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ईरान के मिसाइल हमलों ने कतर की एलएनजी इंडस्ट्री को भारी नुकसान पहुंचाया है, जिससे 20 अरब डॉलर के राजस्व पर खतरा मंडरा रहा है। इस हमले का असर भारत, चीन और यूरोप तक महसूस किया जाएगा, जहां गैस सप्लाई बाधित हो सकती है।
LNG सप्लाई पर संकट (Img: Google)
Qatar: रमजान के सन्नाटे में जब खाड़ी का इलाका इबादत और सुकून में डूबा होना चाहिए था, उसी वक्त आसमान से बरसी मिसाइलों ने कतर की सबसे बड़ी ताकत उसकी गैस इंडस्ट्री को लहूलुहान कर दिया। यह कोई सामान्य सैन्य कार्रवाई नहीं थी, बल्कि एक ऐसा आर्थिक वार था जिसने कतर की रीढ़ मानी जाने वाली एलएनजी इंडस्ट्री को हिला कर रख दिया।
कतर एनर्जी के सीईओ और ऊर्जा मामलों के राज्य मंत्री साद अल-काबी के मुताबिक, ईरान के हमलों ने देश की एलएनजी एक्सपोर्ट क्षमता का करीब 17 प्रतिशत तबाह कर दिया है। इसका सीधा असर करीब 20 अरब डॉलर के सालाना राजस्व पर पड़ा है, जो अब खतरे में है।
हमलों का असर सिर्फ आंकड़ों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह कतर की वैश्विक ऊर्जा सप्लाई चेन को झकझोर देने वाला है। अल-काबी ने बताया कि मरम्मत और पुनर्निर्माण के चलते आने वाले 3 से 5 साल तक हर साल करीब 12.8 मिलियन टन एलएनजी उत्पादन बाधित रहेगा। इसका मतलब साफ है चीन, भारत और यूरोप के कई देशों को मिलने वाली गैस सप्लाई अब अनिश्चितता के दौर में प्रवेश कर चुकी है।
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मीडिया से बातचीत में साद अल-काबी ने अपनी हैरानी और दर्द जाहिर करते हुए कहा कि उन्होंने कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि कतर को इस तरह के हमले का सामना करना पड़ेगा, खासकर रमजान के दौरान। उन्होंने इस बात पर भी दुख जताया कि यह हमला एक मुस्लिम देश की ओर से हुआ। कतर एनर्जी ने स्पष्ट किया है कि इन हमलों के चलते उसे कई अंतरराष्ट्रीय ग्राहकों के साथ किए गए दीर्घकालिक अनुबंधों पर ‘फोर्स मेज्योर’ घोषित करना पड़ेगा।
इसमें इटली, बेल्जियम, दक्षिण कोरिया और चीन जैसे देश शामिल हैं, जिन्हें अगले 5 साल तक गैस सप्लाई प्रभावित हो सकती है।
स्थिति उस वक्त और गंभीर हो गई जब ईरान ने कतर के सबसे बड़े एलएनजी हब रास लाफान पर मिसाइल हमला किया। इस हमले के बाद पूरे क्षेत्र में तनाव चरम पर पहुंच गया। कतर एनर्जी को मजबूर होकर अपने पूरे एलएनजी उत्पादन पर ‘फोर्स मेज्योर’ लागू करना पड़ा। ,अल-काबी का कहना है कि जब तक क्षेत्र में शत्रुता खत्म नहीं होती, तब तक उत्पादन को पूरी तरह बहाल करना संभव नहीं है। यानी यह संकट सिर्फ तकनीकी नहीं, बल्कि पूरी तरह भू-राजनीतिक बन चुका है।
इस हमले का असर सिर्फ कतर तक सीमित नहीं है, बल्कि दुनिया की बड़ी ऊर्जा कंपनियां भी इसकी चपेट में आ गई हैं। क्षतिग्रस्त एलएनजी ट्रेनों में अमेरिकी कंपनी ExxonMobil की हिस्सेदारी है, जबकि प्रभावित जीटीएल प्लांट में Shell की भागीदारी है।
ExxonMobil की LNG ट्रेन S4 में 34 प्रतिशत और S6 में 30 प्रतिशत हिस्सेदारी है। इन ट्रेनों से इटली, बेल्जियम, दक्षिण कोरिया और चीन को सप्लाई होती थी, जो अब प्रभावित हो गई है। वहीं Shell के GTL प्लांट को ठीक करने में करीब एक साल का समय लग सकता है।
अल-काबी ने साफ कहा कि इस हमले ने पूरे खाड़ी क्षेत्र को 10 से 20 साल पीछे धकेल दिया है। उन्होंने यह भी माना कि यह इलाका पहले एक सुरक्षित ऊर्जा हब के रूप में जाना जाता था, लेकिन अब उसकी छवि को गहरा झटका लगा है।