US Midterm Elections: ट्रंप की साख दांव पर, क्या डेमोक्रेट्स पलट देंगे बाजी? जानिए पूरा गणित

अमेरिका में आज मध्यावधि चुनाव के लिए मतदान होगा। प्रतिनिधि सभा की 435 और सीनेट की 35 सीटों पर होने वाले इस चुनाव में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की राजनीतिक साख दांव पर है। सर्वेक्षणों में डेमोक्रेट्स की बढ़त के संकेत हैं। जानिए चुनाव का पूरा गणित और भारत पर इसका संभावित असर।

Post Published By: Rohit Goyal
Updated : 3 November 2026, 9:10 AM IST
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New Delhi: अमेरिका में आज मध्यावधि चुनाव के लिए मतदान होने जा रहा है। इस चुनाव में प्रतिनिधि सभा की सभी 435 सीटों और सीनेट की 35 सीटों पर उम्मीदवारों की किस्मत का फैसला होगा। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भले ही सीधे चुनाव मैदान में नहीं हैं, लेकिन यह चुनाव उनकी लोकप्रियता और राजनीतिक पकड़ की बड़ी परीक्षा माना जा रहा है। ईरान के साथ युद्ध, बढ़ती महंगाई और आर्थिक नीतियों को लेकर जनता की नाराजगी के बीच रिपब्लिकन पार्टी को कड़ी चुनौती मिल रही है। सर्वेक्षणों में डेमोक्रेटिक पार्टी की बढ़त के संकेत हैं। ऐसे में ट्रंप ने अपनी पार्टी के उम्मीदवारों के समर्थन में पूरी ताकत झोंक दी है।

प्रतिनिधि सभा की 435 और सीनेट की 35 सीटों पर मुकाबला

अमेरिकी मध्यावAll Postsधि चुनाव में प्रतिनिधि सभा की सभी 435 सीटों और सीनेट की 35 सीटों पर मतदान होना है। इसका मुख्य मुकाबला रिपब्लिकन और डेमोक्रेटिक पार्टियों के बीच है। दोनों दल अमेरिकी संसद में अपना वर्चस्व कायम करने की कोशिश कर रहे हैं।

सर्वेक्षणों के मुताबिक, प्रतिनिधि सभा में डेमोक्रेट्स के बहुमत हासिल करने की संभावना करीब 90 फीसदी आंकी जा रही है। बहुमत के लिए 218 या उससे अधिक सीटों की जरूरत होगी। वहीं, सीनेट की कई सीटों पर दोनों दलों के बीच कांटे की टक्कर देखने को मिल रही है।

मिशिगन में डेमोक्रेटिक उम्मीदवार अब्दुल अल-सईद को 53 फीसदी और रिपब्लिकन उम्मीदवार माइक रोजर्स को 42 फीसदी समर्थन मिलने का दावा किया गया है। यदि अल-सईद जीतते हैं तो वह अमेरिकी इतिहास में पहले मुस्लिम सीनेटर बनेंगे।

ट्रंप की लोकप्रियता पर सवाल, 34 से 37 फीसदी अप्रूवल रेटिंग

मध्यावधि चुनाव से पहले राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की अप्रूवल रेटिंग में गिरावट की बात सामने आई है। उनकी लोकप्रियता 34 से 37 फीसदी के बीच बताई जा रही है, जबकि करीब 61 फीसदी अमेरिकी उनके कामकाज के तरीके से असंतुष्ट बताए गए हैं।

ईरान के साथ युद्ध, महंगाई और आर्थिक नीतियों को लेकर लोगों की नाराजगी रिपब्लिकन पार्टी के लिए चुनौती बन रही है। खासकर युवा मतदाताओं के बीच सरकार की नीतियों को लेकर असंतोष चुनावी समीकरण प्रभावित कर सकता है।

डेमोक्रेट्स को ट्रंप की चेतावनी, बोले- बनूंगा मिस्टर वीटो

चुनाव प्रचार के आखिरी दौर में ट्रंप ने कंसास की एक रैली में डेमोक्रेटिक पार्टी को चुनौती दी। उन्होंने कहा कि यदि डेमोक्रेट्स संसद में बहुमत हासिल कर लेते हैं, तब भी वह उनके जनविरोधी या मनमाने विधेयकों को कानून नहीं बनने देंगे।

ट्रंप ने खुद को मिस्टर वीटो बताते हुए कहा कि वह लगातार वीटो का इस्तेमाल करेंगे। उनके मुताबिक, एक-दो महीने तक ऐसा होने के बाद डेमोक्रेट्स समझ जाएंगे और अंततः बातचीत की मेज पर आकर समझौता करेंगे।

दरअसल, अमेरिकी राष्ट्रपति के पास कांग्रेस से पारित विधेयकों को वीटो करने का संवैधानिक अधिकार है। हालांकि, कांग्रेस दोनों सदनों में दो-तिहाई बहुमत से राष्ट्रपति के वीटो को पलट सकती है।

चुनावी नतीजों का भारत और अमेरिकी विदेश नीति पर क्या होगा असर?

अमेरिका के मध्यावधि चुनाव के नतीजे केवल घरेलू राजनीति तक सीमित नहीं रहेंगे। संसद में सत्ता संतुलन बदलने से राष्ट्रपति ट्रंप की नीतियों पर निगरानी और राजनीतिक दबाव बढ़ सकता है।

यदि डेमोक्रेट्स प्रतिनिधि सभा में बहुमत हासिल करते हैं तो प्रशासन के बजट, नीतिगत फैसलों और सैन्य गतिविधियों को लेकर संसदीय निगरानी मजबूत हो सकती है। हालांकि, राष्ट्रपति के विदेश नीति, टैरिफ और सैन्य कार्रवाई से जुड़े अधिकार पूरी तरह समाप्त नहीं होंगे।

भारत के लिए भी यह चुनाव अहम है। नतीजे चाहे जिस दल के पक्ष में आएं, भारत को अपने व्यापारिक हितों, रक्षा समझौतों और तकनीकी सहयोग को सुरक्षित रखने के लिए रिपब्लिकन और डेमोक्रेटिक दोनों दलों के नेताओं के साथ मजबूत संबंध बनाए रखने होंगे। अब पूरी दुनिया की नजर अमेरिकी मतदाताओं के फैसले पर टिकी है।

Location :  New Delhi

Published :  3 November 2026, 9:08 AM IST

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