बजट बहस, यूजीसी कानून और ट्रेड डील के बीच पीएम मोदी का ‘हंसते रहो’ संदेश, एक्स पर यूजर्स ने लिए मजे

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक्स पर संस्कृत सुभाषित साझा कर हंसी को सबसे अच्छी दवा बताया, बजट बहस, यूजीसी कानून और ट्रेड डील की चर्चाओं के बीच आए इस संदेश पर सोशल मीडिया यूजर्स ने चुटीले अंदाज़ में प्रतिक्रियाएं दीं और इसे लेकर मजेदार टिप्पणियां कीं, पढ़ें क्या कहा पीएम ने..

Updated : 4 February 2026, 8:23 PM IST
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New Delhi : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपनी गंभीर राजनीतिक छवि के साथ-साथ अपने चुटीले और मजाकिया अंदाज़ के लिए भी जाने जाते हैं। संसद से लेकर सार्वजनिक कार्यक्रमों तक, कई मौकों पर उनके हल्के-फुल्के अंदाज़ की झलक देखने को मिलती रही है। इसी कड़ी में बुधवार सुबह प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर एक संस्कृत सुभाषित साझा किया, जिसमें उन्होंने हंसी को स्वास्थ्य और प्रसन्नता की सबसे अच्छी औषधि बताया। इसके बाद सोशल मीडिया पर यूजर्स की प्रतिक्रियाओं का दौर शुरू हो गया।

प्रधानमंत्री ने साझा किया संस्कृत सुभाषित

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने प्राचीन ज्ञान पर आधारित एक प्रेरणादायक संदेश साझा करते हुए लिखा कि हंसी सबसे श्रेष्ठ दवा है।
उन्होंने संस्कृत श्लोक उद्धृत किया:
“औषधेष्वपि सर्वेषु हास्यं श्रेष्ठं वदन्ति ह।
स्वाधीनं सुलभं चापि आरोग्यानन्दवर्धनम्॥”

इस सुभाषित का अर्थ है कि सभी औषधियों में हंसी को सबसे उत्तम बताया गया है, क्योंकि यह स्वतंत्र, आसानी से उपलब्ध और स्वास्थ्य व आनंद को बढ़ाने वाली है। यह मानसिक और शारीरिक तंदुरुस्ती के लिए एक प्राकृतिक और नि:शुल्क उपाय है।

अपने मजाकिया अंदाज़ के लिए जाने जाते हैं पीएम मोदी

प्रधानमंत्री मोदी अपने अनुशासित और तेजतर्रार स्वभाव के साथ-साथ अपने हास्यपूर्ण अंदाज़ के लिए भी पहचाने जाते हैं। प्रधानमंत्री बनने से पहले समर्थकों द्वारा ‘पीएम-पीएम’ के नारे लगाए जाने पर घड़ी की ओर इशारा कर “9 पीएम” कहना हो या संसद में कटाक्ष करते हुए “कितने तेजस्वी लोग हैं, कितने शानदार विचार रखते हैं” जैसे वाक्य कहना- उनकी यह शैली युवाओं के बीच काफी लोकप्रिय रही है।

एक समय हंसी-मजाक से बनाई थी दूरी

हालांकि, पीएम मोदी ने एक इंटरव्यू में स्वीकार किया था कि राजनीति में कही गई मजाकिया बातों का कई बार राजनीतिक लाभ उठाने की कोशिश की जाती है और उनके शब्दों का गलत अर्थ निकाला जाता है। इसी कारण उन्होंने सार्वजनिक जीवन में हंसी-मजाक से कुछ दूरी बना ली थी।

एक्स यूजर्स की प्रतिक्रियाएं

प्रधानमंत्री के इस पोस्ट पर सोशल मीडिया यूजर्स ने चुटीले अंदाज़ में प्रतिक्रिया दी।कुछ यूजर्स ने लिखा कि “यूजीसी कानून और बजट की बहस के दौर में हंसना कैसे संभव है, सर?”वहीं एक अन्य यूजर ने मजाक करते हुए कहा, “अगर हंसी सबसे अच्छी दवा है, तो क्या अब पैरासिटामोल को नौकरी छोड़ देनी चाहिए?”

 

Location : 
  • New Delhi

Published : 
  • 4 February 2026, 8:23 PM IST

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