जंग का असर भारत तक, मोदी सरकार ने जमाखोरी और सप्लाई संकट पर कसा शिकंजा, मंत्रियों संग बनाई बड़ी रणनीति

पश्चिम एशिया में जारी युद्ध और बढ़ते तनाव के बीच भारत सरकार पूरी तरह अलर्ट मोड में आ गई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 22 मार्च 2026 को कैबिनेट की सुरक्षा मामलों की समिति की बैठक में पेट्रोलियम, गैस, ऊर्जा, खाद, लॉजिस्टिक्स और जरूरी वस्तुओं की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने पर जोर दिया।

Post Published By: Mayank Tawer
Updated : 23 March 2026, 4:28 AM IST
google-preferred

New Delhi: ईरान, इजरायल और अमेरिका के बीच खिंचते टकराव ने अब भारत सरकार की चिंता भी साफ तौर पर बढ़ा दी है। पश्चिम एशिया में बिगड़ते हालात को देखते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार, 22 मार्च 2026 को कैबिनेट की सुरक्षा मामलों की समिति यानी CCS की अहम बैठक की अध्यक्षता की। बैठक का फोकस साफ था—अगर यह युद्ध और लंबा खिंचता है, तो भारत में पेट्रोलियम, गैस, खाद, ऊर्जा, लॉजिस्टिक्स और जरूरी सामानों की सप्लाई पर असर न पड़े। सरकार ने हालात की गंभीरता को देखते हुए साफ निर्देश दिया कि आम लोगों तक जरूरी चीजें बिना रुकावट पहुंचनी चाहिए और किसी भी तरह की घबराहट या सप्लाई चेन टूटने की नौबत नहीं आनी चाहिए।

मोदी ने मंत्रियों से कहा, सप्लाई चेन किसी हाल में नहीं टूटनी चाहिए

बैठक में प्रधानमंत्री ने मौजूदा वैश्विक हालात और उनके भारत पर पड़ने वाले असर की विस्तार से समीक्षा की। आधिकारिक जानकारी के मुताबिक उन्होंने संबंधित मंत्रालयों से कहा कि पेट्रोलियम पदार्थों, गैस, ऊर्जा, खाद और दूसरी आवश्यक वस्तुओं की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित की जाए। साथ ही वितरण तंत्र, लॉजिस्टिक नेटवर्क और स्टॉक पोजिशन को मजबूत बनाए रखने पर भी जोर दिया गया। बैठक में कैबिनेट सचिव ने वैश्विक स्थिति, अलग-अलग मंत्रालयों द्वारा अब तक उठाए गए कदमों और आगे की योजना पर प्रस्तुति दी। सरकार ने यह भी माना कि युद्ध का असर कृषि, खाद्य सुरक्षा, ऊर्जा, जहाजरानी, निर्यात, व्यापार, एमएसएमई और समूची अर्थव्यवस्था तक महसूस किया जा सकता है, इसलिए पहले से तैयारी जरूरी है।

फरसा वाले बाबा की मौत के बाद मथुरा की सड़कों पर तांडव, 23 पुलिसकर्मी घायल, अब तक 20 को भेजा जेल और 300 लोग…

जमाखोरी रोकने से लेकर खाद की उपलब्धता तक बना प्लान

बैठक में खास तौर पर खाद्य, ईंधन और ऊर्जा सुरक्षा पर चर्चा हुई। प्रधानमंत्री ने साफ निर्देश दिया कि कालाबाजारी और जमाखोरी रोकने के लिए राज्य सरकारों के साथ बेहतर तालमेल रखा जाए। खरीफ सीजन को देखते हुए उर्वरकों की उपलब्धता और किसानों पर संभावित असर का भी आकलन किया गया। सरकार ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में बनाए गए स्टॉक से मदद मिलेगी, लेकिन आगे के लिए उर्वरकों के वैकल्पिक स्रोतों पर भी काम तेज किया जाएगा। साथ ही बिजली संयंत्रों में कोयले की पर्याप्त उपलब्धता बनाए रखने पर भी जोर दिया गया, ताकि देश में बिजली संकट जैसी स्थिति न बनने पाए।

महराजगंज में सरकार के 9 साल का रिपोर्ट कार्ड, डीएम ने गिनाईं किसानों समेत ये उपलब्धियां

आयात के नए रास्ते, निर्यात के नए बाजार और कूटनीतिक दबाव

बैठक में केमिकल्स, फार्मास्यूटिकल्स, पेट्रोकैमिकल्स और दूसरे औद्योगिक क्षेत्रों के लिए आयात स्रोतों में विविधता लाने पर चर्चा हुई। इसके साथ भारतीय उत्पादों के लिए नए निर्यात गंतव्य विकसित करने की बात भी सामने आई। आधिकारिक स्तर पर यह भी स्पष्ट है कि भारत सिर्फ घरेलू तैयारी ही नहीं कर रहा, बल्कि कूटनीतिक मोर्चे पर भी सक्रिय है। विदेश मंत्रालय के आधिकारिक ब्रीफिंग में यह पुष्टि हुई है कि प्रधानमंत्री मोदी ने ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन से बात की थी, जबकि विदेश मंत्री एस. जयशंकर भी लगातार संपर्क में हैं। कुल मिलाकर संदेश साफ है- भारत युद्ध को अपने बाजार, किसानों और आम उपभोक्ताओं तक बड़ा झटका बनने से पहले ही रोकथाम की रणनीति पर काम कर रहा है।

Location : 
  • New Delhi

Published : 
  • 23 March 2026, 4:28 AM IST

Advertisement