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मिडिल ईस्ट में तनाव के बीच रूस की पहल (Img- Internet)
New Delhi: मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष के बीच रूस ने ईरान को मध्यस्थता में मदद की पेशकश की है। यह पहल ऐसे समय में सामने आई है जब पूरे क्षेत्र में हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं और बड़े युद्ध की आशंका जताई जा रही है। रूस का यह कदम क्षेत्रीय स्थिरता बनाए रखने की दिशा में अहम माना जा रहा है।
रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची से बातचीत कर यह प्रस्ताव रखा। बातचीत के दौरान लावरोव ने जोर देकर कहा कि क्षेत्र में चल रही जंग को और बढ़ने से रोकना बेहद जरूरी है। उन्होंने युद्धविराम बनाए रखने की अपील की, ताकि हालात नियंत्रण से बाहर न जाएं।
ईरान ने रूस को भरोसा दिलाया है कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरने वाले रूसी जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाएगी। यह समुद्री मार्ग वैश्विक तेल आपूर्ति के लिहाज से बेहद अहम है। ईरान ने कहा कि रूसी जहाजों को सुरक्षित रास्ता दिया जाएगा और उनकी आवाजाही में किसी तरह की बाधा नहीं आने दी जाएगी।
पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के चलते अंतरराष्ट्रीय समुदाय की चिंता बढ़ गई है। खासकर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज जैसे अहम समुद्री मार्ग की सुरक्षा को लेकर दुनिया भर में सतर्कता बढ़ी है। किसी भी तरह की अस्थिरता का असर वैश्विक व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति पर पड़ सकता है।
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ईरान और अमेरिका के बीच चल रहे तनाव में रूस सीधे तौर पर शामिल नहीं है, लेकिन वह पर्दे के पीछे से ईरान की मदद कर रहा है। रूस एक रणनीतिक सहयोगी की भूमिका निभाते हुए खुफिया जानकारी, सैन्य उपकरण और अंतरराष्ट्रीय समर्थन उपलब्ध करा रहा है।
📞 On April 20, FMs Sergey #Lavrov & @araghchi spoke over the phone.
Abbas Araghchi informed Sergey Lavrov of Iran’s position regarding the US violations of the ceasefire, including the illegal naval blockade of the Strait of Hormuz.https://t.co/zT3c21Ywvj pic.twitter.com/r4XmxB0Fq5
— MFA Russia 🇷🇺 (@mfa_russia) April 20, 2026
रिपोर्ट्स के अनुसार रूस ईरान को अमेरिकी सैन्य ठिकानों और जहाजों से जुड़ी अहम जानकारी उपलब्ध करा रहा है। इसमें सैटेलाइट से मिलने वाली ताजा सूचनाएं भी शामिल हैं। इसके अलावा रूस ड्रोन और अन्य जरूरी सैन्य संसाधन भी ईरान को दे रहा है, जिससे उसकी सैन्य क्षमता मजबूत हो रही है।
राजनयिक मोर्चे पर भी रूस ईरान के साथ खड़ा नजर आ रहा है। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में रूस ने चीन के साथ मिलकर अमेरिका के खिलाफ माहौल बनाने की कोशिश की है। रूस ने ईरान के खिलाफ किसी भी सख्त प्रस्ताव का समर्थन नहीं किया और कई मामलों में तटस्थ रुख अपनाया है।
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रूस की यह पहल मिडिल ईस्ट में शांति बनाए रखने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। हालांकि आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि यह कूटनीतिक प्रयास कितना सफल होता है और क्या इससे क्षेत्र में जारी तनाव कम हो पाता है।
Location : New Delhi
Published : 21 April 2026, 9:18 AM IST