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Pongal, Lohri और Makar Sankranti 2026 की सही तारीख और शुभ मुहूर्त जानें। भारत के प्रमुख फसल उत्सवों से जुड़ी परंपराएं, रीति-रिवाज और उनका महत्व पढ़ें, ताकि आप इन पर्वों की तैयारी सही समय पर कर सकें।
2026 त्योहार
New Delhi: भारत में फसल उत्सवों का विशेष महत्व है और हर साल जनवरी में आने वाले पोंगल, लोहड़ी और मकर संक्रांति को लेकर लोगों में खास उत्साह रहता है। ये पर्व न सिर्फ प्रकृति और सूर्य की आराधना से जुड़े हैं, बल्कि किसानों की मेहनत और नई फसल के स्वागत का भी प्रतीक माने जाते हैं। साल 2026 में ये तीनों प्रमुख फसल उत्सव लगभग एक ही समय पर मनाए जाएंगे, ऐसे में सही तारीख और परंपराओं को जानना जरूरी हो जाता है।
तमिल सौर पंचांग के अनुसार इस साल पोंगल का पर्व बुधवार, 14 जनवरी 2026 से शुरू होगा। पोंगल चार दिनों तक चलने वाला उत्सव है, जिसकी शुरुआत बोगी पांडिगई से होती है। इस दिन लोग पुराने सामान को त्याग कर घरों की साफ-सफाई करते हैं और अलाव जलाकर नई शुरुआत का स्वागत करते हैं। दूसरे दिन थाई पोंगल मनाया जाता है, जो इस उत्सव का सबसे पवित्र और महत्वपूर्ण दिन माना जाता है। इस दिन सूर्य देव को धन्यवाद देते हुए नए चावल, दूध और गुड़ से पोंगल बनाया जाता है।
उत्तर भारत खासकर पंजाब में फसल उत्सव का आगाज लोहड़ी से होता है। साल 2026 में लोहड़ी मंगलवार, 13 जनवरी को मनाई जाएगी। यह पर्व रबी फसलों की कटाई और सर्दी के अंत का प्रतीक है।
लोहड़ी के दिन लोग अलाव के चारों ओर इकट्ठा होकर मूंगफली, रेवड़ी, गजक, तिल और गुड़ अर्पित करते हैं। भांगड़ा और गिद्दा के साथ खुशियां मनाई जाती हैं और नई फसल के लिए ईश्वर का आभार जताया जाता है।
तमिल पंचांग के अनुसार पोंगल का दूसरा दिन ही संक्रांति के रूप में मनाया जाता है, जिसे उत्तर भारत में मकर संक्रांति कहा जाता है। इस दिन सूर्य धनु राशि से निकलकर मकर राशि में प्रवेश करता है।
मकर संक्रांति पर गंगा स्नान, सूर्य पूजा और दान-पुण्य का विशेष महत्व होता है। उत्तर प्रदेश और बिहार में इस दिन खिचड़ी बनाकर दान करने की परंपरा है, जबकि गुजरात में यही पर्व उत्तरायण के नाम से प्रसिद्ध है और पतंग उत्सव के रूप में मनाया जाता है।
द्रिक पंचांग के अनुसार साल 2026 में थाई पोंगल और मकर संक्रांति का शुभ समय बुधवार दोपहर 3 बजकर 13 मिनट से माना गया है। इस समय सूर्य पूजा और धार्मिक कार्य करना शुभ फलदायी माना जाता है।
मकर संक्रांति 2026: पूजा विधि, स्नान-दान का शुभ मुहूर्त और जानें इस पर्व का आध्यात्मिक महत्व
भारत के अलग-अलग हिस्सों में फसल उत्सव अलग नामों और परंपराओं के साथ मनाए जाते हैं। गुजरात में इसे उत्तरायण, असम में माघ बिहू या भोगाली बिहू, पश्चिम बंगाल में पौष संक्रांति और उत्तर भारत में मकर संक्रांति कहा जाता है। नाम अलग होने के बावजूद इन सभी पर्वों का संदेश एक ही है, प्रकृति के प्रति कृतज्ञता और नई शुरुआत का उत्सव।