देवघर की उस धरती का राज, जहां अंग्रेजों ने तीन क्रांतिकारियों को दी थी फांसी

देवघर के रोहिणी गांव ने 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। अमानत अली, सलामत अली और शेख हारून ने अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ संघर्ष करते हुए 16 जून 1857 को शहादत दी। आज भी उनका बलिदान देशभक्ति और स्वतंत्रता संग्राम की प्रेरणा बना हुआ है।

Post Published By: Poonam Rajput
Updated : 16 June 2026, 7:06 PM IST
google-preferred

Deoghar: बाबा बैद्यनाथ की नगरी देवघर देशभर में आस्था और अध्यात्म के केंद्र के रूप में प्रसिद्ध है, लेकिन इस धरती का एक गौरवशाली अध्याय स्वतंत्रता संग्राम से भी जुड़ा है। देवघर के रोहिणी गांव ने 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम में अंग्रेजी हुकूमत को चुनौती देकर इतिहास रचा था। यहां के तीन वीर सपूत अमानत अली, सलामत अली और शेख हारून ने ब्रिटिश शासन के खिलाफ आवाज उठाकर आजादी की लड़ाई में अपने प्राण न्योछावर कर दिए।

शहादत दिवस पर वीरों को दी गई श्रद्धांजलि

रोहिणी में आयोजित शहादत दिवस समारोह में जिला प्रशासन, पुलिस प्रशासन, जनप्रतिनिधियों और स्थानीय लोगों ने अमर शहीदों को श्रद्धासुमन अर्पित किए। इस अवसर पर उनके बलिदान को याद करते हुए लोगों ने देश की स्वतंत्रता के लिए दिए गए उनके योगदान को नमन किया। कार्यक्रम ने नई पीढ़ी को इतिहास से जोड़ने का संदेश भी दिया।

जब रोहिणी से उठी थी विद्रोह की चिंगारी

वर्ष 1857 में अंग्रेजों की दमनकारी नीतियों के खिलाफ पूरे देश में असंतोष फैल रहा था। इसी दौरान संताल परगना के रोहिणी क्षेत्र में भी विद्रोह की लहर उठी। अमानत अली, सलामत अली और शेख हारून ने अंग्रेजी सत्ता के खिलाफ संघर्ष का बिगुल फूंका। उनकी इस साहसिक पहल ने साबित कर दिया कि आजादी की चाह केवल बड़े शहरों तक सीमित नहीं थी, बल्कि गांवों और कस्बों में भी लोगों के दिलों में स्वतंत्रता की ज्वाला जल रही थी।

deoghar

रोहिणी में आयोजित शहादत दिवस समारोह (Img: Dynamite News)

फांसी देकर दबाने की कोशिश, लेकिन अमर हो गया बलिदान

अंग्रेजी प्रशासन ने तीनों क्रांतिकारियों को गिरफ्तार कर लिया और 16 जून 1857 को रोहिणी में सार्वजनिक रूप से फांसी दे दी। अंग्रेजों को उम्मीद थी कि इस कठोर सजा से विद्रोह की आवाज थम जाएगी, लेकिन उनकी शहादत ने स्वतंत्रता आंदोलन को नई प्रेरणा दी। आज 169 वर्ष बाद भी उनके बलिदान की गाथा लोगों को प्रेरित कर रही है।

देवघर में मंत्री के बयान पर सियासी तूफान: SIR, मीडिया और EVM कांड पर बड़ा बवाल, जानिये पूरा मामला

पहचान की प्रतीक्षा में ऐतिहासिक रोहिणी

देवघर मुख्यालय से कुछ दूरी पर स्थित रोहिणी आज एक सामान्य ग्रामीण क्षेत्र के रूप में नजर आता है, लेकिन इसकी पहचान स्वतंत्रता संग्राम के महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में है। दुर्भाग्यवश राष्ट्रीय स्तर पर इस ऐतिहासिक विरासत को वह सम्मान नहीं मिल पाया, जिसकी यह हकदार है।

Deoghar: अब देवघर में बच्चों को नशे से ऐसे रखा जाएगा दूर, शुरू हुआ बड़ा अभियान

नई पीढ़ी को इतिहास से जोड़ने की जरूरत

विशेषज्ञों का मानना है कि अमानत अली, सलामत अली और शेख हारून की शहादत की कहानी को स्कूलों, कॉलेजों और सार्वजनिक मंचों तक पहुंचाया जाना चाहिए। इतिहास तभी जीवित रहता है, जब समाज उसे याद रखे। रोहिणी के तीनों वीर आज भी देशभक्ति, साहस और बलिदान की मिसाल बने हुए हैं।

Location :  Deoghar

Published :  16 June 2026, 7:06 PM IST

Advertisement