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भरत भाई बारड (image source: internet)
New Delhi: गुजरात के भावनगर से एक प्रेरणादायक कहानी सामने आई है, जहां पूर्व महापौर भरत भाई बारड अपने कार्यकाल पूरा होने के बाद फिर से अपनी पुरानी वेल्डिंग की दुकान पर लौट गए हैं। वर्ष 2024 से 2026 तक करीब ढाई साल तक शहर के मेयर रहने के बावजूद उन्होंने अपने मूल पेशे को नहीं छोड़ा और आज भी नियमित रूप से काम करते हैं।
भरत भाई बारड की यह सादगी उन्हें आम जनता के बीच अलग पहचान दिलाती है। राजनीति में जहां अक्सर पद और सुविधा को प्राथमिकता दी जाती है, वहीं उन्होंने अपने जीवन में सरलता और ईमानदारी को सर्वोपरि रखा है।
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भरत भाई ने 10वीं कक्षा तक पढ़ाई करने के बाद करीब चार दशक पहले परिवार के भरण-पोषण के लिए वेल्डिंग का काम शुरू किया था। मेयर बनने से पहले भी वे इसी काम से जुड़े रहे और कार्यकाल समाप्त होते ही फिर से अपनी दुकान पर लौट आए।
उन्होंने बताया कि उनका परिवार बहुत साधारण था और उनकी मां फूल-माला बेचकर घर चलाती थीं। मां की सीख उनके जीवन की सबसे बड़ी प्रेरणा रही, जिसमें हमेशा ईमानदारी और मेहनत से जीवन जीने की सीख दी गई थी।
आज भी भरत भाई उसी सीख को अपने जीवन का आधार मानते हैं और आम लोगों के बीच रहते हुए अपने काम को जारी रखे हुए हैं। वे किराए के मकान में रहते हैं और सादगीपूर्ण जीवन जीना पसंद करते हैं।
मेयर रहते हुए भरत भाई बारड ने कभी भी पद का दुरुपयोग नहीं किया और न ही किसी तरह की गलत कमाई में शामिल हुए। उन्होंने पूरी निष्ठा और ईमानदारी के साथ शहर की सेवा की।
भारतीय जनता पार्टी ने उनके समर्पण और साफ छवि को देखते हुए उन्हें महापौर का पद सौंपा था। अपने कार्यकाल में उन्होंने हमेशा जनसेवा को प्राथमिकता दी और किसी भी विवाद से दूर रहे। आज भी वे राजनीति को सेवा का माध्यम मानते हैं और अपने पुराने पेशे में लौटकर यह संदेश देते हैं कि पद चाहे कोई भी हो, असली पहचान मेहनत और ईमानदारी से बनती है।
Location : Gandhinagar
Published : 17 May 2026, 4:46 AM IST