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सुप्रीम कोर्ट
नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने तमिलनाडु सरकार और SASTRA यूनिवर्सिटी के बीच तंजावुर स्थित सरकारी जमीन विवाद पर सुनवाई करते हुए राज्य को वैकल्पिक समाधान तलाशने का सुझाव दिया है। अदालत ने कहा कि किसी भी व्यवस्था में यह सुनिश्चित होना चाहिए कि तमिलनाडु को जमीन या आर्थिक नुकसान न उठाना पड़े।
भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ इस मामले की सुनवाई कर रही है। पीठ में जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना भी शामिल हैं। मामला मद्रास हाई कोर्ट के उस आदेश के खिलाफ SASTRA यूनिवर्सिटी की अपील से जुड़ा है, जिसमें करीब 31 एकड़ सरकारी जमीन से यूनिवर्सिटी को हटाने का आदेश दिया गया था।
तंजावुर में करीब 232 एकड़ क्षेत्र में फैली SASTRA यूनिवर्सिटी एक डीम्ड यूनिवर्सिटी है, जहां इंजीनियरिंग और तकनीकी शिक्षा दी जाती है।
विवादित जमीन तमिलनाडु सरकार की थी, जिसे जेल विभाग के लिए प्रस्तावित ओपन-एयर जेल बनाने के उद्देश्य से आवंटित किया गया था। राज्य सरकार का आरोप है कि यूनिवर्सिटी ने लंबे समय में इस सरकारी जमीन का इस्तेमाल किया।
सुप्रीम कोर्ट ने जनवरी में यूनिवर्सिटी के खिलाफ बेदखली कार्रवाई पर रोक लगा दी थी।
सुनवाई के दौरान CJI सूर्यकांत ने स्पष्ट किया कि अदालत यूनिवर्सिटी के कथित आचरण को सही नहीं ठहरा रही है, बल्कि पूरे मामले में राज्य और परिस्थितियों का मूल्यांकन कर रही है।
उन्होंने कहा कि अदालत यह देख रही है कि मौजूदा जमीन का इस्तेमाल किस उद्देश्य के लिए हो रहा है। कोर्ट ने कहा कि यदि जमीन का इस्तेमाल किसी व्यावसायिक या गैर-कानूनी गतिविधि के लिए होता तो स्थिति अलग हो सकती थी, लेकिन यहां एक शैक्षणिक संस्थान संचालित हो रहा है।
सुप्रीम कोर्ट ने तमिलनाडु सरकार से पूछा कि क्या प्रस्तावित ओपन-एयर जेल के लिए किसी अन्य उपयुक्त जमीन का विकल्प तलाशा जा सकता है।
अदालत ने कहा कि राज्य की जरूरतों से समझौता नहीं किया जा सकता, लेकिन समाधान ऐसा होना चाहिए जिससे सभी पक्षों के हितों का संतुलन बना रहे।
CJI सूर्यकांत ने यह भी कहा कि किसी भी व्यवस्था में तमिलनाडु को "एक पैसा" या "जमीन का एक इंच भी" नुकसान नहीं होना चाहिए।
तमिलनाडु सरकार ने वैकल्पिक जमीन या किसी समझौते के प्रस्ताव का विरोध किया। राज्य सरकार का कहना है कि लंबे समय तक चले विवाद के बावजूद यूनिवर्सिटी ने धीरे-धीरे सरकारी जमीन पर कब्जा किया।
सरकार ने अदालत में तर्क दिया कि इस तरह की व्यवस्था से भविष्य में अन्य मामलों में भी सरकारी जमीन पर कब्जे को प्रोत्साहन मिल सकता है।
राज्य ने 1985 से 2025 के बीच जमीन के इस्तेमाल से जुड़े आंकड़े भी पेश किए और कहा कि यूनिवर्सिटी की ओर से सुझाई गई वैकल्पिक जमीन पर्याप्त और उपयुक्त नहीं है।
SASTRA यूनिवर्सिटी और तमिलनाडु सरकार के बीच यह विवाद कई दशकों पुराना है। मद्रास हाई कोर्ट ने जनवरी में राज्य सरकार के उस फैसले को बरकरार रखा था, जिसमें जमीन अदला-बदली के अनुरोध को स्वीकार नहीं किया गया था।
हाई कोर्ट ने कहा था कि वैकल्पिक जमीन स्वीकार करना सरकार के विवेक पर निर्भर करता है। इसके बाद SASTRA यूनिवर्सिटी ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया।
Location : New Delhi
Published : 22 September 2026, 10:42 AM IST
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