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इसरो में निजीकरण का खौफ (Img: X)
Bengaluru: भारत के स्पेस मिशन में प्राइवेट कंपनियों की बढ़ती भूमिका के बीच, ISRO के कर्मचारियों ने अपनी चिंताएं जाहिर की हैं। ISRO के हजारों कर्मचारियों का प्रतिनिधित्व करने वाले नौ संगठनों ने स्पेस एजेंसी के कामकाज में हो रहे बदलावों पर सवाल उठाए हैं। कर्मचारियों ने ISRO चेयरमैन वी. नारायणन को पत्र लिखकर सरकारी नीति और ISRO के भविष्य के बारे में स्पष्टता मांगी है।
कर्मचारी संगठनों की मुख्य चिंता रॉकेट बनाने और लॉन्च करने से जुड़ी है। उनका कहना है कि स्पेस सेक्टर में प्राइवेट कंपनियों को काम करने की इजाज पूरी तरह गलत नहीं है, लेकिन इससे ISRO की मुख्य भूमिका कमज़ोर नहीं होनी चाहिए।
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कर्मचारियों के अनुसार, रॉकेट के डिजाइन और मैन्युफैक्चरिंग से लेकर असेंबली, टेस्टिंग और लॉन्चिंग तक की पूरी प्रक्रिया ISRO की एक अहम क्षमता है। इसे सिर्फ एक आम मैन्युफैक्चरिंग का काम समझना गलत होगा।
कर्मचारियों ने IN-SPACe के चेयरमैन पवन कुमार गोयनका के हालिया बयान का भी जिक्र किया। उनके अनुसार, गोयनका ने कहा था कि भविष्य में ISRO खुद लॉन्च व्हीकल नहीं बनाएगा; इसके बजाय यह जिम्मेदारी प्राइवेट कंपनियों या पब्लिक सेक्टर अंडरटेकिंग्स (PSUs) को सौंपी जा सकती है। यह बदलाव SSLV के साथ शुरू हो चुका है और भविष्य में PSLV और LVM3 तक भी फैल सकता है। इसलिए कर्मचारी संगठनों ने सरकार से पूछा है कि क्या यह आधिकारिक नीति है।
पत्र में लगभग 120 ऐसी टेक्नोलॉजी का भी जिक्र है जिन्हें ISRO पहले ही प्राइवेट सेक्टर को ट्रांसफर कर चुका है। कर्मचारियों का तर्क है कि ISRO की टेक्नोलॉजी और सुविधाएं राष्ट्रीय संपत्ति हैं; इसलिए उन्हें प्राइवेट सेक्टर को ट्रांसफर करने की प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी होनी चाहिए।
कर्मचारियों को डर है कि अगर रॉकेट और सैटेलाइट बनाने का काम बड़े पैमाने पर प्राइवेट कंपनियों को आउटसोर्स किया गया, तो ISRO के अंदर काम का बोझ कम हो सकता है। इसका असर मौजूदा कर्मचारियों और भविष्य में होने वाली सरकारी भर्तियों, दोनों पर पड़ सकता है।
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नौ संगठनों ने साफ किया है कि वे प्राइवेट सेक्टर के खिलाफ नहीं हैं। उनकी बस यही मांग है कि सरकार ISRO की भूमिका, कर्मचारियों के भविष्य और नई नीति के बारे में लिखित रूप में अपनी स्थिति स्पष्ट करे। कर्मचारी यूनियन जवाब मिलने के बाद ही आगे की कार्रवाई के बारे में फैसला करेगी।
Location : Bengaluru
Published : 6 September 2026, 11:46 AM IST
Topics : IN SPACe ISRO ISRO unions