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पश्चिम बंगाल में सत्ता के महासंग्राम का बिगुल बज चुका है। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने शांतिपूर्ण चुनाव के लिए कड़े सुरक्षा इंतजामों का भरोसा दिया है, जिससे राज्य में TMC और BJP के बीच एक बार फिर तीखे सियासी मुकाबले की जमीन तैयार हो गई है।
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New Delhi: देश की राजनीति में अहम माने जाने वाले पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 को लेकर चुनाव आयोग ने बड़ा ऐलान कर दिया है। रविवार शाम 4 बजे आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में चुनाव आयोग ने आगामी विधानसभा चुनाव की तारीखों की घोषणा कर दी। मुख्य चुनाव अधिकारी ज्ञानेश कुमार ने जानकारी देते हुए बताया कि राज्य में चुनाव दो चरणों में कराए जाएंगे।
चुनाव आयोग के मुताबिक इस बार पश्चिम बंगाल की 294 विधानसभा सीटों पर मतदान दो चरणों में कराया जाएगा। पहला चरण 23 अप्रैल को होगा जिसमें 192 सीटों पर चुनाव होगा और दूसरा चरण 29 अप्रैल को होगा जिसमें 142 सीटों पर चुनाव होगा।
आयोग ने कहा कि चुनाव प्रक्रिया को शांतिपूर्ण और निष्पक्ष तरीके से संपन्न कराने के लिए व्यापक सुरक्षा और प्रशासनिक तैयारियां की गई हैं।
आयोग ने स्पष्ट किया कि मतदान के दौरान सुरक्षा बलों की तैनाती के साथ-साथ संवेदनशील क्षेत्रों में विशेष निगरानी रखी जाएगी ताकि किसी भी प्रकार की गड़बड़ी को रोका जा सके।
पश्चिम बंगाल में चुनावी घोषणा के साथ ही सियासी हलचल तेज हो गई है। राज्य की राजनीति में मुख्य मुकाबला एक बार फिर सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस (TMC) और भारतीय जनता पार्टी (BJP) के बीच माना जा रहा है।
राजनीतिक दलों ने चुनावी तैयारियां पहले से ही तेज कर दी थीं और अब तारीखों के ऐलान के बाद प्रचार अभियान और तेज होने की संभावना है। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार इस चुनाव में भी बंगाल की सत्ता को लेकर जबरदस्त मुकाबला देखने को मिल सकता है।
अगर पिछले विधानसभा चुनाव यानी 2021 की बात करें तो उस समय कुल 294 सीटों पर मतदान हुआ था। परिणामों में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली तृणमूल कांग्रेस ने जबरदस्त जीत दर्ज की थी। TMC ने 213 सीटों पर विजय हासिल कर प्रचंड बहुमत के साथ सरकार बनाई थी।
वहीं बीजेपी ने 77 सीटें जीतकर मुख्य विपक्षी दल के रूप में अपनी स्थिति मजबूत की थी।
हालांकि वाम मोर्चा और कांग्रेस का प्रदर्शन उस चुनाव में काफी कमजोर रहा था और दोनों दल एक भी सीट नहीं जीत सके थे।
2021 के चुनाव में तृणमूल कांग्रेस को करीब 48 प्रतिशत वोट मिले थे, जबकि बीजेपी को लगभग 38 प्रतिशत वोट शेयर हासिल हुआ था।