समंदर में ये क्या खोज लाया भारत? जानिए पूरी कहानी

भारत की ऊर्जा जरूरतों को लेकर एक अहम खबर सामने आई है। सरकारी कंपनी ऑयल इंडिया लिमिटेड (OIL) ने बंगाल की खाड़ी में स्थित कृष्णा-गोदावरी बेसिन के उथले समुद्री क्षेत्र में प्राकृतिक गैस मिलने की घोषणा की है।

Updated : 23 October 2026, 3:54 PM IST
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नई दिल्ली: भारत की ऊर्जा जरूरतों को लेकर एक अहम खबर सामने आई है। सरकारी कंपनी ऑयल इंडिया लिमिटेड (OIL) ने बंगाल की खाड़ी में स्थित कृष्णा-गोदावरी बेसिन के उथले समुद्री क्षेत्र में प्राकृतिक गैस मिलने की घोषणा की है। कंपनी के मुताबिक, गोदावरी-1 कुएं में किए गए परीक्षण के दौरान गैस का अधिकतम प्रवाह 2 लाख स्टैंडर्ड क्यूबिक मीटर प्रतिदिन दर्ज किया गया। इस खोज के साथ प्रतिदिन लगभग 170 बैरल कंडेनसेट का प्रवाह भी दर्ज किया गया है। ऐसे समय में जब भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए आयात पर निर्भर है, घरेलू गैस संसाधनों की खोज को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हालांकि, अभी यह स्पष्ट नहीं है कि इस खोज में कुल कितना गैस भंडार मौजूद है और इसका व्यावसायिक उत्पादन कब शुरू हो सकेगा।

कहां मिली गैस और कैसे हुई खोज?

ऑयल इंडिया के मुताबिक, प्राकृतिक गैस की खोज कृष्णा-गोदावरी बेसिन के मत्स्यपुरी फॉर्मेशन में हुई है। यह क्षेत्र भारत के पूर्वी तट से दूर समुद्र में स्थित है। कंपनी ने यहां KG-DSF/GSKW/2018 नाम के डिस्कवर्ड स्मॉल फील्ड ब्लॉक में गोदावरी-1 नामक मूल्यांकन कुआं खोदा था। इस ब्लॉक में कंपनी अकेले परिचालक की भूमिका निभा रही है।

खोज की खास बात यह है कि मत्स्यपुरी फॉर्मेशन के संबंधित हिस्से का पहले मूल्यांकन नहीं किया गया था। कुएं में 2,024 से 2,027 मीटर की गहराई के बीच हाइड्रोकार्बन की मौजूदगी दर्ज की गई। इसके बाद कंपनी ने इस क्षेत्र की क्षमता को समझने के लिए उत्पादन परीक्षण शुरू किया।

परीक्षण में कितनी गैस मिली?

कंपनी के अनुसार, गोदावरी-1 कुएं में उत्पादन परीक्षण 16 अक्टूबर 2026 से शुरू हुआ। शुरुआती परीक्षण में लगभग एक लाख स्टैंडर्ड क्यूबिक मीटर प्रतिदिन गैस का प्रवाह दर्ज किया गया। लगातार परीक्षण के दौरान इसकी अधिकतम दर दो लाख स्टैंडर्ड क्यूबिक मीटर प्रतिदिन तक पहुंची।

इसके साथ लगभग 170 बैरल प्रतिदिन कंडेनसेट का प्रवाह भी दर्ज किया गया। कंडेनसेट प्राकृतिक गैस के साथ मिलने वाला तरल हाइड्रोकार्बन होता है, जिसे अलग करके उपयोग किया जा सकता है। कंपनी ने कुएं के मुहाने पर दबाव 1,815 पीएसआई दर्ज होने की जानकारी भी दी है। अब इस कुएं के अगले ऊपरी हिस्से का परीक्षण करने की तैयारी की जा रही है।

यहां समझना जरूरी है कि परीक्षण के दौरान दर्ज अधिकतम प्रवाह दर और किसी क्षेत्र में मौजूद कुल गैस भंडार दो अलग-अलग चीजें हैं। वास्तविक भंडार और लंबे समय तक उत्पादन की क्षमता जानने के लिए आगे तकनीकी मूल्यांकन जरूरी होगा।

भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह खोज?

