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UNHRC में भारत का पाकिस्तान पर तीखा प्रहार (Image Source: Pinterest)
New Delhi: संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद (UNHRC) के मंच पर भारत ने पाकिस्तान को ऐसी कड़ी फटकार लगाई कि पूरी दुनिया के सामने उसके दोहरे रवैये पर सवाल खड़े हो गए। आतंकवाद, सिंधु जल समझौता और जम्मू-कश्मीर जैसे मुद्दों पर भारत ने पाकिस्तान को सीधे निशाने पर लेते हुए साफ कर दिया कि जो देश आतंकवाद को अपनी नीति का हिस्सा बनाता है, वह सद्भावना और सहयोग के आधार पर बने समझौतों से फायदा उठाने की उम्मीद नहीं कर सकता। भारत के इस सख्त रुख ने एक बार फिर दोनों देशों के बीच बढ़े तनाव को वैश्विक मंच पर उजागर कर दिया है।
UNHRC में पाकिस्तान की ओर से लगाए गए आरोपों का जवाब देते हुए भारत की प्रथम सचिव अनुपमा सिंह ने बेहद स्पष्ट और सख्त शब्दों का इस्तेमाल किया। उन्होंने कहा कि सिंधु जल समझौते को लेकर भारत का रुख पूरी तरह साफ है और इसमें किसी तरह की भ्रम की स्थिति नहीं है। उन्होंने कहा कि यह समझ से परे है कि एक तरफ पाकिस्तान लगातार सीमा पार आतंकवाद को बढ़ावा दे और दूसरी तरफ भारत की सद्भावना पर आधारित व्यवस्था का लाभ भी लेना चाहता रहे। भारत का मानना है कि दोनों बातें एक साथ नहीं चल सकतीं।
अनुपमा सिंह ने कहा कि 1960 में हुआ सिंधु जल समझौता आज के दौर की चुनौतियों और वास्तविकताओं से काफी पीछे छूट चुका है। दुनिया बदल चुकी है, तकनीक बदल चुकी है और जल संसाधनों के प्रबंधन की जरूरतें भी बदल गई हैं। ऐसे में छह दशक पुराने समझौते को बिना किसी समीक्षा के जारी रखना व्यावहारिक नहीं माना जा सकता।
भारत ने स्पष्ट किया कि सिंधु जल समझौते का मूल आधार दोनों देशों के बीच सहयोग, विश्वास और सद्भावना था। लेकिन जब एक पक्ष लगातार आतंकवाद को बढ़ावा देता रहे, तो ऐसे समझौतों की भावना प्रभावित होती है। भारत ने यह भी याद दिलाया कि हाल ही में हुए पहलगाम आतंकी हमले ने देश को झकझोर दिया था। इस हमले में 26 लोगों की जान चली गई थी। इस घटना के बाद भारत ने सिंधु जल समझौते को अस्थायी रूप से स्थगित करने का फैसला लिया था और कहा था कि जब तक पाकिस्तान सीमा पार आतंकवाद को पूरी तरह खत्म नहीं करता, तब तक इस समझौते को सामान्य रूप से लागू करना संभव नहीं होगा।
भारत की ओर से सबसे तीखा हमला तब देखने को मिला जब अनुपमा सिंह ने पाकिस्तान को 'फ्रेंकेंस्टीन स्टेट' बताया। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान वर्षों से चरमपंथी संगठनों को बढ़ावा देता रहा है और उन्हें अपने रणनीतिक हितों के लिए इस्तेमाल करता रहा है। उन्होंने कहा कि जब यही चरमपंथी संगठन बाद में पाकिस्तान के लिए खतरा बन जाते हैं, तब वह खुद को आतंकवाद का पीड़ित बताने लगता है। भारत के मुताबिक यह पाकिस्तान की सबसे बड़ी विडंबना और दोहरी नीति है।
भारत ने जम्मू-कश्मीर के मुद्दे पर भी अपना रुख दोहराया। अनुपमा सिंह ने पाकिस्तान और इस्लामिक सहयोग संगठन (OIC) की ओर से दिए गए बयानों को पूरी तरह खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर को लेकर फैलाया जा रहा दुष्प्रचार पाकिस्तान की घरेलू विफलताओं से ध्यान हटाने की कोशिश है। भारत ने दोहराया कि जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न और अविभाज्य हिस्सा है। इस विषय पर भारत का रुख पहले भी स्पष्ट था और आगे भी रहेगा।
UNHRC में दिए गए इस बयान को भारत की कूटनीतिक रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है। भारत ने एक बार फिर यह संदेश देने की कोशिश की है कि आतंकवाद और बातचीत एक साथ नहीं चल सकते। साथ ही यह भी स्पष्ट कर दिया गया कि भारत अपने राष्ट्रीय हितों, सुरक्षा और संप्रभुता से जुड़े मुद्दों पर किसी तरह का समझौता करने के मूड में नहीं है।
Location : New Delhi
Published : 19 June 2026, 8:37 AM IST
Topics : India Indus Waters Treaty Jammu Kashmir Pakistan UNHRC