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संसद का बजट सत्र आज राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु के अभिभाषण से शुरू हो रहा है। 1 फरवरी को निर्मला सीतारमण लगातार नौवीं बार आम बजट पेश करेंगी। सत्र से पहले VB-GRAMJI और चुनावी सुधारों को लेकर सरकार-विपक्ष में टकराव तेज हो गया है।
बजट सत्र 2026
New Delhi: नई दिल्ली में आज से संसद का बहुप्रतीक्षित बजट सत्र शुरू हो रहा है। सत्र की औपचारिक शुरुआत राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु के लोकसभा और राज्यसभा के संयुक्त सदन को संबोधित करने के साथ होगी। राष्ट्रपति अपने अभिभाषण में केंद्र सरकार की उपलब्धियों, नीतियों और आगामी एजेंडे का खाका पेश करेंगी। इस सत्र का सबसे बड़ा आकर्षण 1 फरवरी को पेश होने वाला आम बजट होगा, जिसे वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण लगातार नौवीं बार पेश कर इतिहास रचेंगी।
बजट सत्र को देश की आर्थिक दिशा तय करने वाला सत्र माना जाता है। इस दौरान सरकार जहां विकास और सुधारों पर जोर देगी, वहीं विपक्ष महंगाई, बेरोजगारी और सामाजिक मुद्दों को लेकर सरकार को घेरने की रणनीति बना चुका है। सत्र शुरू होने से पहले ही सरकार और विपक्ष के बीच तीखी बयानबाजी देखने को मिल रही है।
सत्र से पहले सबसे बड़ा विवाद ‘विकसित भारत-गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन’ यानी VB-GRAMJI को लेकर सामने आया है। विपक्ष ने इस कानून पर संसद में विस्तृत चर्चा की मांग की थी। इस योजना के तहत मनरेगा की जगह ग्रामीण परिवारों को 125 दिनों के रोजगार की गारंटी देने का प्रावधान किया गया है। विपक्ष का आरोप है कि यह योजना पर्याप्त संसाधनों के बिना लाई गई है और इससे ग्रामीण रोजगार व्यवस्था पर असर पड़ेगा।
सरकार ने विपक्ष की मांग को खारिज करते हुए साफ कहा है कि यह विधेयक पिछले सत्र में पारित होकर कानून बन चुका है, इसलिए इस पर दोबारा चर्चा का सवाल नहीं उठता। सरकार का तर्क है कि अब संसद का फोकस बजट और आगामी विधायी कार्यों पर होना चाहिए।
विपक्ष ने मतदाता सूची के ‘विशेष गहन संशोधन’ (SIR) को लेकर भी सरकार पर निशाना साधा है। तृणमूल कांग्रेस समेत कई दलों का आरोप है कि इस प्रक्रिया के जरिए कुछ राज्यों में प्रवासी मजदूरों और अल्पसंख्यकों के नाम मतदाता सूची से हटाए जा रहे हैं। सरकार ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि चुनावी सुधारों पर पहले ही पर्याप्त चर्चा हो चुकी है और इसे मुद्दा बनाकर सत्र बाधित नहीं किया जाना चाहिए।
बजट सत्र दो चरणों में आयोजित किया जाएगा। पहला चरण आज से 13 फरवरी तक चलेगा, जबकि दूसरा चरण 9 मार्च से 2 अप्रैल तक होगा। सत्र के बीच अवकाश के दौरान विभिन्न मंत्रालयों के बजटीय प्रस्तावों की समीक्षा संसदीय स्थायी समितियां करेंगी। इसके बाद रिपोर्ट के आधार पर दूसरे चरण में चर्चा और पारित करने की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।
सर्वदलीय बैठक में सरकार ने साफ संकेत दिए हैं कि उसकी प्राथमिकता बजट पारित कराना और जरूरी विधायी कार्य पूरे करना है। वहीं कांग्रेस नेता जयराम रमेश सहित विपक्षी दलों ने सरकार पर संसद को कमजोर करने का आरोप लगाया है। विपक्ष महंगाई, बेरोजगारी, ग्रामीण संकट और हालिया प्रशासनिक फैसलों को लेकर सरकार को घेरने की तैयारी में है।
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देशभर से सांसद बजट सत्र में हिस्सा लेने के लिए दिल्ली पहुंच चुके हैं। सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं। आम जनता को इस बजट से टैक्स में राहत, किसानों के लिए नई योजनाएं और रोजगार बढ़ाने वाले कदमों की उम्मीद है। हालांकि, सत्र के दौरान हंगामे की आशंका भी बनी हुई है।