हिंदी
अप्रैल में खाली हो रही राज्यसभा की 37 सीटों के लिए चुनावी प्रक्रिया शुरू हो गई है। कांग्रेस को कम से कम पांच सीटें मिलने की उम्मीद है, जिससे उच्च सदन में उसकी ताकत बढ़ेगी। तेलंगाना, हिमाचल, हरियाणा और छत्तीसगढ़ में टिकट को लेकर मंथन तेज है। कई वरिष्ठ नेताओं के साथ नए और सरप्राइज नाम भी चर्चा में हैं।
सीटों के गणित में कांग्रेस को बढ़त (Image Source: Google)
New Delhi: राज्यसभा की 37 सीटों के लिए चुनाव कार्यक्रम घोषित होने के बाद राजनीतिक दलों में सक्रियता बढ़ गई है। नामांकन की अंतिम तारीख 5 मार्च और मतदान 16 मार्च को होगा। कांग्रेस के चार सांसदों अभिषेक मनु सिंघवी, केटीएस तुलसी, फूलो देवी नेताम और रजनी पाटिल का कार्यकाल समाप्त हो रहा है।
संख्याबल के आधार पर कांग्रेस को कम से कम पांच सीटें मिलने की संभावना जताई जा रही है, जिससे उच्च सदन में उसकी स्थिति पहले से मजबूत होगी। तेलंगाना में पार्टी के पास पर्याप्त विधायक हैं, जिससे दो सीटें जीतने की रणनीति बनाई जा रही है।
तेलंगाना से अभिषेक मनु सिंघवी को फिर से राज्यसभा भेजे जाने की संभावना सबसे अधिक मानी जा रही है। दूसरी सीट के लिए पूर्व सुप्रीम कोर्ट जज बी सुदर्शन रेड्डी का नाम चर्चा में है। साथ ही किसी अल्पसंख्यक नेता को मौका देने की रणनीति पर भी विचार चल रहा है।
भारत मंडपम में इंडिया AI इम्पैक्ट समिट का आगाज़, वैश्विक नेता से लेकर टेक दिग्गज होंगे शामिल
छत्तीसगढ़ में इस बार कांग्रेस के लिए समीकरण चुनौतीपूर्ण है। पिछली बार दोनों सीटें जीतने वाली पार्टी इस बार केवल एक सीट जीत पाएगी। ऐसे में केटीएस तुलसी की वापसी मुश्किल मानी जा रही है। फूलो देवी नेताम को दोबारा मौका मिलने पर भी संशय है। यदि उनका नाम कटता है तो पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल या पूर्व उपमुख्यमंत्री टीएस सिंह देव को राज्यसभा भेजे जाने की संभावना जताई जा रही है।
हिमाचल प्रदेश की एक सीट पर कांग्रेस के भीतर ही कई दावेदार हैं। वरिष्ठ नेता आनंद शर्मा और पूर्व प्रदेश अध्यक्ष प्रतिभा सिंह के नाम प्रमुख हैं। राज्य में कांग्रेस के 40 विधायक होने के कारण जीत का गणित उसके पक्ष में है, लेकिन उम्मीदवार चयन को लेकर पार्टी नेतृत्व सावधानी बरत रहा है।
हरियाणा में टिकट को लेकर अंतिम फैसला भूपेंद्र सिंह हुड्डा खेमे के प्रभाव में माना जा रहा है। दावेदारों में राज बब्बर, उदयभान और कांग्रेस ओबीसी विभाग के प्रमुख अनिल जयहिंद शामिल हैं। साथ ही पार्टी मीडिया और सोशल मीडिया टीम से जुड़े नामों पर भी सरप्राइज के तौर पर विचार होने की चर्चा है।
इन चुनावों के बाद राज्यसभा में कांग्रेस की ताकत बढ़ेगी और विपक्ष की भूमिका अधिक प्रभावी हो सकती है। उम्मीदवार चयन में क्षेत्रीय संतुलन, सामाजिक प्रतिनिधित्व और संगठनात्मक रणनीति को ध्यान में रखा जा रहा है। आने वाले दिनों में नामों की औपचारिक घोषणा के साथ तस्वीर और साफ होगी।