3 लाख का iPhone Duo: ऐपल की जेब में जा रहा सारा पैसा या सरकारी टैक्स का है खेल? जानिए पूरा गणित

भारत में ऐपल के पहले फोल्डेबल फोन iPhone Duo की 3 लाख रुपये कीमत पर छिड़ी बहस। जानिए अमेरिका और भारत के रेट में भारी अंतर, इंपोर्ट टैक्स, जीएसटी का गणित और यह क्यों भारत के बजाय चीन या वियतनाम में बना है।

Post Published By: Tanya Chand
Updated : 11 September 2026, 2:50 PM IST
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New Delhi: ऐपल के पहले फोल्डेबल स्मार्टफोन 'iPhone Duo' के बाजार में उतरते ही इसकी आसमान छूती कीमत को लेकर चर्चा गर्म हो गई है। भारत में 3 लाख रुपये की शुरुआती कीमत देखकर लोग ऐपल को जमकर कोस रहे हैं।

सोशल मीडिया पर सवाल उठाए जा रहे हैं कि जब भारत में आईफोन की मैन्युफैक्चरिंग हो रही है, तो यह फोन इतना महंगा क्यों है? लेकिन ऐपल पर भड़ास निकालने से पहले इसके पीछे के भारी-भरकम टैक्स स्ट्रक्चर और विदेशी इंजीनियरिंग को समझना बेहद जरूरी है।

अमेरिका और भारत की कीमत में अंतर की वजह

अमेरिका में iPhone Duo की शुरुआती कीमत 1,999 डॉलर रखी गई है, जिसमें वहां का स्थानीय टैक्स शामिल नहीं होता क्योंकि अमेरिका के हर राज्य में टैक्स दरें अलग-अलग हैं। वहीं भारत में तय की गई 2,99,900 रुपये की कीमत में सरकारी टैक्स, इंपोर्ट ड्यूटी और करेंसी में होने वाले उतार-चढ़ाव का मार्जिन पहले से जुड़ा होता है।

3 लाख की कीमत में कितना है टैक्स का हिस्सा?

iPhone Duo पूरी तरह से बना-बनाया विदेश से भारत आता है। इसकी मूल लैंडिंग कीमत लगभग 1.90 लाख रुपये है। इस पर 15 फीसदी यानी करीब 28,500 रुपये की बेसिक कस्टम ड्यूटी लगती है। इसके ऊपर कस्टम ड्यूटी का 10 फीसदी (करीब 2,850 रुपये) सोशल वेलफेयर सरचार्ज जुड़ता है, जिससे फोन की कीमत 2.21 लाख रुपये के पार पहुंच जाती है।

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इसके बाद 18 फीसदी जीएसटी का करीब 39,856 रुपये जुड़ता है। इस तरह रिटेल स्टोर तक पहुंचने से पहले ही फोन पर लगभग 71,200 रुपये सिर्फ टैक्स का लग चुका होता है। बाकी का हिस्सा करेंसी फ्लक्चुएशन और रिटेल मार्जिन को ध्यान में रखकर तय किया जाता है।

'मेड इन इंडिया' क्यों नहीं बन सका आईफोन डुओ?

लोगों का सवाल है कि जब सामान्य आईफोन भारत में बन रहे हैं तो यह क्यों नहीं? टेक एक्सपर्ट्स का मानना है कि आईफोन डुओ एक बिल्कुल नई और बेहद जटिल फोल्डेबल तकनीक पर आधारित है। इसमें इस्तेमाल हुआ एडवांस प्रिंटेड सर्किट बोर्ड (PCB) और जटिल फोल्डिंग हिंज बनाने के लिए जिन आधुनिक असेंबली लाइन्स और भारी निवेश की जरूरत है, वे फिलहाल भारत में मौजूद नहीं हैं।

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चीन या वियतनाम में हुआ है निर्माण

शुरुआती रिपोर्ट्स के मुताबिक, ऐपल के इस पहले फोल्डेबल फोन का निर्माण चीन या वियतनाम की अत्याधुनिक फैक्ट्रियों में हुआ है। फिलहाल भारत में ऐसे जटिल फोल्डेबल डिवाइसेज को असेंबल करने की क्षमता विकसित होने में थोड़ा समय लगेगा, जिसके चलते भारत को पूरी तरह इंपोर्ट पर निर्भर रहना पड़ रहा है।

Location :  New Delhi

Published :  11 September 2026, 2:50 PM IST

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