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भारत-तिब्बत सीमा विवाद
New Delhi: भारत और चीन के बीच अरुणाचल प्रदेश की सीमा पर चीनी सैनिकों के साथ कथित आमने-सामने की स्थिति को लेकर सियासी घमासान शुरू हो गया है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से इस पूरे मामले पर स्थिति स्पष्ट करने की मांग की है। खरगे ने भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP) के महानिदेशक के कथित बयान का हवाला देते हुए सवाल उठाया कि क्या अरुणाचल प्रदेश में कई स्थानों पर चीनी सैनिकों के साथ फिर गंभीर टकराव की स्थिति बन रही है? उन्होंने इसे डोकलाम और गलवान जैसी परिस्थितियों की आशंका से जोड़ते हुए केंद्र सरकार से संसद और देश को भरोसे में लेने की अपील की है।
अरुणाचल सीमा पर क्या हो रहा है? खरगे ने उठाए सवाल
मल्लिकार्जुन खरगे ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर अपनी पोस्ट में ITBP के महानिदेशक के कथित बयान को गंभीर चिंता का विषय बताया। उनके मुताबिक, अरुणाचल प्रदेश की सीमा पर कई स्थानों पर चीनी सैनिकों के साथ आमने-सामने की स्थिति बनी हुई है। खरगे ने सवाल किया कि क्या भारत और चीन के बीच एक बार फिर किसी गंभीर सैन्य टकराव की स्थिति बन रही है? उन्होंने डोकलाम और गलवान में हुए घटनाक्रम का उल्लेख करते हुए केंद्र सरकार से इस मामले में स्पष्ट जानकारी देने की मांग की।
तक्सिंग के पास चीनी घुसपैठ की रिपोर्ट का भी जिक्र
खरगे ने अगस्त में अरुणाचल प्रदेश के तक्सिंग के पास कथित चीनी घुसपैठ की खबरों का हवाला देते हुए केंद्र सरकार पर महत्वपूर्ण जानकारी सार्वजनिक नहीं करने का आरोप लगाया। उन्होंने दावा किया कि वाचा-दमाई में कोर कमांडर स्तर की बातचीत के 47 दिन बाद भी टकराव जारी रहने की खबरें सामने आईं। खरगे के अनुसार, संबंधित स्थान तक्सिंग से लगभग 180 किलोमीटर दूर बताया गया है।
कांग्रेस अध्यक्ष ने सवाल उठाया कि क्या भारत की गश्त करने की पहुंच प्रभावित हुई है? उन्होंने कहा कि अरुणाचल प्रदेश भारत का अभिन्न हिस्सा है और सीमा से जुड़े घटनाक्रम पर सरकार को देश के सामने स्पष्ट स्थिति रखनी चाहिए।
इन दावों के संदर्भ में कथित घुसपैठ की प्रकृति, स्थान और समय की आधिकारिक पुष्टि महत्वपूर्ण होगी। सीमा पर आमने-सामने की स्थिति और किसी क्षेत्र में वास्तविक नियंत्रण बदलने का दावा एक ही बात नहीं है।
मोदी-शी जिनपिंग की मुलाकातों पर भी उठाए सवाल
खरगे ने भारत और चीन के बीच उच्चस्तरीय बैठकों तथा कूटनीतिक बातचीत के परिणामों पर भी सवाल उठाए। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच कथित तौर पर हुई 23 बैठकों और संवादों का उल्लेख किया।
इसके अलावा, खरगे ने राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल की भागीदारी वाले विशेष प्रतिनिधि स्तर के 25 दौर, वर्किंग मैकेनिज्म फॉर कंसल्टेशन एंड कोऑर्डिनेशन (WMCC) की 36 बैठकों और शंघाई सहयोग संगठन (SCO) तथा ब्रिक्स सम्मेलनों का हवाला दिया।
कांग्रेस अध्यक्ष ने पूछा कि इन तमाम कूटनीतिक प्रयासों से भारत को जमीन पर क्या ठोस नतीजे मिले हैं? उन्होंने मई 2020 से पहले की स्थिति के अनुसार भारतीय सैनिकों की गश्त के अधिकार पूरी तरह बहाल होने को लेकर भी सवाल उठाया।
यहां ध्यान देने वाली बात है कि बैठकों की संख्या अपने आप में सीमा विवाद के समाधान का प्रमाण नहीं होती। वास्तविक स्थिति का आकलन करने के लिए गश्त की पहुंच, सैन्य तैनाती, सीमा पर समझौतों के क्रियान्वयन और आधिकारिक बयानों को देखना जरूरी है।
चीन के साथ व्यापार घाटे पर भी सरकार को घेरा
खरगे ने चीन के साथ भारत के बढ़ते व्यापार घाटे को लेकर भी केंद्र सरकार की आलोचना की। उन्होंने अपने बयान में दावा किया कि गलवान संघर्ष के बाद चीन से भारत का आयात 102 प्रतिशत बढ़ा है, जबकि व्यापार घाटा बढ़कर 112.16 अरब डॉलर हो गया है, जो उनके मुताबिक 155 प्रतिशत की वृद्धि है।
कांग्रेस अध्यक्ष ने वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के चीन द्वारा भारतीय निर्यात में बाधाएं पैदा किए जाने संबंधी कथित बयान का भी उल्लेख किया। साथ ही उन्होंने चीन से जुड़े निवेश पर प्रतिबंधों में ढील और पात्र चीन-संबद्ध कंपनियों को उत्पादन-आधारित प्रोत्साहन (PLI) का लाभ देने पर विचार किए जाने को लेकर सवाल उठाए।
खरगे ने इसे 'मेक इन इंडिया' के उद्देश्य से जोड़ते हुए पूछा कि क्या देश की विनिर्माण नीति का फायदा घरेलू उत्पादन के बजाय चीन से आयात को मिल रहा है?
व्यापार से जुड़े इन आंकड़ों की पुष्टि के लिए संबंधित वित्तीय वर्षों, आयात-निर्यात के आधिकारिक आंकड़ों और व्यापार घाटे की गणना के आधार को देखना आवश्यक है।
PM मोदी से संसद में जवाब देने की मांग
कांग्रेस अध्यक्ष ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से विपक्ष पर आरोप लगाने के बजाय संसद और देश को सीमा की स्थिति के बारे में जानकारी देने की मांग की। उनका कहना है कि चीन के साथ सीमा पर किसी भी तरह के टकराव, गश्त की पहुंच और व्यापार नीति से जुड़े सवालों पर पारदर्शिता जरूरी है।
फिलहाल इस मामले में सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि अरुणाचल प्रदेश में कथित टकराव की वास्तविक स्थिति क्या है और क्या भारतीय गश्त की पहुंच पर कोई असर पड़ा है। इन सवालों पर केंद्र सरकार और संबंधित सुरक्षा एजेंसियों का आधिकारिक पक्ष सामने आने के बाद ही पूरे घटनाक्रम की स्पष्ट तस्वीर बन सकेगी।
Location : New Delhi
Published : 23 October 2026, 3:23 PM IST