पुरानी पेंशन और DA की मांग पर अड़े पंजाब के कर्मचारी: दफ्तरों में ताले, सड़कों पर चक्का जाम

पंजाब में सरकार और कर्मचारियों के बीच रार बढ़ी! 11 सितंबर तक हड़ताल का ऐलान, लुधियाना में हाईवे जाम। सरकार ने लागू किया 'नो वर्क नो पे' का नियम। पुरानी पेंशन और एरियर को लेकर छिड़ा महासंग्राम, जानें आम जनता पर असर।

Post Published By: Tanya Chand
Updated : 9 September 2026, 9:51 AM IST
google-preferred

Chandigarh: पंजाब में अपनी रुकी हुई मांगों को लेकर सरकारी कर्मचारियों और राज्य सरकार के बीच तनातनी अब बेहद गंभीर मोड़ पर पहुंच गई है। मंगलवार को सामूहिक अवकाश (मास लीव) पर रहने के बाद कर्मचारी संगठनों ने झुकने के बजाय अपनी हड़ताल को 11 सितंबर तक बढ़ाने का बड़ा फैसला लिया है।

पंजाब सिविल सचिवालय, निदेशालयों और जिला स्तर के तमाम विभागों के कर्मचारियों के काम बंद करने से सूबे का प्रशासनिक ढांचा पूरी तरह चरमरा गया है, जिससे रोजमर्रा के कामों के लिए सरकारी दफ्तर पहुंचने वाली आम जनता को भारी परेशानी झेलनी पड़ रही है।

सड़कों पर उतरा आक्रोश: लुधियाना में हाईवे पर चक्का जाम

आंदोलन अब सिर्फ दफ्तरों के बहिष्कार तक सीमित नहीं रहा है बल्कि सड़कों पर भी इसका तीखा असर दिखने लगा है। गुस्साए कर्मचारियों ने लुधियाना में मुख्य हाईवे पर जाम लगा दिया, जिससे गाड़ियों की लंबी कतारें लग गईं और आम मुसाफिरों को घंटों ट्रैफिक जाम से जूझना पड़ा।

पंजाब कांग्रेस में पायलट की एंट्री: भूपेश बघेल की छुट्टी के बाद क्या पंजाब में सब चंगा कर पाएंगे सचिन?

'नो वर्क, नो पे' का चाबुक और सख्त कार्रवाई की चेतावनी

कर्मचारियों के इस आक्रामक रुख को देखते हुए पंजाब सरकार ने भी कड़ा रुख अख्तियार कर लिया है। कार्मिक विभाग ने सख्त हिदायत जारी करते हुए 'नो वर्क, नो पे' (काम नहीं तो वेतन नहीं) का नियम लागू कर दिया है।

सरकार का तर्क है कि कई कर्मचारी हाजिरी लगाने के बाद बीच काम से गायब हो जाते हैं, जिससे जनता परेशान होती है। ऐसी अनधिकृत अनुपस्थिति को अनुशासनहीनता मानकर वेतन काटा जाएगा और सख्त कार्रवाई की जाएगी। इससे पहले भी सरकार 2,500 से अधिक कर्मचारियों को नोटिस थमा चुकी है।

पंजाब फतह करने उतरी BJP: ब्यास में पीएम मोदी का संभावित प्रवास, 18 सितंबर से बदलेगी सूबे की सियासत

आखिर क्यों भड़का कर्मचारियों का यह गुस्सा?

कर्मचारियों की नाराजगी का मुख्य कारण लंबे समय से लंबित महंगाई भत्ता (DA) और उसका एरियर जारी न होना है। इसके अलावा, पुरानी पेंशन योजना (OPS) को जमीनी स्तर पर पूरी तरह लागू करने, वर्षों से संविदा पर काम कर रहे कच्चे कर्मचारियों को पक्का करने और वेतनमान में मौजूद विसंगतियों को दूर करने जैसी प्रमुख मांगें शामिल हैं। कर्मचारी नेताओं का कहना है कि जब तक सरकार लिखित में ठोस आश्वासन नहीं देती, यह संघर्ष जारी रहेगा।

Location :  Chandigarh

Published :  9 September 2026, 9:49 AM IST

Related News

Advertisement