1984 दंगा केस में बड़ा फैसला: पूर्व कांग्रेस सांसद सज्जन कुमार को राहत, जानें कोर्ट ने क्यों किया बरी

1984 सिख विरोधी दंगों से जुड़े जनकपुरी और विकासपुरी हिंसा मामलों में दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने पूर्व कांग्रेस सांसद सज्जन कुमार को बरी कर दिया है। कोर्ट ने सबूतों के अभाव में यह फैसला सुनाया। यह मामला 2015 में दर्ज दो एफआईआर से जुड़ा था।

Post Published By: Nidhi Kushwaha
Updated : 22 January 2026, 11:06 AM IST
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New Delhi: 1984 के सिख विरोधी दंगों से जुड़े एक अहम मामले में दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने पूर्व कांग्रेस सांसद सज्जन कुमार को बरी कर दिया है। यह फैसला जनकपुरी और विकासपुरी इलाकों में हुई हिंसा से संबंधित मामलों में आया है, जिनमें दो सिख नागरिकों की मौत हुई थी। स्पेशल जज दिग्विनय सिंह की अदालत ने गुरुवार को सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद यह निर्णय सुनाया।

दो एफआईआर, तीन मौतों का आरोप

दरअसल, यह मामला फरवरी 2015 में गठित स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) द्वारा दर्ज की गई दो अलग-अलग एफआईआर से जुड़ा था। पहली एफआईआर 1 नवंबर 1984 को जनकपुरी में सरदार सोहन सिंह और उनके दामाद अवतार सिंह की हत्या से संबंधित थी। दूसरी एफआईआर 2 नवंबर 1984 को विकासपुरी क्षेत्र में सरदार गुरचरण सिंह को जिंदा जलाकर मारने की घटना को लेकर दर्ज की गई थी। इन दोनों ही मामलों में सज्जन कुमार को मुख्य आरोपी बनाया गया था।

अदालत ने क्यों किया बरी?

कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि अभियोजन पक्ष सज्जन कुमार के खिलाफ ठोस और निर्णायक सबूत पेश करने में असफल रहा। गवाहों के बयानों में विरोधाभास पाए गए और कई अहम कड़ियां साबित नहीं हो सकीं। अदालत ने यह भी माना कि इतने वर्षों बाद दर्ज मामलों में सबूतों की विश्वसनीयता पर सवाल उठते हैं।

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सज्जन कुमार का पक्ष

सुनवाई के दौरान सज्जन कुमार ने खुद को पूरी तरह निर्दोष बताया। जुलाई 2025 में दर्ज अपने बयान में उन्होंने कहा था कि वह कभी भी दंगों में शामिल नहीं रहे और उनके खिलाफ एक भी प्रत्यक्ष सबूत नहीं है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि जांच एजेंसी ने निष्पक्ष जांच नहीं की और राजनीतिक दबाव में उन्हें इस मामले में घसीटा गया।

दिसंबर 2025 में सुरक्षित हुआ था फैसला

लंबी सुनवाई के बाद अदालत ने दिसंबर 2025 में इस केस में फैसला सुरक्षित रख लिया था। दोनों पक्षों की लिखित दलीलों और मौखिक बहस के बाद अब जाकर यह निर्णय सामने आया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि केवल आरोपों के आधार पर किसी को दोषी नहीं ठहराया जा सकता।

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राजनीतिक और सामाजिक प्रतिक्रिया

इस फैसले के बाद राजनीतिक हलकों में मिली-जुली प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। जहां कांग्रेस समर्थकों ने फैसले को न्याय की जीत बताया, वहीं सिख संगठनों और पीड़ित परिवारों ने निराशा जताई है। कई संगठनों ने उच्च न्यायालय में अपील करने की संभावना भी जताई है।

Location : 
  • New Delhi

Published : 
  • 22 January 2026, 11:06 AM IST

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