सावधान! न बैंक ट्रांसफर, न QR कोड और 83 करोड़ गायब; साइबर फ्रॉड के इस नए तरीके से पुलिस भी हैरान

द्वारका पुलिस ने ₹83 करोड़ के साइबर फ्रॉड मामले में छह आरोपियों को गिरफ्तार कर तिहाड़ जेल भेज दिया है। जांच में ठगी की रकम को चेक के जरिए निकालने और एक कंपनी के खाते में जमा करने का तरीका सामने आया है।

Post Published By: Komal Chauhan
Updated : 6 September 2026, 12:07 PM IST
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New Delhi: दिल्ली के द्वारका जिला पुलिस की स्पेशल स्टाफ टीम ने करीब ₹83 करोड़ के साइबर फ्रॉड मामले में बड़ी कार्रवाई की है। पुलिस ने इस मामले में छह आरोपियों को गिरफ्तार किया है। सभी आरोपियों को पूछताछ के बाद अदालत में पेश किया गया, जहां से उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। सभी आरोपी अब तिहाड़ जेल में हैं। पुलिस की जांच में साइबर ठगी की रकम को बैंक खातों से निकालने और उसे दूसरे खातों में पहुंचाने के तरीके का भी पता चला है।

मुंबई और दिल्ली समेत कई जगहों पर छापेमारी

पुलिस ने इस मामले की जांच के दौरान दिल्ली और मुंबई के एयरपोर्ट समेत कई स्थानों पर छापेमारी की। लगातार कार्रवाई के बाद पुलिस टीम आरोपियों तक पहुंचने में सफल रही। अधिकारियों के मुताबिक, गिरोह के सदस्यों से पूछताछ में साइबर ठगी से जुड़े पैसों के लेन-देन और रकम को निकालने के तरीके के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी मिली है।

जांच में सामने आया कि आरोपी साइबर फ्रॉड से हासिल रकम को सीधे दूसरे बैंक खातों में ट्रांसफर करने के बजाय अलग तरीके से निकालते थे। इससे रकम के लेन-देन की असली कड़ी को छिपाने की कोशिश की जाती थी।

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चेक के जरिए बैंक खातों से निकाली रकम

पुलिस के अनुसार, गिरोह साइबर ठगी से मिली रकम को चेक के माध्यम से बैंक खातों से निकालता था। इसके बाद यह पैसा एक कंपनी के बैंक खाते में जमा किया जाता था। इस खाते का इस्तेमाल मर्चेंट अकाउंट के रूप में किया जा रहा था।

पुलिस का कहना है कि संबंधित कंपनी का बैंक खाता भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के पास भी पंजीकृत था। जांच एजेंसियों के मुताबिक, चेक के जरिए रकम निकालने का एक प्रमुख मकसद बैंक से बैंक होने वाले सीधे लेन-देन की कड़ी को तोड़ना था। इससे ठगी की रकम के स्रोत और उसके आगे जाने का पता लगाना मुश्किल हो सकता था।

109 चेकबुक बरामद

पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से कुल 109 चेकबुक बरामद की हैं। इनमें से करीब 80 चेकबुक का इस्तेमाल साइबर फ्रॉड की रकम निकालने में किया गया था। बरामद चेकबुक और बैंक खातों से जुड़े दस्तावेजों की पुलिस जांच कर रही है। अधिकारियों को उम्मीद है कि इन दस्तावेजों और बैंक लेन-देन की जांच से साइबर ठगी के पूरे नेटवर्क और पैसों की आवाजाही से जुड़ी और जानकारी सामने आ सकती है।

माही इनोवेटिव सॉल्यूशंस का इस्तेमाल

पुलिस जांच में माही इनोवेटिव सॉल्यूशंस प्राइवेट लिमिटेड का नाम भी सामने आया है। बताया गया है कि यह कंपनी भारतीय फिनटेक और डिजिटल सर्विस के क्षेत्र में काम करती थी और चार साल से अधिक समय से सक्रिय थी।

पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि कंपनी के बैंक खाते का इस्तेमाल किस तरह किया जा रहा था और साइबर फ्रॉड की रकम को उसमें जमा करने के पीछे आरोपियों की क्या भूमिका थी।

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इंस्पेक्टर कमलेश कुमार की टीम ने की कार्रवाई

द्वारका के डीसीपी कुशल पाल सिंह के मुताबिक, यह कार्रवाई स्पेशल स्टाफ के इंस्पेक्टर कमलेश कुमार के नेतृत्व में की गई। टीम की निगरानी एसीपी ऑपरेशंस सुभाष मलिक कर रहे थे। पुलिस टीम ने जांच के दौरान अलग-अलग स्थानों पर दबिश देकर छह आरोपियों को गिरफ्तार किया।

सभी आरोपियों को अदालत में पेश करने के बाद न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। पुलिस अब मामले से जुड़े अन्य लोगों और साइबर ठगी के नेटवर्क की कड़ियों की जांच कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि बैंक खातों, चेकबुक और पैसों के लेन-देन की जांच से इस मामले में आगे और खुलासे हो सकते हैं।

Location :  New Delhi

Published :  6 September 2026, 12:07 PM IST

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