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दिल्ली AIIMS में 32 वर्षीय हरीश राणा, जो 13 साल से पर्मानेंट वेजिटेटिव स्टेट में थे, के लिए सुप्रीम कोर्ट की अनुमति से इच्छामृत्यु प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। डॉक्टरों ने लाइफ सपोर्ट, वेंटिलेटर और फीडिंग ट्यूब हटा दिए हैं, और अब हरीश को नॉर्मल बेड पर रखा गया है।
हरीश राणा
New Delhi: दिल्ली AIIMS में 32 वर्षीय हरीश राणा के लिए सुप्रीम कोर्ट की अनुमति से इच्छामृत्यु प्रक्रिया जारी है। आपको बता दें कि हरीश राणा 13 साल से परमानेंट वेजिटेटिव स्टेट में थे। साल 2013 में चंडीगढ़ में चौथी मंजिल से गिरने से उनका ब्रेन गंभीर रूप से प्रभावित हुआ था। सुप्रीम कोर्ट ने 11 मार्च को पैसिव इच्छामृत्यु की अनुमति दी।
इसके बाद 14 मार्च को उन्हें गाजियाबाद से दिल्ली AIIMS के पेलिएटिव केयर यूनिट में भर्ती कराया गया। डॉक्टरों ने लाइफ सपोर्ट सिस्टम, वेंटिलेटर, फीडिंग ट्यूब सब हटा दिए। अब हरीश को नॉर्मल बेड पर रखा गया है। प्रक्रिया धीरे-धीरे चल रही है, ताकि मौत प्राकृतिक और बिना किसी दर्द के हो।
AIIMS के डॉक्टरों ने खाना-पानी पूरी तरह बंद कर दिया है। ब्लड सैंपल भी अब नहीं लिए जा रहे। यह प्रक्रिया 1-2 हफ्ते या इससे ज्यादा समय ले सकती है। हरीश की बॉडी अब बिना किसी बाहरी मदद के जो समय तक चलेगी। परिवार से मिलने की अनुमति भी कम या बंद कर दी गई है। डॉक्टर कहते हैं कि यह सब दर्द रहित तरीके से हो रहा है।
AIIMS की टीम, खासकर पेलिएटिव मेडिसिन और एनेस्थीसिया विभाग की हेड डॉक्टर सीमा मिश्रा के नेतृत्व में 10 डॉक्टरों का स्पेशल बोर्ड हरीश पर नजर रखे हुए है। डॉक्टरों में सबसे बड़ी चिंता यह है कि हरीश को किसी भी तरह का दर्द न हो। टीम हर पल सतर्क है क्योंकि स्थिति बहुत संवेदनशील है।
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डॉक्टरों को डर है कि प्रक्रिया में कोई तकलीफ न हो, इसलिए वे पूरी सावधानी बरत रहे हैं। प्रक्रिया में कुल 2-3 हफ्ते लग सकते हैं। अभी कोई चमत्कार नहीं हुआ, न ही मौत हुई है। अंगदान की बात भी परिवार से चल रही है।