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ईरान के गोरगन शहर में 19 वर्षीय मोटरसाइकिल इन्फ्लुएंसर डायना बहादुरी की सुरक्षा बलों की कार्रवाई में गोली लगने से मौत हो गई। वह विरोध प्रदर्शनों में शामिल थीं। परिवार पर मौत को हादसा बताने का दबाव होने के आरोप हैं।
मोटरसाइकिल इन्फ्लुएंसर डायना बहादुरी (Img: Instagram)
Gorgan: ईरान के गोरगन शहर से एक चौंकाने वाली और बेहद संवेदनशील घटना सामने आई है। गोम्बद-ए-कावुस की रहने वाली 19 वर्षीय मोटरसाइकिल इन्फ्लुएंसर डायना बहादुरी, जिन्हें सोशल मीडिया पर “बेबी राइडर” के नाम से जाना जाता था, उनकी 9 जनवरी को सुरक्षा बलों की कार्रवाई के दौरान गोली लगने से मौत हो गई।
इस घटना ने ईरान में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और महिलाओं की सुरक्षा को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
डायना बहादुरी ईरान की जानी-मानी युवा मोटरसाइकिल राइडर थीं। वह अपने अनोखे स्टाइल, निडर अंदाज और पावरफुल सुपरबाइक्स पर बेहतरीन नियंत्रण के लिए युवाओं के बीच बेहद लोकप्रिय थीं। इंस्टाग्राम और अन्य प्लेटफॉर्म पर उनकी बड़ी फैन फॉलोइंग थी, जहां वह न केवल राइडिंग वीडियो साझा करती थीं, बल्कि एक स्वतंत्र और आधुनिक महिला की छवि भी पेश करती थीं।
सूत्रों के अनुसार, 9 जनवरी की आधी रात के आसपास गोरगन शहर में चल रही सुरक्षा कार्रवाई के दौरान डायना को दो गोलियां मारी गईं। बताया गया कि उनके लापता होने के बाद परिवार ने दो दिनों तक उनकी तलाश की, जिसके बाद 11 जनवरी को उनका शव बरामद हुआ। इस दौरान परिवार को किसी भी आधिकारिक जानकारी से दूर रखा गया।
सूत्रों का कहना है कि डायना 8 और 9 जनवरी की रात को गोरगन में हुए विरोध प्रदर्शनों में शामिल थीं। 9 जनवरी की कार्रवाई को बेहद क्रूर बताया जा रहा है, जिसमें सुरक्षा बलों द्वारा प्रदर्शनकारियों के खिलाफ मशीन गन सहित भारी हथियारों के इस्तेमाल के आरोप लगे हैं। इस कार्रवाई में कई लोगों के घायल होने की भी खबरें सामने आई थीं।
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डायना की मौत के बाद उनके इंस्टाग्राम अकाउंट से एक पोस्ट साझा की गई, जिसमें दावा किया गया कि उनकी मौत एक ड्राइविंग दुर्घटना में हुई। पोस्ट में परिवार की ओर से अफवाहें न फैलाने की अपील की गई थी। हालांकि, एक सूत्र ने बताया कि बहादुरी परिवार पर खुफिया और सुरक्षा एजेंसियों का भारी दबाव है।
सूत्रों के मुताबिक, डायना को गुपचुप तरीके से दफनाया गया और परिवार को सार्वजनिक रूप से यह कहने से रोका गया कि उनकी मौत में सरकारी एजेंसियों की भूमिका थी। ईरान में ऐसे मामलों में पीड़ित परिवारों को अक्सर धमकाया जाता है कि अगर वे आधिकारिक बयान नहीं देंगे, तो उनके अन्य बच्चों को गिरफ्तार किया जा सकता है या शव सौंपने से इनकार किया जाएगा।