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पूर्व केंद्रीय मंत्री और बीजेपी नेता मेनका गांधी
नई दिल्ली: जानवरों पर होने वाले प्रयोगों को लेकर केंद्र सरकार के एक नए प्रस्ताव ने विवाद खड़ा कर दिया है। पूर्व केंद्रीय मंत्री और बीजेपी नेता मेनका गांधी ने प्रयोगशालाओं में जानवरों पर परीक्षण से जुड़े प्रस्तावित नियमों पर सवाल उठाए हैं। उनकी संस्था ‘पीपुल फॉर एनिमल्स’ (PFA) का कहना है कि प्रस्तावित बदलावों से जानवरों की सुरक्षा और प्रयोगों की स्वतंत्र निगरानी प्रभावित हो सकती है। मेनका गांधी ने सवाल उठाया है कि अगर प्रयोग करने वाले संस्थान ही अपनी निगरानी करने लगेंगे, तो जानवरों की सुरक्षा कौन सुनिश्चित करेगा?
केंद्रीय मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय ने प्रयोगशालाओं में जानवरों के इस्तेमाल, प्रजनन और व्यापार को नियंत्रित करने के लिए नए नियमों का मसौदा जारी किया है। इसका नाम ‘प्रिवेंशन ऑफ क्रुएल्टी टू एनिमल्स (कंट्रोल एंड सुपरविजन ऑफ एक्सपेरिमेंट, ब्रीडिंग एंड ट्रेडिंग ऑफ लैबोरेटरी एनिमल्स) रूल्स, 2026’ है।
यह मसौदा अक्टूबर 2026 में सार्वजनिक किया गया था। मंत्रालय ने इस पर आम लोगों और संबंधित पक्षों से सुझाव तथा आपत्तियां मांगी हैं। प्रस्तावित नियमों का उद्देश्य वैज्ञानिक और शैक्षणिक प्रयोगों में इस्तेमाल होने वाले जानवरों के संरक्षण, देखभाल और प्रयोगों की निगरानी के लिए व्यवस्था तय करना है।
हालांकि, मसौदे के कुछ प्रावधानों को लेकर पशु अधिकार संगठनों ने चिंता जताई है। उनका कहना है कि कुछ श्रेणियों के प्रयोगों की मंजूरी संस्थागत पशु नैतिकता समितियों के स्तर पर दिए जाने से स्वतंत्र निगरानी की भूमिका कमजोर हो सकती है। <Cite refs={["turn603773search0","turn603773search2"]}/>
मेनका गांधी से जुड़ी संस्था पीपुल फॉर एनिमल्स ने प्रस्तावित नियमों पर सवाल उठाते हुए कहा है कि प्रयोगशालाओं में कुत्तों और प्राइमेट्स सहित विभिन्न जानवरों पर होने वाले परीक्षणों की मंजूरी और निगरानी की व्यवस्था बेहद महत्वपूर्ण है।
संस्था का तर्क है कि जिन संस्थानों में प्रयोग किए जाते हैं, अगर उन्हीं के स्तर पर अधिक प्रयोगों को मंजूरी देने की व्यवस्था होती है, तो निगरानी की स्वतंत्रता को लेकर सवाल उठ सकते हैं। पशु अधिकार कार्यकर्ताओं की चिंता है कि इससे जानवरों के हितों की रक्षा के लिए बाहरी निगरानी कितनी प्रभावी रहेगी।
मेनका गांधी ने स्वतंत्र निगरानी की जरूरत पर जोर देते हुए सवाल किया है कि जब जानवरों की जान और उनके कल्याण का मामला हो, तो किसी संस्थान को अपनी ही निगरानी की जिम्मेदारी कैसे दी जा सकती है?
उनकी आपत्ति का केंद्र यह है कि जानवरों पर प्रयोगों की मंजूरी देने वाली व्यवस्था निष्पक्ष और जवाबदेह होनी चाहिए। पीपुल फॉर एनिमल्स ने यह भी कहा है कि दुनिया में वैज्ञानिक शोध के लिए जानवरों के इस्तेमाल को कम करने और वैकल्पिक तरीकों को बढ़ावा देने पर जोर दिया जा रहा है। ऐसे में भारत में प्रस्तावित बदलावों से जानवरों पर परीक्षण की प्रक्रिया आसान होने की आशंका पर विचार किया जाना चाहिए।
प्रस्तावित मसौदे में प्रयोगों की प्रकृति के आधार पर मंजूरी की अलग-अलग व्यवस्था का प्रावधान है। इसके तहत हल्के और मध्यम श्रेणी के प्रयोगों के लिए संस्थागत पशु नैतिकता समिति (IAEC) की भूमिका निर्धारित की गई है। वहीं, कृंतक और खरगोश से अलग कुछ श्रेणियों के जानवरों पर गंभीर तथा बिना रिकवरी वाले प्रयोगों के लिए केंद्रीय समिति (CCSEA) से अनुमति लेने का प्रावधान भी मसौदे में शामिल है।
यही अंतर इस विवाद का महत्वपूर्ण पहलू है। पीपुल फॉर एनिमल्स को आशंका है कि संस्थागत स्तर पर मंजूरी की बढ़ती भूमिका से स्वतंत्र निगरानी प्रभावित हो सकती है। दूसरी ओर, मसौदे के वास्तविक प्रावधानों को देखते हुए यह कहना सही नहीं होगा कि सभी प्रकार के प्रयोगों के लिए केंद्रीय निगरानी पूरी तरह समाप्त की जा रही है। अंतिम स्थिति नियमों के अंतिम स्वरूप पर निर्भर करेगी। <Cite refs={["turn603773search2","turn603773search3"]}/>
सरकार ने इस मसौदे पर संबंधित पक्षों से सुझाव और आपत्तियां आमंत्रित की हैं। आधिकारिक मसौदे के अनुसार, इस प्रक्रिया के लिए 30 दिनों की अवधि निर्धारित की गई है। ऐसे में पशु अधिकार संगठनों, वैज्ञानिकों और अन्य संबंधित पक्षों के पास प्रस्तावित प्रावधानों पर अपनी राय रखने का अवसर है।
अब देखना होगा कि सरकार को मिलने वाले सुझावों के बाद नियमों के अंतिम स्वरूप में कोई बदलाव किया जाता है या नहीं। फिलहाल बहस का मुख्य सवाल यही है कि वैज्ञानिक शोध की जरूरतों और जानवरों के संरक्षण के बीच संतुलन कैसे बनाया जाए, ताकि प्रयोगों की उपयोगिता के साथ-साथ पशु कल्याण और स्वतंत्र निगरानी भी सुनिश्चित हो सके।
Location : New Delhi
Published : 23 October 2026, 2:36 PM IST
Topics : animal testing India CCSEA laboratory animal testing rules 2026 Maneka Gandhi People for Animals
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