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एकता के धागे में पिरोया पूरा देश( AI Generated ig)
New Delhi: किसान परिवार में जन्मे वल्लभभाई पटेल ने आजादी की लड़ाई से लेकर देश को एकजुट करने तक निभाई अहम भूमिका भारत के इतिहास में कुछ ऐसे महान व्यक्तित्व हुए हैं, जिन्होंने अपने साहस, मेहनत और मजबूत फैसलों से देश की तस्वीर बदल दी। सरदार वल्लभभाई पटेल भी उन्हीं में से एक थे। उन्हें भारत का लौह पुरुष कहा जाता है। उन्होंने आजादी की लड़ाई में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और स्वतंत्रता के बाद देश की 560 से अधिक रियासतों को भारत में मिलाने का बड़ा काम किया। आज 31 अक्टूबर को उनकी जयंती के अवसर पर पूरा देश उन्हें याद कर रहा है। उनकी जयंती को राष्ट्रीय एकता दिवस के रूप में भी मनाया जाता है।
सरदार वल्लभभाई पटेल का जन्म 31 अक्टूबर 1875 को गुजरात के नडियाद में एक किसान परिवार में हुआ था। उनके पिता का नाम झवेरभाई पटेल और माता का नाम लाडबा था। बचपन से ही वह मेहनती और मजबूत इरादों वाले व्यक्ति थे। उन्होंने अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद वकालत की पढ़ाई की और आगे चलकर England से lawyer बने। भारत लौटने के बाद उन्होंने वकालत शुरू की, लेकिन देश की आजादी की लड़ाई ने उनके जीवन की दिशा बदल दी।
महात्मा गांधी के विचारों से प्रभावित होकर सरदार पटेल स्वतंत्रता आंदोलन में शामिल हो गए। उन्होंने किसानों और आम लोगों के अधिकारों के लिए कई आंदोलन किए। साल 1918 में खेड़ा सत्याग्रह के दौरान उन्होंने किसानों का साथ दिया। उस समय फसल खराब होने के कारण किसान लगान देने की स्थिति में नहीं थे। पटेल ने किसानों को संगठित किया और उनके हक की आवाज उठाई। इसके बाद 1928 में बारडोली सत्याग्रह में भी उन्होंने किसानों का नेतृत्व किया। इस आंदोलन में किसानों को बड़ी सफलता मिली। इसी आंदोलन के बाद लोगों ने उन्हें 'सरदार' की उपाधि दी।
गांधी जी से प्रेरित होकर देश की आजादी के लिए लड़े
15 अगस्त 1947 को देश आजाद हुआ, लेकिन उस समय भारत कई छोटी-बड़ी रियासतों में बंटा हुआ था। इन रियासतों को एक देश के रूप में जोड़ना बहुत बड़ी चुनौती थी। सरदार पटेल ने अपनी सूझबूझ, बातचीत और मजबूत फैसलों से 560 से अधिक रियासतों को भारतीय संघ में शामिल कराने में अहम भूमिका निभाई। इस काम में वीपी मेनन ने भी उनका सहयोग किया। इसी योगदान के कारण उन्हें भारत का लौह पुरुष और आधुनिक भारत का शिल्पकार कहा जाता है। स्वतंत्र भारत में वह देश के पहले Deputy Prime Minister और पहले Home minister बने। उन्होंने प्रशासन को मजबूत बनाने और देश में एकता बनाए रखने के लिए भी महत्वपूर्ण काम किए।
रियासतों को जोड़कर बनाया मजबूत भारत
सरदार पटेल का निधन 15 दिसंबर 1950 को मुंबई में हुआ था, लेकिन उनके विचार और देश के लिए किए गए काम आज भी लोगों को प्रेरित करते हैं। गुजरात में नर्मदा नदी के किनारे उनकी याद में Statue of Unity बनाया गया है। इसकी ऊंचाई 182 मीटर है और यह दुनिया की सबसे ऊंची मूर्ति है। इसका उद्घाटन 31 अक्टूबर 2018 को किया गया था। हर साल 31 अक्टूबर को राष्ट्रीय एकता दिवस मनाया जाता है। इस दिन देशभर में Run for Unity सहित कई कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। इन कार्यक्रमों का उद्देश्य लोगों को एकता, भाईचारे और देश की अखंडता का संदेश देना है। सरदार पटेल का जीवन हमें सिखाता है कि मजबूत इरादों, मेहनत और एकजुटता से बड़ी से बड़ी मुश्किल का सामना किया जा सकता है। देश को एकजुट करने में उनका योगदान भारतीय इतिहास में हमेशा याद रखा जाएगा।
Location : New Delhi
Published : 31 October 2026, 10:19 AM IST