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मॉडर्न पैरेंटिंग से बच्चों में तनाव (सोर्स-Pinterest)
New Delhi: आज के दौर में माता-पिता की इच्छा होती है कि उनका बच्चा पढ़ाई के साथ-साथ हर गतिविधि में आगे रहे। गुरुग्राम के ग्यारह साल के अक्षत का ही उदाहरण लें, जो स्कूल और एबेकस के साथ अब टेबल मैनर्स और सॉफ्ट स्किल्स की क्लास भी ले रहा है। बच्चों की सुबह से रात तक की दिनचर्या इतनी व्यस्त हो गई है कि वे किसी बड़ी मल्टीनेशनल कंपनी के सीईओ जैसे नजर आने लगे हैं। रोबोटिक्स, स्विमिंग, चेस और ट्यूशन के इस चक्रव्यूह में फंसकर बच्चे उम्र से पहले ही भारी मानसिक तनाव का सामना कर रहे हैं।
पेरेंटिंग कोच का मानना है कि माता-पिता की मंशा अपने बच्चों को सफल देखने की होती है, लेकिन यह होड़ बच्चों की कच्ची उम्र पर भारी पड़ रही है। जो बर्नआउट और स्ट्रेस 30-35 साल के प्रोफेशनल्स में दिखता है, वह आज 8-10 साल के बच्चों में साफ देखा जा सकता है। अत्यधिक उम्मीदों और हर वक्त आगे निकलने की धुन के कारण बच्चों का सहज विकास रुक रहा है।
बच्चों पर क्लासेज का भारी बोझ (सोर्स-Pinterest)
फ्री-प्ले का समय: बच्चे के दिन में कम से कम 1 से 2 घंटे ऐसे होने चाहिए जब वह बिना किसी रोक-टोक के अपनी मर्जी से खेल सके।
एक्टिविटीज कम करें: यदि हफ्ते के सातों दिन क्लासेज से भरे हैं, तो तुरंत एक-दो गैर-जरूरी गतिविधियां कम कर दें।
प्यार को प्रदर्शन से न जोड़ें: बच्चे को यह अहसास कराएं कि आपका प्यार उसकी किसी परफार्मेंस या सर्टिफिकेट का मोहताज नहीं है।
संवाद बढ़ाएं: रोज अपने बच्चे से पूछें कि आज उसे सबसे ज्यादा किस बात में मजा आया, ताकि उसका मानसिक बोझ हल्का हो सके।
Location : New Delhi
Published : 1 November 2026, 4:03 PM IST