त्याग, ममता और इंसानियत की मिसाल: काजुली विश्वास ने अपना सब कुछ छोड़ भूखों को बनाया परिवार

पश्चिम बंगाल की काजुली विश्वास ने एक ऐसा फैसला लिया जिसने उनकी पूरी जिंदगी बदल दी। पति और परिवार का साथ छोड़कर उन्होंने भूख से जूझ रहे लोगों को अपना परिवार बना लिया। आज वह हर दिन 100 से अधिक जरूरतमंदों को अपने हाथों से भोजन कराकर लोगों के लिए प्रेरणा बन चुकी हैं।

Post Published By: Komal Chauhan
Updated : 2 July 2026, 2:58 PM IST
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New Delhi: दुनिया में सबसे बड़ी बेबसी तब होती है, जब किसी के सामने रोटी हो ही नहीं। भूख का दर्द वही समझ सकता है, जिसने कभी खाली पेट रात गुजारी हो या किसी मजबूर की आंखों में रोटी की उम्मीद देखी हो। पश्चिम बंगाल के पूर्व बर्धमान जिले के कटवा स्टेशन पर हर दिन एक ऐसी महिला नजर आती हैं, जो सिर्फ खाना नहीं परोसतीं, बल्कि टूटे हुए लोगों को अपनापन और जीने की उम्मीद भी देती हैं। उनका नाम है काजुली विश्वास। स्थानीय लोग उन्हें सम्मान और स्नेह से 'बंगाल की अन्नपूर्णा' कहकर पुकारते हैं।

गरीबों का दर्द देखकर लिया जिंदगी बदल देने वाला फैसला

काजुली विश्वास पहले एक सामान्य गृहिणी थीं। लेकिन उनके मन में हमेशा गरीब, बेसहारा और भूखे लोगों की मदद करने की इच्छा रहती थी। उन्होंने तय किया कि वह बिना किसी संस्था या आर्थिक सहायता के अपने स्तर पर जरूरतमंदों के लिए भोजन बनाएंगी। यह फैसला आसान नहीं था, लेकिन उनके लिए किसी भूखे को खाना खिलाने से बड़ी कोई पूजा नहीं थी।

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पति ने कहा- घर चुनो या भूखों की सेवा

जब काजुली ने अपने इस फैसले के बारे में परिवार और पति को बताया तो उन्हें सहयोग नहीं मिला। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, उनके पति ने साफ शब्दों में कहा कि या तो वह घर-परिवार संभालें या फिर सड़क पर रहने वाले भूखे लोगों की सेवा करें। यह किसी भी महिला के लिए बेहद कठिन पल था। एक ओर परिवार था, तो दूसरी ओर वे लोग थे जिनके पास दो वक्त की रोटी भी नहीं थी।

रोते हुए छोड़ा घर, लेकिन इंसानियत का साथ नहीं छोड़ा

काजुली ने भारी मन से अपना घर छोड़ने का फैसला किया। उन्होंने रिश्तों का त्याग किया, लेकिन मानवता का हाथ नहीं छोड़ा। उनके पास रहने के लिए घर नहीं था, भविष्य की कोई गारंटी नहीं थी, लेकिन जरूरतमंदों के लिए कुछ करने का साहस जरूर था। उनका यह फैसला आज हजारों लोगों के लिए प्रेरणा बन चुका है।

सोने की बालियां बेचकर शुरू की सेवा की रसोई

घर छोड़ने के बाद उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती पैसों की थी। तब उन्होंने अपने कानों की सोने की बालियां बेच दीं। उन्हीं पैसों से राशन खरीदा और कटवा स्टेशन के आसपास रहने वाले बुजुर्गों, अनाथ बच्चों और बेसहारा लोगों के लिए खाना बनाना शुरू किया। शुरुआत में लोग उन्हें हैरानी से देखते थे, लेकिन धीरे-धीरे उनकी निस्वार्थ सेवा ने सभी का दिल जीत लिया।

हर दिन 100 से ज्यादा लोगों के लिए बनता है भोजन

आज काजुली विश्वास बिना किसी छुट्टी के रोज करीब 100 से अधिक जरूरतमंद लोगों के लिए ताजा और पौष्टिक भोजन तैयार करती हैं। वह सिर्फ खाना ही नहीं परोसतीं, बल्कि हर व्यक्ति को सम्मान और अपनापन भी देती हैं। यही वजह है कि स्टेशन पर रहने वाले कई लोग उन्हें 'मां' कहकर बुलाते हैं। उनके लिए काजुली सिर्फ भोजन देने वाली महिला नहीं, बल्कि उम्मीद और ममता का दूसरा नाम बन चुकी हैं।

अब समाज भी बढ़ा रहा मदद का हाथ

काजुली विश्वास की कहानी जब लोगों तक पहुंची तो कई स्थानीय लोग और सामाजिक संगठन भी उनकी मदद के लिए आगे आने लगे। कोई राशन देता है तो कोई आर्थिक सहयोग करता है, ताकि उनकी रसोई लगातार चलती रहे और कोई भूखा न सोए।

संदेश जो हर दिल को छू जाता है

काजुली विश्वास की कहानी यह सिखाती है कि इंसान की असली पहचान उसके धन या संपत्ति से नहीं, बल्कि उसके कर्मों से होती है। उन्होंने अपने जीवन के सबसे कठिन फैसले को दूसरों की मुस्कान में बदल दिया। आज उनकी रसोई में सिर्फ भोजन नहीं, बल्कि ममता, सम्मान और इंसानियत भी परोसी जाती है। उनका जीवन यह संदेश देता है कि यदि इरादे सच्चे हों, तो एक अकेला इंसान भी कई लोगों की जिंदगी में उम्मीद की रोशनी जगा सकता है।

Location :  New Delhi

Published :  2 July 2026, 2:58 PM IST

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