हिंदी
वैभव सूर्यवंशी (Source: Pinterest)
New Delhi: क्रिकेट में कई खिलाड़ी लीग और सामान्य मुकाबलों में शानदार प्रदर्शन करते हैं, लेकिन असली परीक्षा तब होती है जब मुकाबला करो या मरो का हो। दबाव बढ़ता है, एक गलती पूरी टीम का सफर खत्म कर सकती है और ऐसे समय में बड़े खिलाड़ियों की पहचान होती है। 15 साल के वैभव सूर्यवंशी ने 2026 में कुछ ऐसा ही कर दिखाया है। उनके आंकड़े अब इस सवाल को जन्म दे रहे हैं कि क्या वह कम उम्र में ही बड़े मैचों के खिलाड़ी बन चुके हैं?
वैभव की खासियत सिर्फ उनकी आक्रामक बल्लेबाजी नहीं है, बल्कि महत्वपूर्ण मुकाबलों में उनका प्रदर्शन और भी ज्यादा प्रभावशाली रहा है। 2026 के अंडर-19 विश्व कप में उन्होंने भारत के लिए कई शानदार पारियां खेलीं, लेकिन सेमीफाइनल और फाइनल में उनका बल्ला जिस अंदाज में चला, उसने सभी का ध्यान खींच लिया।
अफगानिस्तान के खिलाफ सेमीफाइनल में भारत को फाइनल में जगह बनाने के लिए जीत जरूरी थी। इस दबाव भरे मुकाबले में वैभव ने सिर्फ 33 गेंदों में 68 रन ठोक दिए। उनकी विस्फोटक पारी ने भारतीय टीम को मजबूत शुरुआत दिलाई।
इसके बाद इंग्लैंड के खिलाफ अंडर-19 विश्व कप का फाइनल आया। यह खिताब का मुकाबला था और यहां दबाव किसी भी युवा बल्लेबाज के लिए बड़ी चुनौती हो सकता था। लेकिन वैभव ने उल्टा और आक्रामक अंदाज अपना लिया।
उन्होंने महज 80 गेंदों पर 175 रन की तूफानी पारी खेली। इस दौरान उनके बल्ले से 15 चौके और 15 छक्के निकले। सेमीफाइनल में 68 रन और फाइनल में 175 रन की पारियां यह संकेत देने लगीं कि मुकाबले का महत्व बढ़ने के साथ वैभव का आत्मविश्वास भी बढ़ता है।
अंडर-19 क्रिकेट के बाद वैभव के सामने सीनियर क्रिकेट की चुनौती थी। राजस्थान रॉयल्स के लिए आईपीएल में उन्होंने पूरे सीजन में 776 रन बनाकर अपनी क्षमता साबित की। लेकिन उनके प्रदर्शन का सबसे बड़ा हिस्सा प्लेऑफ में देखने को मिला।
सनराइजर्स हैदराबाद के खिलाफ एलिमिनेटर मुकाबला करो या मरो का था। इस मैच में वैभव ने केवल 29 गेंदों पर 97 रन बना दिए। इसके बाद गुजरात टाइटंस के खिलाफ क्वालिफायर में उन्होंने 47 गेंदों पर 96 रन की पारी खेली।
यानी आईपीएल के लगातार दो सबसे अहम मुकाबलों में उनका स्कोर 97 और 96 रन रहा। खास बात यह रही कि दबाव कम करने के बजाय वैभव ने गेंदबाजों पर ही दबाव डाल दिया।
वैभव की यही कहानी ट्राई-सीरीज में भी देखने को मिली। श्रीलंका ए के खिलाफ फाइनल में भारत ए के लिए खेलते हुए उन्होंने महज 29 गेंदों पर 94 रन की विस्फोटक पारी खेली। एक बार फिर मंच बड़ा था और वैभव का प्रदर्शन उससे भी बड़ा।
इससे साफ होता है कि उनका प्रदर्शन केवल आईपीएल या अंडर-19 क्रिकेट तक सीमित नहीं है। अलग-अलग परिस्थितियों और अलग-अलग प्रारूपों में उन्होंने महत्वपूर्ण मुकाबलों में अपनी बल्लेबाजी का असर दिखाया है।
होरमुज संकट के बीच भारत का बड़ा दांव! अमेरिका से आने लगी रिकॉर्ड LPG, खाड़ी देशों की हिस्सेदारी घटी
दलीप ट्रॉफी में वैभव ने यह भी साबित किया कि उनकी पहचान सिर्फ टी20 बल्लेबाज की नहीं है। सेंट्रल जोन के खिलाफ सेमीफाइनल में उन्होंने पहली पारी में 92 रन बनाए और दूसरी पारी में 40 रन की तेज पारी खेली।
सीनियर खिलाड़ियों के बीच लाल गेंद के क्रिकेट में यह प्रदर्शन उनके खेल की दूसरी तस्वीर दिखाता है। ईस्ट जोन की ओर से खेलते हुए उन्हें नेतृत्व की जिम्मेदारी भी मिली। कप्तान ईशान किशन के चोटिल होने पर वैभव ने टीम की कमान संभाली। फाइनल में साउथ जोन के खिलाफ उन्होंने 44 रन बनाए।
थाली में थोड़ा सा भी जूठा दही छोड़ा तो आ सकती है बड़ी आफत! जानिए रामायण काल से जुड़ा यह रहस्यमय सच
अगर 2026 के बड़े मुकाबलों को एक साथ देखा जाए तो तस्वीर काफी दिलचस्प है—
इन आंकड़ों में सबसे दिलचस्प बात यह है कि वैभव ने बड़े मुकाबलों में रन बनाने के साथ-साथ बेहद तेज गति से रन बनाए हैं। यही वजह है कि महज 15 साल की उम्र में उन्हें ‘बिग-गेम फेनोम’ कहा जाने लगा है।
आने वाले समय में वैभव पर उम्मीदों का दबाव और बढ़ेगा। लेकिन 2026 के आंकड़े फिलहाल यही कहानी बता रहे हैं कि जब मुकाबला बड़ा होता है, तो इस युवा बल्लेबाज का बल्ला और ज्यादा गरजता है।
Location : New Delhi
Published : 9 September 2026, 3:09 PM IST