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डोनाल्ड ट्रंप और होर्मुज जलडमरूमध्य (Img: Dynamite News)
New Delhi: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर दावा किया कि अमेरिका का होर्मुज जलडमरूमध्य पर लगभग पूरा नियंत्रण हो चुका है। यह बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिका और ईरान के बीच फिर से सैन्य हमले तेज हो गए हैं।
होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में शामिल है। यहां किसी भी तरह की रुकावट का सीधा असर तेल और गैस की वैश्विक आपूर्ति पर पड़ सकता है। मौजूदा संघर्ष के कारण इस मार्ग से जहाजों की आवाजाही पहले ही प्रभावित हुई है।
ट्रंप ने दावा किया कि अमेरिकी कार्रवाई और लगातार आर्थिक दबाव के कारण ईरान की अर्थव्यवस्था पूरी तरह ढहने की स्थिति में है। हालांकि, यह ट्रंप का राजनीतिक दावा है और ईरान की अर्थव्यवस्था की वास्तविक स्थिति इससे अधिक जटिल है।
रॉयटर्स के मुताबिक, युद्ध और अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण ईरान के तेल निर्यात पर बड़ा असर पड़ा है। अगस्त में ईरान की कच्चे तेल की लोडिंग मार्च के करीब 20 लाख बैरल प्रतिदिन से घटकर लगभग 2.2 से 2.55 लाख बैरल प्रतिदिन रह गई। इससे ईरान की विदेशी मुद्रा आय पर भारी दबाव पड़ा है।
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ट्रंप ने उन खबरों को भी खारिज किया, जिनमें कहा गया था कि अमेरिका ईरान को बातचीत की मेज पर वापस लाने की कोशिश कर रहा है। उन्होंने साफ संकेत दिया कि फिलहाल उनकी प्राथमिकता ईरान पर दबाव बनाए रखना है। ट्रंप ने कहा कि अगर ईरान कोई ऐसा समझौता करता है जिससे उसे फायदा नहीं होता, तो भी उन्हें इसकी चिंता नहीं है। उन्होंने ईरान के लोगों से अपनी सरकार के खिलाफ आवाज उठाने का भी आह्वान किया।
अमेरिका ने हाल में ईरान के कई सैन्य ठिकानों और रक्षा से जुड़े ठिकानों पर हवाई हमले किए। इनमें एयर डिफेंस, रडार, समुद्री क्षमताओं और संचार से जुड़े ठिकाने शामिल बताए गए हैं। इसके जवाब में ईरान ने भी अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाया। ईरान की ओर से जॉर्डन, बहरीन और इराक में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन हमलों की खबरें सामने आईं। जॉर्डन और बहरीन ने कुछ मिसाइलों और ड्रोन को रोकने का दावा किया है।
अमेरिका और ईरान के बीच फिर बढ़े संघर्ष से एक बार फिर युद्धविराम की उम्मीदों को झटका लगा है। दोनों देशों के बीच पहले भी तनाव कम करने की कोशिश हुई थी, लेकिन हालिया घटनाओं के बाद स्थिति दोबारा बिगड़ गई है। ईरान लगातार होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर अपनी रणनीतिक स्थिति मजबूत करने की कोशिश कर रहा है, जबकि अमेरिका इसे अंतरराष्ट्रीय जहाजों की आवाजाही के लिए सुरक्षित रखने पर जोर दे रहा है।
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होर्मुज जलडमरूमध्य में लंबे समय तक तनाव रहने का असर केवल अमेरिका और ईरान तक सीमित नहीं रहेगा। यह मार्ग वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। यहां जहाजों की आवाजाही प्रभावित होने से तेल की कीमतों, व्यापार और कई देशों की अर्थव्यवस्था पर असर पड़ सकता है।
फिलहाल अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम होने के संकेत कमजोर हैं। ऐसे में आने वाले दिनों में होर्मुज जलडमरूमध्य की स्थिति और दोनों देशों की अगली सैन्य कार्रवाई पर पूरी दुनिया की नजर रहेगी।
Location : New Delhi
Published : 2 September 2026, 10:23 AM IST