Delhi

Published :  23 July 2026, 3:51 PM IST

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