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शहीद ग्रेनेडियर उदयमान सिंह (Img- Pinterest)
New Delhi: कारगिल की बर्फीली चोटियों पर जब देश की अस्मिता की जंग लड़ी जा रही थी, तब जम्मू के शमाचक गांव का एक 18 साल का लड़का वतन की हिफाजत में सीना ताने खड़ा था। नाम था- ग्रेनेडियर उदयमान सिंह। 5 जुलाई 1999 को टाइगर हिल पर दुश्मनों से लोहा लेते हुए उदयमान ने अपनी शहादत दी।
वे उस जाबांज टुकड़ी का हिस्सा थे, जिसका नेतृत्व परमवीर चक्र विजेता योगेंद्र यादव कर रहे थे। शरीर में गोलियां लगने के बावजूद उदयमान आखिरी सांस तक लड़ते रहे। उनकी इस असाधारण वीरता के लिए उन्हें मरणोपरांत 'सेना मेडल' से सम्मानित किया गया।
आज कारगिल युद्ध के ढाई दशक से ज्यादा का समय बीत चुका है, लेकिन जम्मू स्थित उदयमान के घर का एक कमरा आज भी 1999 के उसी मोड़ पर ठहरा हुआ है। यह महज ईंट-सीमेंट का कमरा नहीं, बल्कि एक मां का अपने बेटे के प्रति अमर प्रेम का मंदिर है।
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इस कमरे में कदम रखते ही हवा में देशभक्ति और एक मां के मर्मस्पर्शी दर्द का अहसास होता है। मां ने अपने 18 साल के बेटे की हर एक छोटी-बड़ी चीज को इतने सलीके से संभालकर रखा है कि लगता है उदयमान अभी सरहद से लौटकर अंदर आने वाले हैं।
इस कमरे में रखी हर वस्तु शहादत की एक खामोश दास्तान सुनाती है। यहां रखा उदयमान का वह वॉलेट (बटुआ) आज भी उस खूनी मंजर की गवाही देता है, जिस पर दुश्मन की गोली का निशान साफ दिखाई देता है।
इतना ही नहीं, वॉलेट के भीतर रखा एक रुपये का वह सिक्का भी संजोकर रखा गया है, जिसे चीरती हुई गोली उदयमान के सीने में जा धंसी थी। मां के लिए यह सिक्का और बटुआ सिर्फ धातु या चमड़े का टुकड़ा नहीं, बल्कि अपने बेटे के स्पर्श की आखिरी निशानी है।
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उदयमान की बहन वंदना लंगेह जब इस कमरे को देखती हैं, तो उनकी आंखें भर आती हैं, लेकिन आवाज में गर्व की झलक होती है। वे कहती हैं, "मैं अपने भाई को राखी नहीं बांध पाती, लेकिन सुकून इस बात का है कि उसकी महान कुर्बानी की वजह से देश की अनगिनत बहनें आज सुरक्षित रहकर अपने भाइयों को राखी बांध रही हैं।" यह कमरा उन तमाम जन्मदिनों और त्योहारों का साक्षी है, जो उदयमान के बिना सूने बीत गए।
Location : New Delhi
Published : 26 July 2026, 9:33 AM IST
Topics : Indian Army Kargil Hero Kargil Vijay Diwas