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दिनभर की भागदौड़, काम के दबाव और लगातार व्यस्तता के बाद जब हम रात को बिस्तर पर लेटते हैं, तो हमारा शरीर भले ही सुस्ताने लगता है, लेकिन दिमाग एकदम सक्रिय हो जाता है। शांत माहौल मिलते ही पुरानी गलतियां, बीते दिनों की यादें और आने वाले कल की अनगिनत चिंताएं अचानक सामने आने लगती हैं। मनोवैज्ञानिक भाषा में इसे 'नाइटटाइम ओवरथिंकिंग' (Nighttime Overthinking) कहा जाता है। जब तक आप इन अनसुलझे विचारों के बवंडर से बाहर नहीं निकलते, तब तक मस्तिष्क शांत होकर नींद के मोड में नहीं जा पाता है। (Img- Pinterest)

Post Published By: Tanya Chand
Updated : 28 September 2026, 3:21 PM IST
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Published :  28 September 2026, 3:16 PM IST

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