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बेंजामिन नेतन्याहू (सोर्स-एक्स)
Jerusalem: इजरायल की राजनीति में एक बार फिर बड़ा भूचाल आ गया है। प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की मुश्किलें उस वक्त और बढ़ गईं जब हालिया संसदीय चुनावों के आधिकारिक नतीजों में उनका दक्षिणपंथी गुट बहुमत के जादुई आंकड़े से दूर हो गया। चुनाव हारने के बाद सत्तारूढ़ खेमे ने पूरी चुनावी प्रक्रिया पर ही सवाल खड़े कर दिए हैं और अरब पार्टियों पर लोकतंत्र को कुचलने तथा चुनाव चुराने का सनसनीखेज आरोप लगाया है।
गुरुवार को जारी किए गए आधिकारिक चुनाव परिणामों ने इजरायल के राजनीतिक गलियारों में खलबली मचा दी है। आंकड़ों के मुताबिक, प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के धड़े को महज 53 सीटें हासिल हुई हैं, जबकि मुख्य विपक्षी दल ने 48 सीटों पर कब्जा जमाया है। इसके साथ ही, इस चुनाव में अरब-नेतृत्व वाली पार्टियों ने जबरदस्त प्रदर्शन करते हुए 19 सीटें अपने नाम की हैं। इन परिणामों को अगले बुधवार को देश के राष्ट्रपति को सौंपा जाएगा, जिसके बाद नई सरकार के गठन को लेकर मंथन तेज हो जाएगा।
अपनी हार को सामने देख नेतन्याहू की पार्टी 'लिकुड' ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर आक्रामक रुख अपनाते हुए तीखा हमला बोला है। पार्टी ने दावा किया है कि इजरायल के चुनाव अरब दलों द्वारा चुरा लिए गए हैं। लिकुड ने इस तथाकथित घोटाले के सबूत देश की पुलिस, खुफिया एजेंसी 'शिन बेट' और केंद्रीय चुनाव समिति को सौंप दिए हैं।
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पार्टी का कहना है कि यह सिर्फ एक राजनीतिक हार नहीं, बल्कि इजरायली लोकतंत्र और मतदाताओं के अधिकारों पर सीधा प्रहार है। उन्होंने मांग की है कि इन आपराधिक कृत्यों की गहराई से जांच होनी चाहिए और दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए।
इजरायली मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, नेतन्याहू के खेमे की ओर से खाड़ी देश कतर पर भी इस पूरी प्रक्रिया में दखल देने के इशारे किए जा रहे हैं। हालांकि, कतर ने इन तमाम आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इन्हें पूरी तरह से "बेतुका और खतरनाक" करार दिया है।
दूसरी ओर, विपक्षी नेताओं ने नेतन्याहू के इन आरोपों को उनकी राजनीतिक हताशा बताया है। 'डेमोक्रेट्स' पार्टी के नेता यायर गोलान ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि अब यहूदी और अरब वोटों के बीच बांटे जाने वाले नस्लवादी नजरिए को और सहन नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि देश को आगे बढ़ाने के लिए डर के माहौल से बाहर निकलना होगा।
इस चुनाव परिणाम ने इजरायल में रह रहे अरब नागरिकों की राजनीतिक ताकत को एक बार फिर केंद्र में ला खड़ा किया है। इजरायल के ये अरब नागरिक मुख्य रूप से उन फिलिस्तीनियों के वंशज हैं जो 1948 में देश की स्थापना के बाद से वहीं बसे हुए हैं।
हालांकि 7 अक्टूबर 2023 के हमलों के बाद से इन समुदायों के प्रति अविश्वास और गहरा गया था, लेकिन इस बार के चुनाव परिणामों ने यह साबित कर दिया है कि इजरायली राजनीति में उनकी भूमिका को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। बहरहाल, नतीजों के बाद उपजे इस नए राजनीतिक संकट ने इजरायल के भविष्य पर एक बड़ा सवालिया निशान लगा दिया है।
Location : Jerusalem
Published : 30 October 2026, 10:51 AM IST