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सुप्रीम कोर्ट (सोर्स- Pinterest)
New Delhi: भारतीय न्याय व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ और गतिशील बनाने की दिशा में सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने एक बड़ा और अहम निर्णय लिया है। देश के विभिन्न उच्च न्यायालयों में लंबित मामलों के त्वरित निस्तारण और न्यायिक प्रक्रिया को गति देने के लिए कॉलेजियम ने चार अलग-अलग राज्यों के उच्च न्यायालयों में कार्यरत 12 अपर (Additional) न्यायाधीशों को स्थायी जज के रूप में नियुक्त करने की संस्तुति दे दी है।
इस संबंध में मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत की अध्यक्षता में एक उच्च स्तरीय बैठक आयोजित की गई। इस महत्वपूर्ण बैठक में उनके साथ सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ न्यायाधीश जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस बी.वी. नागरत्ना भी शामिल रहे। कॉलेजियम की इस बैठक में गहन विचार-विमर्श के बाद सभी नामों पर मुहर लगाई गई, जिससे न्यायपालिका के प्रशासनिक कामकाज को और मजबूती मिलने की उम्मीद है।
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कॉलेजियम के इस फैसले से सबसे बड़ा लाभ आंध्र प्रदेश और केरल उच्च न्यायालयों को मिला है, जहाँ से सबसे अधिक संख्या में अपर न्यायाधीशों को स्थायी किया गया है।
आंध्र प्रदेश उच्च न्यायालय: इस अदालत से कुल पांच योग्य अपर न्यायाधीशों को स्थायी जज के रूप में पदोन्नत करने की मंजूरी दी गई है। इनमें महेश्वर राव कुंचेम, थूटा चंद्र धना सेकर, चल्ला गुणरंजन, अवधानम हरि हरनाध शर्मा और डॉ. यादवल्ली लक्ष्मणा राव शामिल हैं।
केरल उच्च न्यायालय: यहाँ भी पांच अपर न्यायाधीशों को स्थायी न्यायाधीश बनाने का मार्ग प्रशस्त हुआ है। इस सूची में पी. कृष्णा कुमार, के.वी. जयकुमार, मुरली कृष्णा एस., जोबिन सेबेस्टियन और पी.वी. बालकृष्णन के नाम शामिल हैं।
इन नियुक्तियों से इन दोनों राज्यों के उच्च न्यायालयों में न्यायिक कार्यों की क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी।
अन्य राज्यों के उच्च न्यायालयों की बात करें तो उत्तराखंड और गौहाटी उच्च न्यायालयों के लिए भी कॉलेजियम ने महत्वपूर्ण निर्णय लिए हैं।
उत्तराखंड उच्च न्यायालय: कॉलेजियम ने अपने एक अन्य प्रस्ताव के तहत अपर न्यायाधीश सुभाष उपाध्याय को उत्तराखंड उच्च न्यायालय का स्थायी जज नियुक्त करने की मंजूरी प्रदान की है।
गौहाटी उच्च न्यायालय: इसके साथ ही, उत्तर-पूर्व क्षेत्र के महत्वपूर्ण गौहाटी उच्च न्यायालय में अपर न्यायाधीश कौशिक गोस्वामी को भी स्थायी जज के रूप में नियुक्त किए जाने की औपचारिक संस्तुति दे दी गई है।
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न्यायिक नियुक्तियों के इस बड़े फैसले के साथ-साथ सुप्रीम कोर्ट ने देश भर में न्याय प्रणाली के एक अन्य महत्वपूर्ण पहलू पर भी कड़ा रुख अपनाया है। शीर्ष अदालत ने देश भर में लंबित वाणिज्यिक (Commercial) मामलों और उनके त्वरित निपटारे के लिए वाणिज्यिक अदालतों के पास उपलब्ध बुनियादी ढांचे का पूरा और अपडेटेड ब्योरा तलब किया है।
देश भर की अदालतों में वाणिज्यिक विवादों के मामलों की संख्या में लगातार भारी इजाफा हो रहा है। इस बढ़ती तादाद से प्रभावी ढंग से निपटने और समय पर न्याय सुनिश्चित करने के लिए अतिरिक्त वाणिज्यिक अदालतों की स्थापना की आवश्यकता महसूस की जा रही है। इसी उद्देश्य के तहत, सुप्रीम कोर्ट ने पहले ही 10 अगस्त को विभिन्न राज्यों और 10 प्रमुख उच्च न्यायालयों को औपचारिक नोटिस जारी किए थे, जिस पर अब अद्यतन आंकड़े और रिपोर्ट मांगी गई है।
Location : New Delhi
Published : 25 September 2026, 9:22 AM IST
Topics : Additional Judges CJI Surya Kant High Court Appointments Permanent Judges Supreme Court Collegium