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मोदी की Global Diplomacy का दिखा असर (Source: Pinterest)
New Delhi: दिल्ली इन दिनों दुनिया की कूटनीति का प्रमुख केंद्र बनी हुई है। BRICS Summit 2026 के लिए दुनिया के कई बड़े नेता भारत पहुंच रहे हैं और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ उनकी लगातार द्विपक्षीय बैठकें हो रही हैं। रूस, चीन और ईरान से लेकर खाड़ी, अफ्रीका और दक्षिण-पूर्व एशिया तक इन मुलाकातों के जरिए भारत अलग-अलग क्षेत्रों में अपनी रणनीतिक पहुंच मजबूत करता दिखाई दे रहा है।
11 सितंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ मुलाकात प्रस्तावित है। रूस लंबे समय से भारत का रणनीतिक साझेदार रहा है। दोनों नेताओं की बातचीत में रक्षा, ऊर्जा, परमाणु सहयोग, अंतरिक्ष और यूरेशियाई क्षेत्र से जुड़े मुद्दे अहम हो सकते हैं।
रूस और पश्चिम के बीच जारी तनाव के बीच भारत का मॉस्को के साथ लगातार संवाद उसकी स्वतंत्र विदेश नीति को भी रेखांकित करता है।
प्रधानमंत्री मोदी ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन और संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस से भी मुलाकात करेंगे। ईरान के साथ बातचीत भारत के लिए पश्चिम एशिया, ऊर्जा सुरक्षा और चाबहार बंदरगाह जैसे संपर्क प्रोजेक्ट्स के लिहाज से महत्वपूर्ण है।
वहीं, संयुक्त राष्ट्र महासचिव के साथ बातचीत वैश्विक संस्थाओं में सुधार और विकासशील देशों की भूमिका से जुड़े मुद्दों पर भारत के रुख को सामने रखने का अवसर देगी।
12 सितंबर को भारत की कूटनीतिक सक्रियता और व्यापक होगी। इथियोपिया के प्रधानमंत्री अबीय अहमद अली, मलेशिया के प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम, अबू धाबी के क्राउन प्रिंस शेख खालिद बिन मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान और वियतनाम के प्रधानमंत्री ले मिन्ह हंग के साथ बातचीत होगी।
इन बैठकों के जरिए भारत अफ्रीका, ASEAN, खाड़ी और हिंद-प्रशांत क्षेत्र के साथ अपने संबंधों को आगे बढ़ाने पर जोर देगा। खासकर मलेशिया और वियतनाम के साथ रिश्ते हिंद-प्रशांत और समुद्री सहयोग के लिहाज से महत्वपूर्ण हैं।
12 सितंबर को प्रधानमंत्री मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की बैठक पर खास नजर रहेगी। भारत और चीन के बीच सीमा विवाद तथा रणनीतिक प्रतिस्पर्धा के बावजूद दोनों देशों के शीर्ष नेतृत्व का संवाद जारी रहना महत्वपूर्ण है।
यह बैठक इस बात का संकेत मानी जा सकती है कि भारत प्रतिस्पर्धा के बीच भी संवाद के रास्ते खुले रखना चाहता है।
13 सितंबर को कजाखस्तान, फिलीपींस, मिस्र और दक्षिण अफ्रीका के नेताओं के साथ प्रधानमंत्री मोदी की बातचीत होगी। कजाखस्तान मध्य एशिया में भारत की पहुंच के लिए अहम है, जबकि फिलीपींस हिंद-प्रशांत और समुद्री सहयोग के लिहाज से महत्वपूर्ण है।
मिस्र भारत के लिए पश्चिम एशिया और अफ्रीका के बीच संपर्क का अहम साझेदार है। वहीं दक्षिण अफ्रीका के साथ बातचीत ग्लोबल साउथ और भारत-अफ्रीका साझेदारी को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण होगी।
बुरुंडी, नाइजीरिया और युगांडा के शीर्ष नेतृत्व के साथ बातचीत भी भारत की अफ्रीका नीति के बढ़ते दायरे को दिखाती है। कुल मिलाकर BRICS Summit के दौरान मोदी की बैठकों की यह श्रृंखला बताती है कि भारत रूस और चीन जैसी बड़ी शक्तियों के साथ संवाद बनाए रखते हुए खाड़ी, अफ्रीका, मध्य एशिया और हिंद-प्रशांत में भी अपनी पहुंच मजबूत करने की कोशिश कर रहा है।
Location : New Delhi
Published : 11 September 2026, 2:50 PM IST