भारत में प्राकृतिक गैस का इस्तेमाल बिजली उत्पादन, उर्वरक निर्माण, रिफाइनरी, औद्योगिक इकाइयों और शहरों में सीएनजी तथा पीएनजी की आपूर्ति के लिए किया जाता है। घरेलू स्तर पर गैस की उपलब्धता बढ़ने से इन क्षेत्रों को लाभ मिल सकता है, बशर्ते खोज के बाद पर्याप्त संसाधन प्रमाणित हों और उनका उत्पादन व्यावसायिक रूप से संभव हो।

भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का एक हिस्सा विदेशों से आयात के माध्यम से पूरा करता है। ऐसे में देश के भीतर नए गैस संसाधनों की पहचान आयात पर निर्भरता कम करने की व्यापक रणनीति का हिस्सा है। हालांकि, इस एक खोज से भारत का आयात कितना घटेगा, इसका आकलन अभी नहीं किया जा सकता। इसके लिए भंडार के आकार, उत्पादन लागत, बुनियादी ढांचे और वास्तविक उत्पादन की जानकारी जरूरी होगी।

कृष्णा-गोदावरी बेसिन पर क्यों टिकी हैं नजरें?

कृष्णा-गोदावरी बेसिन भारत के प्रमुख हाइड्रोकार्बन क्षेत्रों में शामिल है। बंगाल की खाड़ी में फैले इस क्षेत्र में तेल और प्राकृतिक गैस की खोज तथा उत्पादन गतिविधियां पहले से चलती रही हैं। यहां नई खोज का महत्व इसलिए भी है कि यह घरेलू ऊर्जा संसाधनों की संभावनाओं का आकलन करने में मदद कर सकती है।

ऑयल इंडिया देश के अन्य समुद्री क्षेत्रों में भी खोज गतिविधियां बढ़ा रही है। कंपनी ने सितंबर 2026 में अगले तीन वर्षों के दौरान अपतटीय गहरे और अति-गहरे समुद्री क्षेत्रों की खोज के लिए लगभग 15,000 करोड़ रुपये निवेश करने की योजना की जानकारी दी थी। यह निवेश योजना देश में नए ऊर्जा संसाधनों की पहचान के व्यापक प्रयासों का हिस्सा है।

क्या अब सस्ती होगी गैस?

यह सवाल आम उपभोक्ताओं के लिए सबसे महत्वपूर्ण है, लेकिन फिलहाल इस खोज के आधार पर गैस की कीमतों में कमी का दावा करना जल्दबाजी होगी। किसी नए क्षेत्र में गैस मिलने के बाद उसके भंडार का मूल्यांकन, उत्पादन की आर्थिक व्यवहार्यता, गैस को प्रसंस्कृत करने की व्यवस्था और उसे पाइपलाइन या अन्य माध्यमों से बाजार तक पहुंचाने की योजना जरूरी होती है।

यदि आगे की जांच में पर्याप्त गैस भंडार प्रमाणित होता है और व्यावसायिक उत्पादन संभव पाया जाता है, तो यह खोज घरेलू आपूर्ति में योगदान दे सकती है। लेकिन सीएनजी, पीएनजी या औद्योगिक गैस की कीमतों पर इसका वास्तविक असर उत्पादन शुरू होने, लागत और बाजार की परिस्थितियों पर निर्भर करेगा।

अभी क्या पता है और क्या जानना बाकी है?

फिलहाल ऑयल इंडिया की खोज से मत्स्यपुरी फॉर्मेशन में प्राकृतिक गैस की मौजूदगी और परीक्षण के दौरान दर्ज प्रवाह दर की पुष्टि हुई है। कंपनी अगले ऊपरी हिस्से का परीक्षण करने की तैयारी में है। लेकिन कुल प्रमाणित गैस भंडार, दीर्घकालिक उत्पादन क्षमता, व्यावसायिक उत्पादन की समयसीमा और उपभोक्ताओं तक आपूर्ति की योजना के बारे में विस्तृत जानकारी सामने आना बाकी है।

Location :  New Delhi

Published :  23 October 2026, 3:54 PM IST

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