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सोशल मीडिया पर कासगंज का बताया जा रहा एक वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें एक व्यक्ति मगरमच्छ की पूंछ खींचता दिख रहा है। वीडियो असली है या AI से बना, इसकी पुष्टि नहीं हो पाई है, लेकिन इसने इंटरनेट पर बहस छेड़ दी है।
सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो (Img Source: Insta/ghantaa)
New Delhi: आज के डिजिटल दौर में सोशल मीडिया पर वायरल होने वाले वीडियो की सच्चाई पहचानना दिन-ब-दिन मुश्किल होता जा रहा है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद से बनाए जा रहे वीडियो इतने रियल लगते हैं कि कई बार लोग असली और नकली में फर्क ही नहीं कर पाते। इसी बीच सोशल मीडिया पर एक ऐसा ही वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसे उत्तर प्रदेश के कासगंज का बताया जा रहा है। हालांकि यह वीडियो असली है या AI से जनरेट किया गया है, इसकी आधिकारिक पुष्टि अब तक नहीं हो पाई है।
वायरल हो रहे इस वीडियो में एक मगरमच्छ नदी के किनारे दिखाई देता है। वीडियो के अनुसार तभी एक व्यक्ति मगरमच्छ की पूंछ पकड़कर उसे खींचने लगता है। शुरुआत में वह एक हाथ से उसे खींचने की कोशिश करता है, लेकिन जब ऐसा नहीं हो पाता तो दोनों हाथों का इस्तेमाल करता है। कुछ ही सेकंड बाद मगरमच्छ को खतरे का अहसास होता है और वह तेजी से नदी की ओर भाग जाता है।
यह दृश्य देखने के बाद सोशल मीडिया यूजर्स हैरान हैं। आमतौर पर मगरमच्छ जैसे खतरनाक जानवर से लोग दूरी बनाए रखते हैं, लेकिन इस वीडियो में इंसान का इतना नजदीक जाकर उसे छेड़ना कई सवाल खड़े करता है। यही वजह है कि लोग इस वीडियो को लेकर कन्फ्यूजन में हैं कि यह असली घटना है या फिर AI की मदद से बनाया गया क्लिप।
वीडियो की सबसे बड़ी खासियत यही है कि यह पूरी तरह रियल जैसा दिखता है। लेकिन जिस तरह से मगरमच्छ इंसान से डरकर भागता है, उसे देखकर कई यूजर्स इसे AI जनरेटेड मान रहे हैं। वहीं कुछ लोगों का दावा है कि यह वीडियो वास्तव में कासगंज इलाके का है। फिलहाल किसी सरकारी या आधिकारिक एजेंसी ने इसकी पुष्टि नहीं की है।
यह वीडियो इंस्टाग्राम पर Ghantaa नाम के अकाउंट से शेयर किया गया है। खबर लिखे जाने तक इसे हजारों लोग देख चुके हैं और बड़ी संख्या में लाइक व कमेंट्स भी आ चुके हैं।
एक यूजर ने लिखा, “वीडियो यूपी के कासगंज का है।”
दूसरे ने कहा, “मत कर लाला, मत कर।”
तीसरे यूजर ने तंज कसते हुए लिखा, “इंडिया में सिविक सेंस।”
एक अन्य यूजर ने लिखा, “हर जगह उंगली करना जरूरी है क्या?”
वहीं एक कमेंट में कहा गया, “यूपी और बिहार के असली वीडियो AI वीडियो जैसे लगते हैं।”
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AI तकनीक के बढ़ते इस्तेमाल के कारण फेक वीडियो और भ्रामक कंटेंट तेजी से फैल रहा है। ऐसे में किसी भी वायरल वीडियो पर आंख बंद कर भरोसा करना सही नहीं है। विशेषज्ञों की मानें तो किसी भी वीडियो की लोकेशन, स्रोत और आधिकारिक पुष्टि के बिना उसे सच मानना गलत हो सकता है।
नोट: इस खबर में दी गई जानकारी सोशल मीडिया पर किए गए दावों पर आधारित है। वीडियो की प्रामाणिकता की पुष्टि नहीं हो पाई है।