UPI पेमेंट पर MDR चार्ज विवाद: सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र, RBI और NPCI को भेजा नोटिस

UPI पेमेंट पर 0.4% MDR चार्ज लगाने के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र, RBI और NPCI को नोटिस जारी किया है। अदालत ने फिलहाल शुल्क व्यवस्था पर रोक लगाने से इनकार किया।

Post Published By: Rohit Goyal
Updated : 28 September 2026, 1:40 PM IST
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नई दिल्ली: 2000 रुपये से अधिक के UPI पेमेंट पर 0.4 प्रतिशत मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लगाने के प्रस्ताव को चुनौती देने वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा कदम उठाया है। शीर्ष अदालत ने सोमवार को केंद्र सरकार, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) और नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) को नोटिस जारी कर चार सप्ताह में जवाब दाखिल करने को कहा है।

हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल इस व्यवस्था को लागू करने पर रोक लगाने से इनकार कर दिया है।

याचिका में उठाए गए सवाल

याचिकाकर्ता की ओर से दलील दी गई कि UPI पेमेंट पर अतिरिक्त शुल्क लगाने की व्यवस्था को पर्याप्त चर्चा और जरूरी कानूनी प्रक्रिया के बिना लागू किया जा रहा है।

याचिका में कहा गया कि MDR लागू होने से छोटे कारोबारियों पर आर्थिक बोझ बढ़ सकता है। साथ ही अतिरिक्त शुल्क के कारण कुछ लोग दोबारा नकद भुगतान की ओर लौट सकते हैं, जिससे डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने के लक्ष्य पर असर पड़ सकता है।

याचिकाकर्ता ने डिजिटल अर्थव्यवस्था का दिया हवाला

सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के वकील ने कहा कि UPI के आने के बाद डिजिटल लेन-देन को बढ़ावा मिला है और इससे नकद आधारित लेन-देन में कमी आई है।

उन्होंने तर्क दिया कि UPI पर अतिरिक्त शुल्क लगाने से डिजिटल भुगतान व्यवस्था प्रभावित हो सकती है।

सरकार ने क्या कहा?

केंद्र सरकार की ओर से पेश एडिशनल सॉलिसिटर जनरल वेंकटरमन ने कहा कि यह व्यवस्था अभी लागू नहीं हुई है और 15 अक्टूबर इसका पहला चरण है।

उन्होंने अदालत को बताया कि गेटवे का इस्तेमाल करने वाले करीब 96 प्रतिशत उपयोगकर्ताओं को इससे छूट दी गई है।

सरकार की ओर से कहा गया कि यह कोई सरकारी शुल्क या टैक्स नहीं है। यह सेवा उपलब्ध कराने वाले पक्षों के बीच सेटलमेंट फीस की व्यवस्था है, जिसे NPCI संचालित करता है।

सुप्रीम कोर्ट ने पूछा- यह फीस है या कुछ और?

सुनवाई के दौरान जस्टिस जॉयमाल्य बागची ने सवाल उठाया कि इस तरह की वसूली का कानूनी आधार और कार्यकारी अधिकार क्या है।

अदालत ने पूछा कि अगर यह फीस होती तो स्थिति अलग होती, लेकिन जब इसे फीस नहीं कहा जा रहा है तो इसका स्वरूप क्या है।

16 सितंबर को दाखिल हुई थी याचिका

बता दें कि 16 सितंबर को 2000 रुपये से अधिक के UPI भुगतान पर 0.4 प्रतिशत MDR लगाने संबंधी अधिसूचना को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई थी।

याचिकाकर्ता अंजन दत्ता ने जनहित याचिका दाखिल कर दावा किया है कि यह व्यवस्था समानता के अधिकार और व्यापार करने के मौलिक अधिकार से जुड़े प्रावधानों का उल्लंघन करती है।

Location :  New Delhi

Published :  28 September 2026, 1:40 PM IST

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