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राउज एवेन्यू कोर्ट के फैसले ने सियासत में हलचल मचा दी। शराब नीति केस में सबूत न मिलने पर अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया बरी। जेल, साजिश और सत्ता की जंग के बीच अब सामने आया चौंकाने वाला सच।
भावुक हुए अरविंद केजरीवाल (Img- Internet)
New Delhi: दिल्ली से इस वक्त की सबसे बड़ी खबर सामने आ रही है, जहां शराब नीति घोटाले से जुड़े सीबीआई के एक मामले में राउज ऐवन्यू कोर्ट ने दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया समेत कई आरोपियों को बरी कर दिया।
बता दें कि राउज ऐवन्यू कोर्ट ने कहा कि अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया के खिलाफ कोई सबूत नहीं मिला। जिसके चलते उन्हें बरी कर दिया गया । कोर्ट के फैसले के बाद मीडिया से बात करते हुए केजरीवाल भावुक हो गए और कहा कि सत्ता हथियाने के लिए मेरे खिलाफ साजिश हुई और भ्रष्टाचार के आरोप लगाकर मुझे 6 महीने जेल में डाल दिया गया।
AAP को खत्म करने की साजिश-केजरीवाल
केजरीवाल ने आगे कहा, हमारे खिलाफ षड्यंत्र रचा गया और AAP को खत्म करने की साजिश हुई। उन्होंने कहा कि अब जनता के सामने सच आ गया है।
कोर्ट के फैसले के बाद अरविंद केजरीवाल की पत्नी सुनीता केजरीवाल ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि आज सच की जीत हुई है।
इस संसार में कोई कितना भी शक्तिशाली हो जाये,शिव शक्ति से ऊपर नहीं हो सकता । सच की हमेशा जीत होती है ।
— Sunita Kejriwal (@KejriwalSunita) February 27, 2026
क्या बोलीं सुनीता केजरीवाल
सुनीता केजरीवाल ने एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा, "इस संसार में कोई कितना भी शक्तिशाली हो जाये, शिव-शक्ति से ऊपर नहीं हो सकता । सच की हमेशा जीत होती है।"
स्पेशल जज जितेन्द्र सिंह ने अपने आदेश में कहा कि मामले में किसी भी तरह की ओवरऑल साजिश या आपराधिक मंशा (क्रिमिनल इंटेंट) के ठोस प्रमाण नहीं मिले। अदालत ने स्पष्ट किया कि प्रस्तुत साक्ष्यों और गवाहों के बयानों से आरोपों की पुष्टि नहीं होती। कोर्ट ने कहा कि विस्तृत आरोपपत्र में कई कमियां हैं, जिनका समर्थन किसी ठोस सबूत से नहीं किया गया।
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अदालत ने जांच एजेंसी CBI की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए। जज ने कहा कि निष्पक्ष जांच के बिना निष्पक्ष ट्रायल संभव नहीं है। कोर्ट के अनुसार, इस मामले में जांच उस स्तर की नहीं पाई गई, जिसकी अपेक्षा की जाती है। अदालत ने टिप्पणी की कि एजेंसी उचित, तार्किक और निष्पक्ष जांच करने में असफल रही है।
कोर्ट ने कहा कि पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया के खिलाफ कोई प्राइमा फेसी मामला नहीं बनता। अभियोजन पक्ष अपने आरोपों को साबित करने में असफल रहा। अदालत ने साफ शब्दों में कहा कि लगाए गए आरोपों में दम नहीं है और किसी आपराधिक षड्यंत्र का ठोस आधार सामने नहीं आया। इस फैसले से सिसोदिया को बड़ी राहत मिली है।
अदालत ने यह भी टिप्पणी की कि मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को बिना किसी ठोस सामग्री के आरोपित किया गया। कोर्ट के अनुसार, उनके खिलाफ पेश किए गए आरोपों का कोई ठोस आधार नहीं था।
इस मामले में पहले CBI ने कथित अनियमितताओं को लेकर केस दर्ज किया था। बाद में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपों के तहत कार्रवाई शुरू की। इस दौरान आम आदमी पार्टी के कई नेताओं को जेल जाना पड़ा और कई जमानत याचिकाएं खारिज हुईं, हालांकि बाद में कुछ मामलों में राहत मिली।
जांच एजेंसी ने संकेत दिए हैं कि वह इस फैसले से संतुष्ट नहीं है। CBI के वकीलों ने कहा है कि आदेश का विस्तृत अध्ययन करने के बाद इसे हाईकोर्ट में चुनौती दी जा सकती है।
फैसले के बाद मनीष सिसोदिया ने कहा, “आज एक बार फिर देश के संविधान पर गर्व हो रहा है। सत्य की जीत हुई है।”
पूरा मामला 2022-23 की दिल्ली एक्साइज पॉलिसी से जुड़ा था, जिसे आम आदमी पार्टी सरकार के कार्यकाल में लागू किया गया था। सीबीआई ने कथित अनियमितताओं और भ्रष्टाचार के आरोपों के आधार पर मामला दर्ज किया था। बाद में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने भी मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपों की जांच शुरू की। इस दौरान कई नेताओं को जेल जाना पड़ा और लंबी कानूनी प्रक्रिया चली।