पश्चिम एशिया युद्ध का भारत देश पर पड़ा कितना असर? जानिये विस्तार से

पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक तनाव और रूस-यूक्रेन युद्ध जैसे वैश्विक संघर्षों ने अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार को अस्थिर कर दिया है। कच्चे तेल और तरलीकृत प्राकृतिक गैस (LNG) की कीमतों में उतार-चढ़ाव का सीधा असर भारत जैसे आयात-निर्भर देशों पर पड़ रहा है।

Post Published By: Poonam Rajput
Updated : 11 April 2026, 3:20 PM IST
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New Delhi: पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक तनाव और ईरान- इजरायल, अमेरिका युद्ध जैसे वैश्विक संघर्षों ने अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार को अस्थिर कर दिया है। भारत देश में इस पश्चिम एशिया युद्ध का असर पड़े पैमाने पर देखने को मिल रहा है।

कच्चे तेल और तरलीकृत प्राकृतिक गैस (LNG) की कीमतों में उतार-चढ़ाव का सीधा असर भारत जैसे आयात-निर्भर देशों पर पड़ रहा है, जो अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा विदेशों से पूरा करते हैं।

भारत में महंगाई और ऊर्जा लागत पर दबाव

भारत अपनी जरूरत का लगभग 55 प्रतिशत कच्चा तेल और 90 प्रतिशत से अधिक एलपीजी पश्चिम एशिया से आयात करता है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय कीमतों में बढ़ोतरी का असर पेट्रोल, डीजल और रसोई गैस की लागत पर पड़ रहा है। इतना ही नहीं परिवहन महंगा हो गया है और खाद्य पदार्थों की कीमतों में भी बढ़ोतरी दर्ज की गई है।

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किस क्षेत्रों पर सबसे ज्यादा असर

परिवहन और लॉजिस्टिक्स: ईंधन महंगा होने से माल ढुलाई की लागत बढ़ी है।

खाद्य और कृषि क्षेत्र: ट्रांसपोर्ट और उर्वरक लागत बढ़ने से कीमतों पर असर

होटल और कैटरिंग इंडस्ट्री: एलपीजी और खाद्य सामग्री महंगी होने से खर्च बढ़ा

औद्योगिक उत्पादन: ऊर्जा लागत बढ़ने से उत्पादन महंगा हुआ

रेमिटेंस पर असर पड़ सकता है

भारत, विदेशों में रहने वाले भारतीयों से मिलने वाले रेमिटेंस का दुनिया का सबसे बड़ा प्राप्तकर्ता है। वित्त वर्ष 2025 में, देश को इस स्रोत से $135 बिलियन से ज़्यादा मिलने का अनुमान है। जहां एक ओर पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष और वैश्विक आर्थिक विकास में सुस्ती के कारण वैश्विक व्यापार प्रवाह में आए बदलावों की वजह से भारत के निर्यात में कुछ नरमी देखने को मिल सकती है, वहीं दूसरी ओर अमेरिका के  टैरिफ कम करने से इसे कुछ सहारा मिलने की उम्मीद है। अपने 'बेस केस' परिदृश्य के तहत, CRISIL का यह भी अनुमान है कि कच्चे तेल की कीमतों में साल-दर-साल 8–9 प्रतिशत की बढ़ोतरी के कारण भारत का आयात बिल बढ़ सकता है।

ऊर्जा कीमतों में अस्थिरता और वैश्विक तनाव का असर भारत की अर्थव्यवस्था पर धीरे-धीरे दिखाई दे रहा है। इसका सबसे बड़ा प्रभाव महंगाई, निवेश और विकास की गति पर पड़ सकता है। सरकार और नीतिगत संस्थाएं स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए हैं।

Location :  New Delhi

Published :  11 April 2026, 3:20 PM IST

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