American Strike के बाद Iran का फारस की खाड़ी में पलटवार; अमेरिकी सैन्य ठिकाने पर दागीं मिसाइलें

ईरानी सरकारी मीडिया ने नई कासिम बशीर बैलिस्टिक मिसाइल को ईरान की सैन्य नीति में बदलाव का संकेत बताया था। ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के प्रमुख मोहसिन रेजाई ने दावा किया था कि इस मिसाइल का परीक्षण अमेरिकी युद्धपोत के खिलाफ किया गया।

Post Published By: Rohit Goyal
Updated : 9 September 2026, 10:05 AM IST
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तेहरान: मिडिल-ईस्ट में ईरान और अमेरिका के बीच तनाव एक बार फिर खतरनाक स्तर पर पहुंचता दिख रहा है। अमेरिका की ओर से ईरान के तेल टैंकरों पर कार्रवाई के बाद अब तेहरान ने जवाबी हमला किया है। ईरानी मीडिया के मुताबिक, IRGC Navy ने फारस की खाड़ी में 10 जहाजों और होर्मुज स्ट्रेट के पास 10 अन्य जहाजों को निशाना बनाया, जिनमें दो अमेरिकी जहाज भी शामिल थे।

अमेरिकी सैन्य ठिकाने पर दागीं मिसाइलें

ईरान ने जॉर्डन में मौजूद अमेरिकी सैन्य बेस को निशाना बनाकर कई बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं। जॉर्डन के मुताबिक, कुल 20 मिसाइलों में से 18 को उसके एयर डिफेंस सिस्टम ने हवा में ही रोक दिया। इस हमले के बाद क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य ठिकानों की सुरक्षा को लेकर चिंता और बढ़ गई है।

ईरान ने पहले ही दे दी थी बड़ी चेतावनी

ईरान की ओर से यह कार्रवाई ऐसे समय में हुई है जब तेहरान पहले ही अपनी सैन्य क्षमता और जवाबी कार्रवाई को लेकर चेतावनी दे चुका था।

सोमवार को ईरानी सरकारी मीडिया ने नई कासिम बशीर बैलिस्टिक मिसाइल को ईरान की सैन्य नीति में बदलाव का संकेत बताया था। ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के प्रमुख मोहसिन रेजाई ने दावा किया था कि इस मिसाइल का परीक्षण अमेरिकी युद्धपोत के खिलाफ किया गया।

हालांकि, यह स्पष्ट नहीं हुआ कि परीक्षण में वास्तव में कासिम बशीर मिसाइल का इस्तेमाल हुआ था या नहीं। ईरानी मीडिया ने इसे बड़ी सैन्य उपलब्धि बताया है। पिछले साल पेश की गई इस मिसाइल की रेंज कम से कम 1,200 किलोमीटर बताई गई थी।

अमेरिका का दावा- पहले ईरान ने किया हमला

अमेरिका ने दावा किया कि ईरान ने शनिवार को अमेरिकी युद्धपोतों पर बैलिस्टिक मिसाइलें दागी थीं। इसके जवाब में अमेरिकी सेना ने ईरान के तीन तेल टैंकरों को निशाना बनाया।

अमेरिकी नौसेना के मुताबिक, उसके युद्धपोत ईरानी हमलों से सुरक्षित बच निकलने में कामयाब रहे।

होर्मुज स्ट्रेट पर आमने-सामने अमेरिका और ईरान

होर्मुज स्ट्रेट को लेकर दोनों देशों के बीच तनाव और बढ़ गया है। व्हाइट हाउस ने मोहसिन रेजाई के उस प्लान को खारिज कर दिया है, जिसमें स्ट्रेट के पास एक्सक्लूजन जोन बनाने की बात कही गई थी।

अमेरिका का कहना है कि यह महत्वपूर्ण जलमार्ग खुला रहेगा और अमेरिकी नियंत्रण में रहेगा। अमेरिकी सेना के अनुसार, उसकी नौसेना ने स्ट्रेट से बारूदी सुरंगें हटाई हैं और आने वाले समय में ईरान के अलावा अन्य बंदरगाहों की ओर जाने वाले टैंकरों की आवाजाही बढ़ सकती है।

94 कमर्शियल जहाजों का बदला गया रास्ता

अमेरिकी सेना के मुताबिक, ईरानी बंदरगाहों पर वॉशिंगटन की नाकेबंदी अभी भी जारी है। इस दौरान 94 कमर्शियल जहाजों का रास्ता बदला गया, जबकि तीन जहाजों को बेकार कर दिया गया।

वहीं, ईरान चाहता है कि होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले जहाजों को तेहरान द्वारा निर्धारित मार्ग का इस्तेमाल करना होगा। इस टकराव के बीच क्षेत्र में समुद्री यातायात पर बड़ा असर पड़ा है और दुनिया भर में जहाजों की आवाजाही में कमी आई है।

होर्मुज स्ट्रेट क्यों है इतना अहम?

होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में से एक है। यहां किसी भी बड़े सैन्य टकराव या जहाजों की आवाजाही में रुकावट का असर कच्चे तेल की सप्लाई, वैश्विक ऊर्जा बाजार और अंतरराष्ट्रीय शिपिंग पर पड़ सकता है। यही वजह है कि ईरान-अमेरिका के बीच इस क्षेत्र में बढ़ता तनाव पूरी दुनिया के लिए चिंता का विषय बन गया है।

Location :  New Delhi

Published :  9 September 2026, 10:03 AM IST

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