अंतरिक्ष से सीधे आपके घर उतरेगा सुपरफास्ट इंटरनेट: मस्क की स्टारलिंक और जियो में छिड़ी जंग, जानें कितना होगा खर्च

अब बिना टावर और बिना केबल के आपके घर तक पहुंचेगा सीधे अंतरिक्ष से इंटरनेट! सैटकॉम स्पेक्ट्रम नियमों को मिली हरी झंडी। जानें स्टारलिंक और जियो की तैयारी, संभावित खर्च और भारत के 6G मिशन से जुड़ी हर बड़ी अपडेट सिर्फ एक क्लिक में।

Post Published By: Tanya Chand
Updated : 9 September 2026, 7:48 AM IST
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New Delhi: देश में अब मोबाइल टावर की रेंज खत्म होने या फाइबर केबल टूटने से इंटरनेट ठप होने का झंझट हमेशा के लिए खत्म होने जा रहा है। भारत सरकार ने उपग्रह संचार (सैटेलाइट ब्रॉडबैंड) सेवा के स्पेक्ट्रम आवंटन से जुड़े मुख्य नियमों को अपनी सैद्धांतिक मंजूरी दे दी है।

डिजिटल कम्युनिकेशन आयोग (डीसीसी) की हालिया बैठक में ट्राई की सिफारिशों पर सहमति बन गई है। इसके तहत शुरुआती तौर पर पांच वर्षों के लिए स्पेक्ट्रम आवंटित किया जाएगा, जिसे आगे दो साल के लिए बढ़ाया जा सकेगा। दूरसंचार विभाग जल्द ही अंतिम मंजूरी के लिए इसे कैबिनेट के पास भेजेगा।

स्टारलिंक, जियो और एयरटेल के बीच महामुकाबला

भारत के विशाल बाजार पर कब्जा जमाने के लिए दुनिया के सबसे अमीर इंसान एलन मस्क की कंपनी स्टारलिंक, भारती समूह समर्थित यूटेलसैट वनवेब और रिलायंस की जियो सैटेलाइट कम्युनिकेशंस पूरी तरह तैयार हैं। इन कंपनियों को शुरुआती अनुमतियां मिल चुकी हैं।

रिलायंस जियो सिर्फ विदेशी उपग्रहों पर निर्भर रहने के बजाय खुद का 1,600 सैटेलाइट्स वाला 'लियो' (LEO) नेटवर्क तैयार कर रहा है। जियो की योजना सितंबर 2027 में परीक्षण के बाद 2028 से अंतरिक्ष में अपने सैटेलाइट्स का जाल बिछाने की है।

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सस्ता होगा प्लान या जेब पर पड़ेगा भारी?

दुनिया के अन्य देशों में सैटेलाइट इंटरनेट का इस्तेमाल काफी महंगा है, लेकिन भारतीय कंपनियां इसे आम जनता की पहुंच में लाने की योजना बना रही हैं। शहर में रहने वाले ग्राहकों पर प्रति वर्ष 500 रुपये का अतिरिक्त शुल्क लगाने का प्रस्ताव है, जबकि ग्रामीण इलाकों के ग्राहकों को इससे छूट मिलेगी। कंपनियों से सालाना 5% स्पेक्ट्रम फीस ली जाएगी, जो ग्रामीण क्षेत्रों में सेवा देने वाली कंपनियों के लिए घटाकर 4% रहेगी। इसका सीधा फायदा यह होगा कि ग्रामीण क्षेत्रों में प्लान काफी सस्ते मिलेंगे।

गांव, पहाड़ और समुद्र तक पहुंचेगा 1 Gbps का नेटवर्क

यह तकनीक 4G और 5G की तरह जमीन पर लगे टावरों के भरोसे काम नहीं करती। पृथ्वी की निचली कक्षा में घूम रहे छोटे उपग्रह सीधे आपके घर पर लगी एक छोटी डिश एंटीना और राउटर को सिग्नल भेजेंगे। इससे 100 Mbps से लेकर 1 Gbps तक की सुपरफास्ट स्पीड मिलेगी।

इसका सबसे बड़ा फायदा उन इलाकों को होगा जहां आज तक केबल बिछाना असंभव था जैसे दूर-दराज के गांव, सीमावर्ती क्षेत्र, दुर्गम पहाड़ी रास्ते और समुद्री इलाके। इससे ऑनलाइन पढ़ाई, घर बैठे इलाज (टेलीमेडिसिन), किसानों को मौसम का सटीक अपडेट और वर्क फ्रॉम होम जैसी सुविधाएं हर जगह सहजता से उपलब्ध होंगी।

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6G टेक्नोलॉजी की ओर भारत का मजबूत कदम

सैटेलाइट इंटरनेट के साथ-साथ भारत ने भविष्य की 6G वायरलेस तकनीक पर भी काम शुरू कर दिया है। अमेरिका के नेतृत्व में बने 24 देशों के शक्तिशाली समूह में भारत शामिल हो चुका है। इसमें ब्रिटेन, जर्मनी और जापान जैसे देश शामिल हैं।

यह समूह वर्ष 2030 तक 5G की जगह लेने वाली सुरक्षित और मजबूत 6G तकनीक का खाका तैयार कर रहा है। यानी आने वाले समय में भारत डिजिटल कनेक्टिविटी के मामले में दुनिया के अग्रिम पंक्ति के देशों में शामिल होगा।

Location :  New Delhi

Published :  9 September 2026, 7:48 AM IST

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