Kailash Mansarovar Yatra: कैलाश यात्रा पर जाना हुआ और महंगा!

कैलाश मानसरोवर यात्रा पर जाने वालों के लिए इस साल बड़ी अपडेट आई है। यात्रा से जुड़ा खर्च बढ़ गया है, जिससे श्रद्धालुओं की जेब पर असर पड़ सकता है। इसके पीछे कुछ अहम वजहें बताई जा रही हैं। अगर आप भी इस पवित्र यात्रा की योजना बना रहे हैं, तो पहले जान लें क्या बदला है और आपको कितना अतिरिक्त खर्च करना पड़ सकता है।

Updated : 6 May 2026, 9:06 AM IST
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New Delhi: कैलाश मानसरोवर यात्रा पर जाने की योजना बना रहे श्रद्धालुओं के लिए इस साल एक बड़ी खबर सामने आई है। वर्ष 2026 में यात्रा का खर्च बढ़ा दिया गया है। अब प्रति यात्री कुल खर्च 2.09 लाख रुपये देना होगा, जो पिछले साल की तुलना में करीब 35 हजार रुपये अधिक है। अधिकारियों के अनुसार, इस बढ़ोतरी के पीछे डॉलर की कीमत में वृद्धि एक प्रमुख कारण है।

पिछले साल से 35 हजार रुपये महंगी हुई यात्रा

बीते वर्ष कैलाश मानसरोवर यात्रा का कुल खर्च लगभग 1.74 लाख रुपये प्रति यात्री था, जो इस वर्ष बढ़कर 2.09 लाख रुपये हो गया है। इस प्रकार यात्रियों को इस बार अधिक भुगतान करना होगा। कुल खर्च में कई प्रकार की सुविधाएं और सेवाएं शामिल होती हैं।

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केएमवीएन शुल्क में भी हुआ इजाफा

भारतीय क्षेत्र में यात्रा, भोजन, आवास और गाइड जैसी व्यवस्थाएं कुमाऊं मंडल विकास निगम (KMVN) द्वारा की जाती हैं। पिछले वर्ष केएमवीएन का शुल्क 57 हजार रुपये प्रति यात्री था, जिसे इस बार बढ़ाकर 65 हजार रुपये कर दिया गया है। यानी इस मद में 8 हजार रुपये की बढ़ोतरी की गई है।

तिब्बत क्षेत्र के लिए अलग से देना होगा शुल्क

यात्रा का एक हिस्सा तिब्बत क्षेत्र में भी होता है, जहां के खर्च अलग से देय होते हैं। इसमें वीजा सहित अन्य खर्च शामिल हैं, जो विदेश मंत्रालय को दिए जाते हैं। इस हिस्से के लिए लगभग 1400 डॉलर का भुगतान करना होगा। कुल यात्रा शुल्क में यह राशि भी शामिल होती है।

इस साल बढ़ेगी यात्रियों की संख्या

केएमवीएन के महाप्रबंधक विजय नाथ शुक्ला के अनुसार, इस वर्ष यात्रा के लिए यात्रियों की संख्या बढ़ाई गई है। पिछले साल 10 समूहों में कुल 250 यात्रियों ने यात्रा की थी। इस बार 50-50 यात्रियों के 10 दल बनाए जाएंगे, यानी कुल 500 श्रद्धालु यात्रा कर सकेंगे। यात्रियों के लिए पंजीकरण प्रक्रिया भी शुरू हो चुकी है।

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इतिहास: 1947 से शुरू हुई यात्रा

कैलाश मानसरोवर यात्रा की शुरुआत 1947 में भारत की स्वतंत्रता के बाद हुई थी। हालांकि 1962 के भारत-चीन युद्ध के दौरान इसे बंद कर दिया गया था। बाद में 1981 में यह यात्रा फिर से शुरू हुई और 2019 तक जारी रही। कोरोना महामारी और भारत-चीन तनाव के चलते यह यात्रा कुछ वर्षों तक बंद रही और 2025 में इसे दोबारा शुरू किया गया।

नए मार्ग से होगी यात्रा

पिछले वर्ष यात्रा मार्ग में बदलाव किया गया था। पहली बार यह यात्रा चंपावत और टनकपुर के रास्ते कराई गई। इस वर्ष भी यात्रा इसी मार्ग से होगी। यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं को जागेश्वर और चितई जैसे प्रमुख धार्मिक स्थलों के दर्शन भी कराए जाएंगे।

क्या-क्या शामिल है कुल खर्च में

कुल 2.09 लाख रुपये के खर्च में यात्रा, आवास, भोजन, गाइड, मेडिकल सुविधाएं, वीजा और तिब्बत क्षेत्र में होने वाले अन्य खर्च शामिल हैं। भारतीय क्षेत्र का खर्च केएमवीएन संभालता है, जबकि तिब्बत क्षेत्र के लिए अलग से शुल्क लिया जाता है।

यात्रियों के लिए जरूरी जानकारी

जो श्रद्धालु इस पवित्र यात्रा पर जाना चाहते हैं, उन्हें बढ़े हुए खर्च और पंजीकरण प्रक्रिया को ध्यान में रखते हुए पहले से तैयारी करनी होगी। यात्रा से जुड़ी सभी जरूरी जानकारियां और भुगतान समय पर पूरा करना आवश्यक है, ताकि किसी प्रकार की परेशानी से बचा जा सके।

Location :  New Delhi

Published :  6 May 2026, 9:06 AM IST

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