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धमतरी जिले के एक शासकीय माध्यमिक विद्यालय में 35 बच्चों द्वारा खुद को ब्लेड और पिन से घायल करने की घटना ने सभी को चौंका दिया है। प्रशासन ने मामले की जांच शुरू कर दी है और काउंसलिंग के जरिए कारण जानने की कोशिश की जा रही है। कलेक्टर ने दोषियों पर सख्त कार्रवाई का आश्वासन दिया है।
प्रतीकात्मक तस्वीर (Img: Google)
Dhamtari: छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले में स्थित कुरूद ब्लॉक के दहदहा गांव के एक शासकीय माध्यमिक विद्यालय में चौंकाने वाली घटना सामने आई है। यहां कक्षा 6वीं से 8वीं तक के 35 विद्यार्थियों ने अपने हाथों को ब्लेड, पिन और कांटों से काट लिया।
दरअसल, 18 फरवरी को जब स्कूल प्रबंधन की नजर बच्चों के हाथों पर पड़ी, तो कई छात्रों के हाथों में गहरे कट के निशान देखे गए। इसके बाद तत्काल डॉक्टरों की टीम बुलाकर सभी बच्चों की स्वास्थ्य जांच कराई गई।
विद्यालय के प्राचार्य पुनीत राम साहू ने बताया कि मामले की जानकारी मिलते ही उच्च अधिकारियों को सूचित कर दिया गया था। शुरुआती जानकारी के अनुसार, कुछ बच्चों ने यह कदम एक-दूसरे को देखकर उठाया। हालांकि, यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि इसके पीछे कोई बाहरी दबाव था या यह आपसी प्रभाव का नतीजा था।
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प्राचार्य का कहना है कि कई बच्चों ने यह भी बताया कि उन्होंने यह हरकत घर पर की थी, लेकिन अभिभावकों ने इस दावे पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि बच्चों का व्यवहार घर में सामान्य रहता है और ऐसी घटना स्कूल की निगरानी व्यवस्था पर प्रश्न खड़े करती है।
घटना की गंभीरता को देखते हुए धमतरी कलेक्टर अबिनाश मिश्रा ने मामले में संज्ञान लिया है। उन्होंने कहा कि प्रारंभिक जांच शुरू कर दी गई है और अनुविभागीय दंडाधिकारी (एसडीएम) को विस्तृत जांच के निर्देश दिए गए हैं। कलेक्टर ने स्पष्ट किया कि अगर किसी ने बच्चों को उकसाया है या प्रेरित किया है, तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
स्कूल पहुंची चिकित्सकों की टीम ने बच्चों के घावों का परीक्षण किया। अधिकांश घाव सतही बताए जा रहे हैं, लेकिन कुछ बच्चों के हाथों पर गहरे निशान भी मिले हैं। प्रशासन ने एहतियातन सभी बच्चों की काउंसलिंग शुरू कर दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस उम्र के बच्चों में समूह प्रभाव (Peer Pressure) तेजी से काम करता है, जिससे वे बिना परिणाम सोचे ऐसे कदम उठा सकते हैं।
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घटना के बाद अभिभावकों में चिंता का माहौल है। कई अभिभावकों ने स्कूल में सुरक्षा और निगरानी व्यवस्था को मजबूत करने की मांग की है। उनका कहना है कि बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है।
प्रशासन ने आश्वासन दिया है कि जांच पूरी होने के बाद ही वास्तविक कारण सामने आएंगे और दोषियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल, पूरे मामले की गहनता से पड़ताल की जा रही है।