US Iran Conflict: ट्रंप का ईरान पर आर्थिक हमला; तेल से लेकर बैंकों तक शिकंजा, बढ़ा युद्ध का खतरा

अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर बढ़ता दिखाई दे रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान पर आर्थिक दबाव बढ़ाने के लिए बड़ा अभियान शुरू करने का ऐलान किया है। उनका निशाना ईरान के तेल कारोबार, वित्तीय लेन-देन और उन कंपनियों पर होगा, जिनके जरिए ईरान को आर्थिक मदद मिलती है।

Post Published By: Komal Chauhan
Updated : 25 August 2026, 10:29 AM IST
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New Delhi: राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 20 अगस्त को कहा कि ईरान को अमेरिका के साथ बातचीत के लिए कई मौके दिए गए थे, लेकिन तेहरान इन अवसरों का फायदा नहीं उठा सका। इसके बाद अमेरिका ने ईरान पर आर्थिक दबाव बढ़ाने का फैसला किया है।

ट्रंप प्रशासन की योजना के तहत ईरान से जुड़े तेल तस्करी नेटवर्क और पैसों के लेन-देन पर नजर रखी जाएगी। इसके अलावा एक्सचेंज हाउस, जहाजों के रजिस्ट्रेशन और ऐसी कंपनियों को भी निशाना बनाया जाएगा, जिनका इस्तेमाल ईरान के साथ कारोबार छिपाने के लिए किया जाता है।

दूसरे देशों को भी अमेरिका की चेतावनी

अमेरिकी राष्ट्रपति ने केवल ईरान को ही निशाने पर नहीं लिया है। उन्होंने दूसरे देशों को भी चेतावनी दी है कि अगर उनके बैंक, वित्तीय संस्थान, कंपनियां, एयरपोर्ट या सरकारी एजेंसियां ईरान की मदद करती हैं, तो उनके खिलाफ भी कड़ी आर्थिक कार्रवाई की जा सकती है।

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अमेरिका की कोशिश है कि ईरान तक पहुंचने वाले पैसों के रास्ते को सीमित किया जाए। इसके लिए तेल कारोबार और अंतरराष्ट्रीय वित्तीय नेटवर्क पर दबाव बढ़ाया जा रहा है। इससे ईरान की अर्थव्यवस्था पर असर डालने की कोशिश की जा रही है।

 मुश्किल से निकलने के लिए तैयार

अमेरिकी दबाव के बीच ईरान ने भी अपना रुख स्पष्ट किया है। ईरानी सरकार की प्रवक्ता फातमेह मोहाजेरानी ने कहा कि सरकार और राष्ट्रपति देश को मौजूदा संकट से बाहर निकालने के लिए गंभीरता और मजबूती के साथ काम कर रहे हैं।

उन्होंने माना कि देश आर्थिक परेशानियों से गुजर रहा है, लेकिन उनका कहना है कि ईरान पहले भी कठिन परिस्थितियों का सामना कर चुका है। सरकार का दावा है कि एकता और सही फैसलों के जरिए देश इस बार भी संकट से बाहर निकल सकता है।

नेतन्याहू ने ट्रंप के कदम का किया स्वागत

इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने ईरान के खिलाफ अमेरिका की नई आर्थिक कार्रवाई का समर्थन किया है। उन्होंने ट्रंप और अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट की तारीफ करते हुए कहा कि नए प्रतिबंध ईरानी सरकार और उसकी आक्रामक गतिविधियों को समर्थन देने वालों पर आर्थिक दबाव बढ़ाएंगे।

इजरायल लंबे समय से ईरान की सैन्य और परमाणु क्षमताओं को क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा बताता रहा है। ऐसे में अमेरिका की नई कार्रवाई को इजरायल की ओर से महत्वपूर्ण समर्थन मिलना दोनों देशों के बीच रणनीतिक सहयोग को भी दिखाता है।

आर्थिक दबाव के साथ सैन्य विकल्प भी खुला

ईरान के खिलाफ अमेरिका की रणनीति केवल आर्थिक प्रतिबंधों तक सीमित नहीं दिखाई दे रही है। एक तरफ तेल और वित्तीय नेटवर्क पर दबाव बढ़ाया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर सैन्य विकल्प भी खुला रखा गया है।

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अमेरिकी सैन्य बलों से सीधा टकराव

इस मामले में होर्मुज जलडमरूमध्य बेहद महत्वपूर्ण है। यह दुनिया के प्रमुख ऊर्जा परिवहन मार्गों में शामिल है। अगर ईरान यहां जहाजों की आवाजाही रोकने की कोशिश करता है या अमेरिकी सैन्य बलों से सीधा टकराव होता है, तो मौजूदा तनाव तेजी से सैन्य संघर्ष में बदल सकता है।

फिलहाल अमेरिका का मुख्य जोर आर्थिक दबाव बढ़ाने पर है, लेकिन जरूरत पड़ने पर सैन्य कार्रवाई की संभावना से भी इनकार नहीं किया गया है। ऐसे में आने वाले दिनों में अमेरिका-ईरान संबंधों पर पूरी दुनिया की नजर रहेगी।

Location :  New Delhi

Published :  25 August 2026, 10:29 AM IST

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