हाल ही में एक सरकारी मंच पर दोनों नेता साथ दिखाई दिए और सार्वजनिक रूप से एकजुटता का संकेत देने की कोशिश की। हालांकि, इसी कार्यक्रम में जब शिवकुमार ने सोनिया गांधी के 2004 वाले ‘त्याग’ की सराहना करते हुए टिप्पणी की, तो उसे सिद्धारमैया पर परोक्ष निशाना माना गया। इसके बाद राज्य की राजनीति में तनाव की हलचल एक बार फिर तेज हो गई।
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