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जम्मू-कश्मीर में नेशनल कॉन्फ्रेंस के भीतर बगावत (Img: X)
Srinagar: जम्मू-कश्मीर में मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के मंत्रिमंडल के विस्तार के बाद सत्ताधारी नेशनल कॉन्फ्रेंस (NC) के भीतर असंतोष गहराता दिख रहा है। शुक्रवार को पार्टी के 21 बागी विधायकों ने पूर्व मंत्री और लोलाब के विधायक कैसर जमशेद लोन के आवास पर एक बैठक की। सूत्रों के अनुसार, इस बैठक में कई प्रस्ताव पारित किए गए जिनमें चार मंत्रियों के साथ-साथ मुख्यमंत्री के सलाहकार नासिर असलम वानी और पार्टी कोषाध्यक्ष शम्मी ओबेरॉय को उनके पदों से हटाने की मांग शामिल है।
सूत्रों के मुताबिक, बागी विधायकों ने मांग की है कि जिन मंत्रियों ने दो साल तक अपना पद संभाल लिया है, उन्हें बदला जाना चाहिए, ताकि अन्य विधायकों को भी मंत्रिमंडल में शामिल होने का मौका मिल सके। विधायकों ने जून में श्रीनगर के दाचीगाम में हुई पार्टी बैठक में लिए गए फैसलों को लागू करने की भी मांग की। विधायक नजीर गुरेजी की अध्यक्षता में एक समिति का गठन किया गया है। यह समिति जल्द ही NC अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला और मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला से मुलाकात करेगी और उनके सामने विधायकों के प्रस्ताव रखेगी।
शुक्रवार को दोपहर करीब 3:00 बजे शुरू हुई यह बैठक शाम 6:00 बजे समाप्त हुई। इसमें राजौरी-पुंछ क्षेत्र के विधायकों ने भी हिस्सा लिया। थन्नामंडी के विधायक मुजफ्फर इकबाल खान ने पहले ही मंत्रिमंडल में अपने क्षेत्र को प्रतिनिधित्व न मिलने पर चिंता जताई थी। बैठक में शामिल होने वालों में पुंछ हवेली के विधायक एजाज जान और बुढाल के विधायक जावेद इकबाल चौधरी भी शामिल थे।
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वहीं, कैसर जमशेद लोन ने इस पर अलग ही बात कही। उन्होंने कहा कि उन्होंने बस अपने साथियों को खाने पर बुलाया था। हालांकि, बैठक में शामिल हुए एक विधायक ने दावा किया कि कुछ मंत्री जिनके खिलाफ दाचीगाम बैठक में गंभीर आरोप लगाए गए थे अभी भी अपने पदों पर बने हुए हैं।
नेशनल कॉन्फ्रेंस (NC) के असंतुष्ट सांसद (MP) आगा सैयद रुहुल्लाह मेहदी, 3 नवंबर को पार्टी और अपनी लोकसभा सीट, दोनों से इस्तीफा देने के अपने फैसले पर अडिग नजर आ रहे हैं। उन्होंने जनता से अपील की है कि वे उस दिन बडगाम में जिला उपायुक्त (डिप्टी कमिश्नर) कार्यालय के पास आयोजित होने वाली रैली में शामिल हों।
रुहुल्लाह की नाराजगी और उनके संभावित इस्तीफे को पार्टी के लिए एक बड़ी चुनौती के रूप में देखा जा रहा है। अगर वह अपनी लोकसभा सीट छोड़ते हैं, तो वहां उपचुनाव कराने की नौबत आ सकती है जो कि एक मुश्किल स्थिति होगी, खासकर तब जब नेशनल कॉन्फ्रेंस को हाल ही में बडगाम विधानसभा उपचुनाव में हार का सामना करना पड़ा है।
इस बीच पार्टी अध्यक्ष डॉ. फारूक अब्दुल्ला ने विधायक मुबारक गुल को महासचिव के पद से हटा दिया है। अगले आदेश तक अली मोहम्मद सागर को फिर से महासचिव की जिम्मेदारी सौंपी गई है। गुल को पिछले मंगलवार को ही इस पद पर नियुक्त किया गया था; मंत्री पद न मिलने के बाद उन्होंने सार्वजनिक रूप से अपनी नाराजगी जाहिर की थी।
गुल ने संकेत दिया था कि उनके समर्थक उन पर पार्टी छोड़ने और अपने पद से इस्तीफा देने का दबाव बना रहे हैं। उन्होंने कहा कि वह 4 नवंबर को अपने अंतिम फैसले की घोषणा करेंगे। शुक्रवार रात को उनके समर्थकों ने श्रीनगर में मशाल जुलूस भी निकाला।
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नेशनल कॉन्फ्रेंस के भीतर असंतुष्ट विधायकों का एकजुट होना और सांसद आगा रुहुल्लाह द्वारा इस्तीफे की घोषणा ने पार्टी नेतृत्व के लिए एक संगठनात्मक चुनौती खड़ी कर दी है। अब सबकी नजरें फारूक और उमर अब्दुल्ला के साथ होने वाली आगामी बैठकों पर टिकी हैं और इस बात पर भी कि पार्टी नेतृत्व आगे क्या कदम उठाता है।
कथित तौर पर बैठक में शामिल होने वाले विधायकों में मुबारक गुल (ईदगाह), हसनैन मसूदी (पंपोर), अर्जुन सिंह राजू (रामबन), सैफ-उद-दीन भट (खानसाहिब), फारूक शाह (तंगमर्ग), नजीर अहमद खान (गुरेज़), हिलाल लोन (सोनवारी), बशीर वीरी (बिजबेहरा), अब्दुल मजीद लारमी (अनंतनाग पश्चिम), गुलाम मोहिउद्दीन मीर (राजपोरा), जावेद अहमद (करना), अजाज जान शामिल हैं। (पुंछ हवेली), जावेद इकबाल (बुधल), खुर्शीद अहमद (गुलाबगढ़), सज्जाद शफी (उरी), मुश्ताक अहमद गुरु (चन्नापोरा), और मुजफ्फर खान (थन्नामंडी)।
Location : Srinagar
Published : 31 October 2026, 12:16 PM IST