हफ्ते भर की भागदौड़ में अधूरी नींद और वीकेंड पर देर तक सोना आज आम हो गया है। लेकिन क्या यह आदत शरीर की थकान और नुकसान की भरपाई कर पाती है? एक्सपर्ट्स बता रहे हैं वीकेंड स्लीप की पूरी सच्चाई।

आधुनिक लाइफस्टाइल में काम का दबाव, लंबा सफर, देर रात मोबाइल इस्तेमाल और पारिवारिक जिम्मेदारियां नींद का समय छीन लेती हैं। लोग जानते हुए भी देर तक जागते हैं, जिससे नींद की कमी जमा होती जाती है और शरीर लगातार थकान के मोड में रहता है।(फोटो सोर्स- इंटरनेट)
शुक्रवार तक शरीर और दिमाग पूरी तरह थक चुके होते हैं। ऐसे में शनिवार-रविवार देर तक सोना राहत जैसा लगता है। लोगों को लगता है कि वीकेंड की लंबी नींद हफ्ते भर की कमी पूरी कर देगी, लेकिन यह राहत अक्सर सिर्फ अस्थायी होती है।(फोटो सोर्स- इंटरनेट)
एक्सपर्ट्स के मुताबिक वीकेंड पर ज्यादा सोना थकान तो कम कर सकता है, लेकिन लंबे समय की नींद की कमी की भरपाई नहीं करता। नींद की कमी से हार्मोन, मेटाबॉलिज्म और दिमागी कार्य प्रभावित होते हैं, जो सिर्फ एक-दो दिन में ठीक नहीं होते।(फोटो सोर्स- इंटरनेट)
नींद की कमी से शरीर को नुकसान लगातार कम नींद लेने से स्ट्रेस हार्मोन बढ़ता है, इम्यून सिस्टम कमजोर पड़ता है और ब्लड शुगर नियंत्रण बिगड़ता है। याददाश्त, फोकस और इमोशनल बैलेंस प्रभावित होता है। लंबे समय में यह हार्ट डिजीज, मोटापा और डायबिटीज का खतरा बढ़ाता है।(फोटो सोर्स- इंटरनेट)
डॉक्टरों के अनुसार समाधान वीकेंड की नींद नहीं, बल्कि रोजाना नियमित नींद है। हर दिन एक ही समय पर सोना-जागना, सोने से पहले स्क्रीन टाइम कम करना और शांत रूटीन अपनाना जरूरी है। वयस्कों को रोज़ 7–9 घंटे की नींद लेनी चाहिए।(फोटो सोर्स- इंटरनेट)