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नेपाल में बड़ा रेस्क्यू (Img- X)
Kathmandu: नेपाल में आई विनाशकारी बाढ़ और भूस्खलन को दो हफ्ते बीत जाने के बाद भी हालात बेहद खौफनाक बने हुए हैं। इस समय बचाव दलों का पूरा जोर तीन जलविद्युत (हाइड्रोपावर) परियोजनाओं की गहरी और अंधेरी सुरंगों में फंसे 121 कर्मियों की जान बचाने पर है।
रसुवा स्थित अपर त्रिशूली 3A और 3B जैसी परियोजनाओं की सुरंगों में फंसे इन मजदूरों तक पहुंचने का रास्ता मलबे से बंद है, इसलिए विशाल पाइपों के जरिए लगातार ऑक्सीजन सप्लाई की जा रही है ताकि सुरंग के अंदर जिंदगी की डोर टूटने न पाए।
नेपाल के नौ जिलों में कुदरत का ऐसा कहर टूटा है जिसने पूरे देश का ढांचा हिलाकर रख दिया है। ताजा आंकड़ों के अनुसार, अब तक 1,357 लोगों के शव बरामद किए जा चुके हैं, जिनमें सबसे ज्यादा 363 मौतें अकेले चितवन जिले से दर्ज की गई हैं।
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करीब 5,326 लोग अब भी लापता हैं, जिनकी तलाश में राहत एजेंसियां दिन-रात एक कर रही हैं। पड़ोसी तिब्बत सीमा से लगे क्षेत्रों में भी भारी तबाही हुई है, जहां मलबे से 43 शव मिले हैं और 500 लोग गायब हैं।
इस त्रासदी में भारतीय नागरिक भी भारी संख्या में प्रभावित हुए हैं। विदेश मंत्रालय के अनुसार, 169 भारतीयों को सुरक्षित निकाल लिया गया है, लेकिन 275 भारतीय अब भी लापता हैं।
भारत ने नेपाल की मदद के लिए काठमांडू में फॉरेंसिक टीम भेजी है, जिसने मृतकों की पहचान के लिए 1,200 से अधिक डीएनए सैंपल एकत्र किए हैं। भारत अब तक 7 विमानों के जरिए 95 टन राहत सामग्री और मदद भेज चुका है।
बाढ़ ने नेपाल के बुनियादी ढांचे को पूरी तरह तबाह कर दिया है। रसुवा और चितवन में 41 पुल ताश के पत्तों की तरह बह गए हैं। सड़कों के टूटने से 50 अरब नेपाली रुपये का नुकसान हुआ है।
हालांकि चीन और अन्य एजेंसियों की मदद से 11 बेली ब्रिज लगाए गए हैं और भारत ने भी नए पुल देने का प्रस्ताव रखा है, लेकिन मुख्य रास्ते बंद होने से राहत सामग्री को प्रभावित क्षेत्रों तक पहुंचाना सबसे बड़ी चुनौती बना हुआ है।
Location : Kathmandu
Published : 9 September 2026, 9:07 AM IST