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सोनम वांगचुक (सोर्स-एक्स)
New Delhi: लद्दाख के पर्यावरणविद् और सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने केंद्र सरकार के साथ किसी भी तरह की गुप्त डील करने के दावे को सिरे से खारिज कर दिया है। पिछले 26 दिनों से अनिश्चितकालीन अनशन पर बैठे वांगचुक ने आखिरकार अपना उपवास क्यों और किन परिस्थितियों में तोड़ा, इसका खुलकर खुलासा किया है। उन्होंने साफ किया कि उनका यह कदम किसी राजनीतिक समझौते के तहत नहीं, बल्कि दिल्ली में किसी बड़ी हिंसा और छात्रों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए उठाया गया एक आपातकालीन फैसला था।
शुक्रवार देर रात जारी एक वीडियो संदेश में सोनम वांगचुक ने बताया कि उनका 26 दिन का अनशन समाप्त करने के पीछे केवल एक ही मुख्य उद्देश्य था- छात्रों पर किसी भी प्रकार की पुलिसिया कार्रवाई या संभावित हिंसा को रोकना।
वांगचुक ने सितंबर 2025 में लद्दाख के युवाओं पर हुई पुलिस और सीआरपीएफ की फायरिंग की दर्दनाक घटना का हवाला देते हुए कहा कि उन्हें आशंका थी कि दिल्ली में भी वैसी ही स्थिति न बन जाए। उन्होंने कहा कि यदि वह चाहते तो आराम से किसी एयर कंडीशन कमरे में बैठकर सरकार से समझौता कर सकते थे, लेकिन 26 दिन तक भूखा रहना इस बात का प्रमाण है कि उनका संघर्ष पूरी तरह निष्पक्ष और छात्रों के हित में था।
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बातचीत के दौरान सोनम वांगचुक ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग पर तत्काल जोर न देने की बात कही। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका प्राथमिक लक्ष्य आंदोलनरत छात्रों को सुरक्षित रखना था। हालांकि, उन्होंने यह भी जोड़ा कि शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग अभी खत्म नहीं हुई है और आंदोलन का हिस्सा बनी रहेगी।
सरकार के साथ हुई चर्चा के बाद केंद्र के मंत्रियों (जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह) ने मेदांता अस्पताल में उनसे मुलाकात की। सरकार की ओर से इन बिंदुओं पर सकारात्मक रुख दिखाया गया-
कानूनी कार्रवाई से सुरक्षा: शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने वाले छात्रों के खिलाफ कोई भी कानूनी कार्रवाई या एफआईआर दर्ज न करने का लिखित आश्वासन।
मुआवजा: कथित नीट (NEET) पेपर लीक के बाद आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों को मुआवजा देने पर सकारात्मक विचार।
वांगचुक ने बताया कि शुरुआती दौर में सरकार केवल मौखिक आश्वासन देने की बात कह रही थी, लेकिन उन्होंने स्पष्ट कर दिया कि जब तक लिखित आश्वासन नहीं मिलेगा, वह अनशन समाप्त नहीं करेंगे।
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अनशन के दौरान अपने साथ हुए बर्ताव का जिक्र करते हुए वांगचुक ने प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने बताया कि 18 जुलाई को जब उन्हें सफदरजंग अस्पताल ले जाया गया, तो उनके साथ किसी कैदी जैसा सलूक किया गया।
वांगचुक के अनुसार, उन्हें अस्पताल से बाहर जाने की अनुमति नहीं थी, किसी से मिलने नहीं दिया जाता था और उनके मोबाइल फोन तथा लैपटॉप भी उनसे ले लिए गए थे। इन कड़े प्रतिबंधों को याद करते हुए उन्होंने कहा, "ऐसा लग रहा था जैसे मैं उत्तर कोरिया में हूं।"
Location : New Delhi
Published : 25 July 2026, 12:43 PM IST
Topics : Central Government Deal NEET Issue Safdarjung Hospital Sonam Wangchuk Sonam Wangchuk Fast Ends