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बिना महंगी कोचिंग के दिव्या तंवर ने रचा इतिहास (Img- Instagram/ Divya Tanwar)
New Delhi: सफलता कभी किसी सुख-सुविधा या बड़े संसाधनों की मोहताज नहीं होती, उसे सिर्फ कड़े परिश्रम और अटूट संकल्प से हासिल किया जा सकता है। हरियाणा के एक छोटे से गांव निंबी की रहने वाली दिव्या तंवर की कहानी इस बात का सबसे जीवंत उदाहरण है। दिव्या का यह सफर सिर्फ संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की सिविल सेवा परीक्षा पास करने भर का नहीं है, बल्कि यह एक मां के कभी न डगमगाने वाले विश्वास और उनकी बेटी के असाधारण संघर्ष की एक महागाथा है, जो आज देश के लाखों युवाओं को प्रेरित कर रही है।
दिव्या का शुरुआती जीवन बेहद चुनौतीपूर्ण और कठिनाइयों से भरा रहा। साल 2011 में जब वह महज 8-9 साल की थीं, तब उनके पिता का असमय निधन हो गया। पिता के चले जाने से परिवार पर दुखों और आर्थिक तंगी का पहाड़ टूट पड़ा। घर में दिव्या और उनके तीन भाई-बहनों की जिम्मेदारी अकेले उनकी मां बबीता तंवर के कंधों पर आ गई।
अक्सर ऐसी परिस्थितियों में बच्चों की पढ़ाई बीच में ही छूट जाती है, लेकिन बबीता तंवर ने हार नहीं मानी। उन्होंने बच्चों के भविष्य के लिए दिन-रात खेतों में मजदूरी की और रात के समय कपड़े सिलने का काम भी किया ताकि बच्चों की पढ़ाई के लिए जरूरी पैसे जुटाए जा सकें।
दिव्या पढ़ाई में बचपन से ही कुशाग्र थीं। उनकी शुरुआती शिक्षा गांव के सरकारी स्कूल में हुई, जिसके बाद उनका चयन जवाहर नवोदय विद्यालय के लिए हो गया। स्कूल के ही एक कार्यक्रम के दौरान जब दिव्या ने मुख्य अतिथि के रूप में आए एक एसडीएम (SDM) अधिकारी को देखा, तो उनके मन में भी देश सेवा करने और समाज में सम्मान पाने की ललक जाग उठी।
उन्होंने उसी दिन ठान लिया कि वह भी एक दिन बड़ी प्रशासनिक अधिकारी बनेंगी। आगे चलकर उन्होंने सरकारी महिला कॉलेज से BSc की डिग्री हासिल की और अपनी पढ़ाई का खर्च निकालने के लिए बच्चों को ट्यूशन भी पढ़ाया ताकि मां की आर्थिक मदद हो सके।
आज के समय में जहाँ छात्र यूपीएससी की तैयारी के लिए लाखों रुपये की महंगी कोचिंग, बड़े गैजेट्स और हाई-स्पीड इंटरनेट को अनिवार्य मानते हैं, वहीं दिव्या ने इसके विपरीत राह चुनी। घर में जगह की कमी और बेहद सीमित संसाधनों के बावजूद, उन्होंने घर के एक छोटे से कमरे में रोजाना 10-10 घंटे तक कड़ी मेहनत की।
उन्होंने बिना किसी कोचिंग के पूरी तरह सेल्फ स्टडी और इंटरनेट पर मौजूद मुफ्त स्टडी मटेरियल के भरोसे तैयारी शुरू की। दिव्या ने अपनी इस पूरी यात्रा में हिंदी माध्यम को चुना और एनसीईआरटी (NCERT) की किताबों को अपनी तैयारी का मजबूत आधार बनाया।
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दिव्या की इस अनवरत तपस्या का फल साल 2021 में मिला, जब उन्होंने अपने पहले ही प्रयास में मात्र 21 वर्ष की आयु में यूपीएससी परीक्षा क्रैक कर ली। उन्होंने ऑल इंडिया 438वीं रैंक हासिल की और देश की सबसे युवा महिला आईपीएस (IPS) अधिकारियों में शामिल हुईं। उन्हें मणिपुर कैडर मिला और उन्होंने ट्रेनिंग भी शुरू कर दी, लेकिन उनका अंतिम लक्ष्य तो आईएएस बनना था।
ड्यूटी और ट्रेनिंग की व्यस्तताओं के बीच भी उन्होंने अपनी पढ़ाई जारी रखी। उनका यह अटूट प्रयास अगले ही साल रंग लाया, जब यूपीएससी 2022 के परिणामों में उन्होंने ऑल इंडिया 105वीं रैंक हासिल की और महज 22 साल की उम्र में अपने आईएएस (IAS) बनने के सपने को सच कर दिखाया।
Location : New Delhi
Published : 24 June 2026, 12:48 PM IST